रैगिंग पर बड़ा एक्शन: BRD मेडिकल कॉलेज के 18 छात्र सस्पेंड, 25-25 हजार पेनल्टी

उत्तरप्रदेश|3 घंटे पहले
BRD मेडिकल कॉलेज के 18 छात्र सस्पेंड, 25-25 हजार पेनल्टी

बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों के साथ हुई रैगिंग का मामला अब गंभीर प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंच गया है। एंटी रैगिंग कमेटी की जांच में 18 सीनियर छात्रों को दोषी पाए गए हैं। कॉलेज प्रशासन ने उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कदम उठाए हैं। सभी आरोपित छात्रों को एक महीने के लिए हॉस्टल और शैक्षणिक गतिविधियों से निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही प्रत्येक छात्र पर 25-25 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन की इस कार्रवाई को संस्थान में अनुशासन और छात्र सुरक्षा को लेकर बड़ा संदेश माना जा रहा है।

कार्रवाई की जद में सबसे अधिक 2024 बैच के छात्र आए हैं। वहीं 2023 और 2022 बैच के कुछ छात्रों की संलिप्तता भी जांच में सामने आई है। कॉलेज प्रशासन ने मामले में दो रेजिडेंट छात्राओं को चेतावनी नोटिस जारी करने का निर्णय लिया है। वहीं प्रथम वर्ष के पांच छात्रों की भूमिका भी जांच के घेरे में है। आरोप है कि इन छात्रों ने सीनियर छात्रों का सहयोग किया था। रैगिंग की घटनाओं में अप्रत्यक्ष रूप से मदद पहुंचाई थी। कमेटी इन छात्रों के खिलाफ भी अलग से कार्रवाई की तैयारी कर रही है।

शिकायत के बाद हरकत में आया प्रशासन

मामला उस समय उजागर हुआ जब नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को मेडिकल कॉलेज के एक छात्र की ओर से गोपनीय शिकायत भेजी गई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि राजेंद्र हॉस्टल में रहने वाले प्रथम वर्ष के छात्रों के साथ लगातार मानसिक प्रताड़ना और रैगिंग की घटनाएं हो रही हैं। बाद में एक अन्य व्यक्ति ने भी कुछ डिजिटल साक्ष्यों और विवरणों के साथ दोनों संस्थाओं को शिकायत भेजी। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए एनएमसी ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन को तत्काल जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

प्राचार्य ने बुलाई इमरजेंसी बैठक

मंगलवार को एंटी रैगिंग कमेटी की पहली बैठक आयोजित की गई थी। उस बैठक में अंतिम निर्णय नहीं हो सका। बुधवार को एनएमसी की ओर से कड़ा ईमेल मिलने के बाद कॉलेज प्रशासन पूरी तरह एक्टिव हो गया। प्राचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल की अध्यक्षता में आपात बैठक बुलाई गई थी। जिसमें प्रथम वर्ष के छात्रों के साथ-साथ आरोपित छात्रों को भी तलब किया गया था। सभी छात्रों से अलग-अलग पूछताछ की गई और उनके बयान दर्ज किए गए हैं। जांच के दौरान कई तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए कमेटी ने आरोपों को गंभीर माना और दोषी छात्रों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का निर्णय लिया।

सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

रैगिंग विवाद के बीच हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है। प्रथम वर्ष के छात्रों वाले विंग में लगे पांच सीसी कैमरे टूटे पाए गए हैं। कॉलेज प्रशासन ने इस घटना की जानकारी एंटी रैगिंग कमेटी को दे दी है। प्रशासन का मानना है कि कैमरे तोड़े जाने के पीछे रैगिंग की गतिविधियों को छिपाने की मंशा हो सकती है। अब हॉस्टल में नए सीसी कैमरे लगाने और प्रथम वर्ष के छात्रों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सुरक्षा गार्ड तैनात करने का फैसला लिया गया है। प्राचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल ने स्पष्ट कहा कि मेडिकल कॉलेज परिसर में रैगिंग किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि छात्रों की सुरक्षा संस्थान की सर्वोच्च प्राथमिकता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था और अधिक मजबूत की जाएगी। कॉलेज प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद परिसर में अनुशासन और सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

नव्य जागरण

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