गोरखपुर-शामली ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे का काम तेज: बिजनौर में भूमि चिह्निकरण शुरू, बदलेगी यूपी की कनेक्टिविटी

उत्तरप्रदेश|1 घंटा पहले
बिजनौर में भूमि चिह्निकरण शुरू, बदलेगी यूपी की कनेक्टिविटी

पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को हाईस्पीड सड़क नेटवर्क से जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी गोरखपुर-शामली ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे परियोजना अब जमीन पर आकार लेने लगी है। बिजनौर जिले के स्योहारा क्षेत्र में एक्सप्रेस-वे के लिए भूमि चिह्निकरण का कार्य शुरू कर दिया गया है। गांव निचलपुर और मिलक समेत कई इलाकों में खेतों के बीच सीमेंटेड पोल लगाकर प्रस्तावित मार्ग की निशानदेही की जा रही है। परियोजना की शुरुआत के साथ ही क्षेत्र में विकास और जमीन अधिग्रहण को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से इस परियोजना के लिए चयनित गांवों में सर्वे और नापजोख का कार्य कराया जा रहा है। स्योहारा क्षेत्र के लगभग 20 गांव इस एक्सप्रेस-वे परियोजना की जद में आ रहे हैं। अलग-अलग टीमों ने गांव निचलपुर और मिलक पहुंचकर खेतों में खुदाई कर सीमेंटेड पोल लगाए और प्रस्तावित मार्ग का प्रारंभिक चिह्निकरण किया। अधिकारियों के अनुसार यह प्रक्रिया भूमि अधिग्रहण की तैयारी का हिस्सा है।

खेतों में लगाए जा रहे सीमेंटेड पोल

स्थानीय लोगों के मुताबिक निचलपुर और मिलक गांवों में तीन से चार अलग-अलग स्थानों पर एक साथ सर्वे कार्य चल रहा है। टीमें खेतों के बीच पोल लगाकर एक्सप्रेस-वे की संभावित चौड़ाई और दिशा का निर्धारण कर रही हैं। किसानों और ग्रामीणों में इस परियोजना को लेकर उत्सुकता भी है और आशंकाएं भी। कई ग्रामीणों का कहना है कि एक्सप्रेस-वे बनने से क्षेत्र में विकास की रफ्तार बढ़ेगी। जमीन अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर स्पष्ट जानकारी का इंतजार किया जा रहा है। गोरखपुर-शामली ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे लगभग 750 किलोमीटर लंबा और करीब 150 मीटर चौड़ा प्रस्तावित है। यह परियोजना पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच सीधी और तेज कनेक्टिविटी उपलब्ध कराएगी। एक्सप्रेस-वे बिजनौर जिले के धामपुर, स्योहारा और नहटौर क्षेत्र के कई गांवों से होकर गुजरेगा। अधिकारियों का मानना है कि यह परियोजना उत्तर प्रदेश के आर्थिक और औद्योगिक विकास में बड़ी भूमिका निभाएगी।

पूर्वी और पश्चिमी यूपी के बीच घटेगी दूरी

एक्सपर्ट्स के अनुसार यह एक्सप्रेस-वे केवल सड़क परियोजना नहीं, बल्कि प्रदेश की आर्थिक तस्वीर बदलने वाली योजना साबित हो सकता है। इससे माल परिवहन तेज होगा, यात्रा का समय कम होगा और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश के कृषि उत्पाद और उद्योग पश्चिमी यूपी और दिल्ली-एनसीआर तक तेजी से पहुंच सकेंगे। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के व्यापारिक केंद्रों को पूर्वांचल से सीधा संपर्क मिलेगा। परियोजना के पूरा होने के बाद रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के नए अवसर भी पैदा होने की संभावना जताई जा रही है। एक्सप्रेस-वे के किनारे औद्योगिक कॉरिडोर, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक पार्क और नए व्यवसायिक केंद्र विकसित किए जाने की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं।

वर्ष 2030 तक पूरा होने की उम्मीद

अधिकारियों के अनुसार गोरखपुर-शामली एक्सप्रेस-वे परियोजना को वर्ष 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। फिलहाल भूमि चिह्निकरण और सर्वे का कार्य प्राथमिक चरण में चल रहा है। आने वाले समय में भूमि अधिग्रहण, मुआवजा वितरण और निर्माण प्रक्रिया को गति दी जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में परियोजना को लेकर चर्चाओं का दौर लगातार जारी है। जहां एक ओर लोग इसे विकास की नई राह मान रहे हैं। वहीं किसान अपनी जमीन और मुआवजे को लेकर प्रशासन से स्पष्ट नीति की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि इतना तय माना जा रहा है कि यह एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी और परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देने वाला साबित होगा।

नव्य जागरण

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