हर सरकारी स्कूल में दो शिक्षक अनिवार्य: हाईकोर्ट ने छह प्रारूपों में मांगी जानकारी, 13 जुलाई तक डेटा सौंपने का निर्देश

उत्तर प्रदेश के सरकारी प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि प्रदेश के प्रत्येक सरकारी स्कूल में कम से कम दो शिक्षकों की तैनाती सुनिश्चित की जाए। कोर्ट के आदेश के बाद शासन ने सभी जिलों से शिक्षकों और विद्यालयों से जुड़ा विस्तृत ब्योरा तलब किया है।
हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने प्रदेश के सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों और शिक्षा निदेशकों को निर्देश जारी किए हैं। शासन ने जिलों से छह अलग-अलग प्रारूपों में जानकारी मांगी है। इसमें सरप्लस शिक्षकों, गैर-सरप्लस शिक्षकों, एक शिक्षक वाले विद्यालयों, बंद स्कूलों तथा शिक्षकों की कमी वाले विद्यालयों का पूरा विवरण शामिल है।
याचिका पर सुनवाई के बाद आया आदेश
यह आदेश सौरभ कुमार सिंह और छह अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान छह जुलाई 2026 को दिया गया था। मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को प्रस्तावित है। तब तक अदालत ने अपना पूर्व अंतरिम आदेश प्रभावी रखने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने सरकार से प्रदेश के एक लाख से अधिक विद्यालयों का श्रेणीवार डेटा तैयार कर उसे पारदर्शिता के लिए विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराने को कहा है।
तीन श्रेणियों में तैयार होगा डेटा
अदालत ने निर्देश दिया है कि ऐसे विद्यालयों की अलग सूची तैयार की जाए, जहां निर्धारित मानक के अनुसार शिक्षक उपलब्ध हैं और कोई भी शिक्षक सरप्लस नहीं है। दूसरी श्रेणी में उन स्कूलों को रखा जाएगा, जहां आवश्यकता से अधिक शिक्षक तैनात हैं और उनका समायोजन किया जाना है। तीसरी श्रेणी में प्रदेश के 16,986 ऐसे विद्यालय शामिल होंगे, जहां शिक्षकों की कमी है। इन विद्यालयों में सबसे पहले न्यूनतम दो शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित करने को कहा गया है।
वेबसाइट पर सार्वजनिक होगी पूरी जानकारी
हाईकोर्ट के निर्देशानुसार वेबसाइट पर प्रत्येक विद्यालय से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। इसमें जिला, ब्लॉक और विद्यालय का नाम, आरटीई अधिनियम के तहत स्वीकृत पद, कार्यरत शिक्षकों के नाम और उनकी नियुक्ति तिथि, 30 अप्रैल 2026 तक छात्र संख्या, छात्र-शिक्षक अनुपात के अनुसार आवश्यक शिक्षकों की संख्या तथा सरप्लस घोषित शिक्षकों का विवरण शामिल होगा। प्रयागराज बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव को यह पूरा डेटा 13 जुलाई तक शपथ-पत्र के साथ न्यायालय में प्रस्तुत करना है। इसके बाद सरप्लस घोषित शिक्षक 17 जुलाई तक अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे।
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