DNA बदलने वाली नई थेरेपी का दावा: दवा की एक खुराक से ही घट जाएगा LDL लेवल, 85 मरीजों पर ट्रायल में दिखा असर

वैज्ञानिकों ने दिल की बीमारियों के इलाज को लेकर एक बड़ी सफलता का दावा किया है। शोधकर्ताओं के अनुसार, जीन-एडिटिंग तकनीक पर आधारित एक नई थेरेपी शरीर में ‘खराब कोलेस्ट्रॉल’ एलडीएल को लंबे समय तक कम करने में सक्षम साबित हुई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यदि आगे के बड़े अध्ययनों में भी इसी तरह के नतीजे मिलते हैं, तो यह थेरेपी भविष्य में हार्ट अटैक और गंभीर हृदय रोगों की रोकथाम में गेम चेंजर साबित हो सकती है।
यह शोध प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल ‘द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन’ में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन का नेतृत्व वर्व थेरेप्यूटिक्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. शेखर कथिरेशन ने किया है। शोध में बताया गया है कि यह थेरेपी सीधे डीएनए में बदलाव करके शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करती है। ड्यूक यूनिवर्सिटी के हार्ट स्पेशलिस्ट डॉ. जॉन एच. पी. अलेक्जेंडर ने कहा कि यदि यह तकनीक सफल रहती है तो दिल की बीमारियों के इलाज का तरीका पूरी तरह बदल सकता है।
एक ही डोज में 62% तक कम हुआ खराब कोलेस्ट्रॉल
शोध के मुताबिक यह अध्ययन फिलहाल 85 मरीजों पर किए गए ट्रायल का अंतरिम विश्लेषण है। इनमें से 35 मरीजों के शुरुआती आंकड़ों का अध्ययन किया गया है। ये सभी मरीज आनुवंशिक रूप से हाई एलडीएल या हृदय रोग से पीड़ित थे। जिन मरीजों को इस थेरेपी की सबसे अधिक खुराक दी गई, उनमें एक ही इंजेक्शन के बाद एलडीएल लेवल में 62 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई। वैज्ञानिकों के अनुसार सबसे अहम बात यह रही कि जिन मरीजों को करीब 18 महीने पहले यह थेरेपी दी गई थी, उनमें अब भी कोलेस्ट्रॉल का स्तर नियंत्रित बना हुआ है। इससे यह उम्मीद बढ़ी है कि यह इलाज लंबे समय तक असर दिखा सकता है और बार-बार दवा लेने की जरूरत कम हो सकती है।
शरीर में ऐसे काम करती है जीन-एडिटिंग तकनीक
शोधकर्ताओं ने बताया कि इस इलाज में मरीज के शरीर में एक विशेष जीन-एडिटिंग ‘मशीन’ भेजी जाती है। यह फैट की परत में लिपटे सूक्ष्म कणों के जरिए खून के माध्यम से सीधे लिवर तक पहुंचती है। वहां यह मशीन लिवर सेल के डीएनए में मौजूद ‘पीसीके’ नामक जीन को पहचानकर उसमें बदलाव करती है। यही जीन शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को प्रभावित करता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जीन-एडिटिंग तकनीक चिकित्सा विज्ञान में तेजी से नई संभावनाएं खोल रही है। हालांकि अभी इस थेरेपी को बड़े स्तर पर सफल साबित होने और नियामक मंजूरी मिलने में समय लग सकता है।
भारत के लिए भी उम्मीद की किरण
रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर साल लगभग 28 लाख लोगों की मौत दिल की बीमारियों से होती है। ऐसे में यह थेरेपी सफल साबित होती है तो लाखों लोगों के लिए नई उम्मीद बन सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि आमतौर पर जीन थेरेपी बेहद महंगी होती है, लेकिन कंपनी का दावा है कि भविष्य में इसे सामान्य उपचार का हिस्सा बनाने की कोशिश की जाएगी ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें।
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