बांदा में सड़क हादसे में छह की मौत: शिक्षक और ई-रिक्शा को ट्रॉली ने रौंदा, मां के आंचल में बची मासूम

बांदा जिले के बिसंडा कस्बे में बुधवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। तेज रफ्तार बालू लदी ट्रॉली ने पहले एक सेवानिवृत्त शिक्षक को कुचल दिया और फिर भागते समय ई-रिक्शा को रौंदते हुए छह लोगों की जिंदगी छीन ली। हादसे के बाद सड़क पर खून, चीख-पुकार और बिखरे सामान के बीच मातम का ऐसा मंजर था जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया। बकरीद से ठीक पहले हुए इस हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं, जबकि तीन माह की मासूम साफिया अपनी मां के आंचल में चमत्कारिक रूप से बच गई।
घटना की उस समय हुई जब खुरहंड से बालू लेकर जा रहा तेज रफ्तार ट्रॉली बिसंडा-ओरन रोड पर घूरी गांव निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक रामेश्वर प्रसाद (61) को कुचलता हुआ निकल गया। जानकारी के अनुसार ट्रॉली का पहिया शिक्षक के सिर के ऊपर से गुजर गया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद चालक वाहन लेकर फरार होने लगा। स्थानीय लोगों ने बाइक से ट्रॉली का पीछा शुरू किया। करीब दो किलोमीटर आगे नाथू तालाब के पास भागते ट्रॉली ने सामने से आ रहे ई-रिक्शा को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि ई-रिक्शा उछलकर खंती में जा गिरा और पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। ट्रॉली भी अनियंत्रित होकर पलट गई।
बकरीद की खरीदारी पर निकले थे
हादसे में कोर्रही गांव निवासी मुबीन (40), ममता (48), राकेश (45), शहबाज (12) और बाद में इलाज के दौरान सोहनलाल की मौत हो गई है। कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों में शबाना, बौरी देवी, शिवकली और मासूम साफिया शामिल हैं। सबसे मार्मिक दृश्य उस समय सामने आया जब पता चला कि हादसे के दौरान मां शबाना ने अपनी तीन माह की बेटी साफिया को सीने से चिपकाकर बचा लिया। हालांकि उसी हादसे में उसका 10 वर्षीय बेटा शहबाज जिंदगी की जंग हार गया। बकरीद की खरीदारी के लिए निकला परिवार कुछ ही पलों में मातम में बदल गया। स्थानीय लोगों के अनुसार मृतक मुबीन सऊदी अरब में काम करता था और छह साल बाद दो महीने पहले ही गांव लौटा था। वह परिवार के साथ त्योहार की खरीदारी करने जा रहा था। दूसरी ओर शबाना का पति मुंबई में मजदूरी करता है। हादसे के बाद गांव कोर्रही में कई घरों में एक साथ मातम पसर गया। पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर परिजनों की चीखें और अस्पताल में घायल महिलाओं का विलाप हर किसी को विचलित कर रहा था।
प्रशासन पर फूटा लोगों का गुस्सा
हादसे के बाद बिसंडा कस्बे में भारी आक्रोश फैल गया। लोगों ने बांदा रोड पर जाम लगाकर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कस्बे के भीतर से रोजाना ओवरलोड बालू ट्रक तेज रफ्तार में गुजरते हैं और कई बार नो-इंट्री लागू करने की मांग प्रशासन से की जा चुकी है। इसके बावजूद कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक उदासीनता ने छह लोगों की जान ले ली है।
फरार चालक की तलाश में जुटी पुलिस
करीब दो घंटे तक यातायात पूरी तरह बाधित रहा है। मौके पर पहुंचे अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. शिवराज और एडीएम मायाशंकर ने लोगों को समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों ने कार्रवाई और सहायता का आश्वासन दिया है। जिसके बाद जाम खुल सका। वहीं जिलाधिकारी अमित आसेरी ने बताया कि ट्रॉली चालक के खिलाफ केस दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस फरार चालक की तलाश में जुटी है।
टूटे भरोसे के बीच उठे सुरक्षा पर सवाल
हादसे के बाद एक बार फिर भारी वाहनों की आवाजाही, ट्रैफिक नियंत्रण और सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते नो-इंट्री लागू की जाती और ओवरलोड वाहनों पर सख्ती होती, तो इतने बड़े हादसे को रोका जा सकता था। त्योहार से पहले हुए इस दर्दनाक हादसे ने पूरे बांदा जिले को शोक में डुबो दिया है।
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