पटना में गंगा नदी में डूबी 15 लोगों से भरी नाव: पिता-पुत्र समेत तीन की मौत, चार लोग लापता

पटना|1 घंटा पहले
पिता-पुत्र समेत तीन की मौत, चार लोग लापता

बिहार की राजधानी पटना के बाढ़ अनुमंडल क्षेत्र में गुरुवार सुबह गंगा नदी में दर्दनाक नाव हादसा हो गया। उमानाथ इलाके के पास तेज हवा और अधिक भार के कारण एक नाव बीच धारा में पलट गई। हादसे में तीन लोगों की डूबने से मौत हो गई। वहीं चार लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। स्थानीय मल्लाहों और गोताखोरों की मदद से सात लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। मृतकों में पिता-पुत्र भी शामिल हैं, जिससे पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है।

जानकारी के अनुसार नाव पर करीब 14 से 15 लोग सवार थे। जिनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे शामिल थे। सभी लोग बाढ़ थाना क्षेत्र के मासूमगंज बिंद टोली के निवासी बताए जा रहे हैं। गुरुवार सुबह करीब 5:45 बजे ये लोग नाव के जरिए समस्तीपुर जिले के सुल्तानपुर दियारा इलाके में खेती और सब्जी तोड़ने के काम से गए थे। वापसी के दौरान अचानक मौसम खराब हो गया और गंगा नदी में तेज हवा चलने लगी। इसी दौरान क्षमता से अधिक भार होने के कारण नाव असंतुलित होकर बीच नदी में पलट गई।

बीच धारा में डगमगाई नाव

प्रत्यक्षदर्शियों और नाव पर सवार लोगों के मुताबिक जैसे ही नाव गंगा की बीच धारा में पहुंची, वह तेज हवा के कारण डगमगाने लगी। नाव में बैठे लोग कुछ समझ पाते उससे पहले ही नाव पानी में समा गई। नदी की तेज धार के कारण कई लोग बहने लगे। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी फैल गई। स्थानीय मल्लाहों और गोताखोरों ने बहादुरी दिखाते हुए तुरंत गंगा में छलांग लगा दी और बचाव अभियान शुरू किया। उनकी मदद से सात लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। सभी घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां उनका इलाज जारी है। घायलों में राहुल कुमार, ममता देवी, कबूतरी कुमारी और एक 16 वर्षीय किशोरी शामिल हैं। अन्य घायलों की पहचान अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है।

मृतकों में पिता-पुत्र भी शामिल

हादसे में मरने वालों की पहचान नीलम कुमारी (30), श्रवण महतो (36) और उनके पुत्र काशी कुमार (15) के रूप में हुई है। पिता और बेटे की एक साथ मौत से गांव में शोक का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं चार अन्य लोगों के लापता होने की सूचना के बाद प्रशासन और राहत एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए है। एसडीआरएफ की टीम को रेस्क्यू ऑपरेशन में लगाया गया है। गोताखोर लगातार गंगा नदी में लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं। प्रशासन ने आशंका जताई है कि तेज धार के कारण लापता लोग काफी दूर तक बह गए हो सकते हैं।

सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल

इस हादसे ने एक बार फिर नदी परिवहन और नाव सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नाव पर क्षमता से अधिक लोगों को बैठाया गया था। उसमें किसी भी प्रकार के सुरक्षा उपकरण मौजूद नहीं थे। नाव में लाइफ जैकेट या बचाव सामग्री तक नहीं थी। ग्रामीणों का आरोप है कि दियारा क्षेत्रों में रोजाना बड़ी संख्या में लोग छोटी नावों से आवाजाही करते हैं। प्रशासन की ओर से सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित नहीं कराया जाता है। घटना के बाद इलाके में दहशत और नाराजगी का माहौल है। प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है और नाव संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।

नव्य जागरण

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