प्रेमानंद महाराज की बिगड़ी सेहत से भक्त चिंतित: दर्शन के इंतजार में वृंदावन में रुके श्रद्धालु, 10 दिनों से रात्रि पदयात्रा बंद

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प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज की खराब सेहत को लेकर देशभर से आए भक्तों में चिंता और भावुकता का माहौल है। पिछले 10 दिनों से उनकी रात्रि पदयात्रा पूरी तरह बंद है, जबकि आम श्रद्धालुओं से होने वाली एकांतिक मुलाकातों पर भी फिलहाल रोक लगा दी गई है। आश्रम प्रशासन के अनुसार महाराज जी अस्वस्थ हैं और चिकित्सकीय निगरानी में आराम कर रहे हैं। ऐसे में केवल सीमित संख्या में “शरणागत बृजवासी शिष्यों” को ही उनसे मिलने की अनुमति दी जा रही है। इसके बावजूद देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे भक्त वृंदावन में ठहरकर उनके स्वस्थ होने और दर्शन मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
करीब 1400 किलोमीटर दूर कोलकाता से परिवार सहित वृंदावन पहुंची श्रद्धालु ने कहा कि उन्हें महाराज जी और राधा-रानी पर पूरा विश्वास है। उन्होंने कहा कि यहां आने के बाद पता चला कि फिलहाल दर्शन और एकांतिक वार्तालाप बंद हैं, लेकिन वे बिना आशीर्वाद लिए वापस नहीं लौटेंगी। उनका कहना था कि प्रेमानंद महाराज जल्द स्वस्थ होंगे और सभी भक्तों को पुनः दर्शन देंगे। केवल पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि राजस्थान, असम, बिहार, हरियाणा और उत्तराखंड समेत कई राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन दिनों वृंदावन पहुंच रहे हैं। हालांकि आश्रम में उन्हें सीमित व्यवस्थाओं और प्रतिबंधों की जानकारी दी जा रही है।
भावुक संदेश ने बढ़ाई भक्तों की बेचैनी
सोमवार को प्रेमानंद महाराज का एक वीडियो संदेश सामने आया, जिसने उनके अनुयायियों को भावुक कर दिया। वीडियो में उन्होंने कहा, “चिंता मत करो। हम मिलें न मिलें, बोलें न बोलें, हम आप सबको बहुत प्यार करते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि भक्तों को अपने आध्यात्मिक उत्थान को लेकर परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। महाराज जी के इस संदेश के बाद भक्तों के बीच भावनात्मक माहौल और गहरा हो गया। कई श्रद्धालु आश्रम परिसर में भजन-कीर्तन और प्रार्थना करते दिखाई दिए। भक्त लगातार उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।
डायलिसिस के बीच सीमित मुलाकातें
जानकारी के मुताबिक प्रेमानंद महाराज की दोनों किडनी प्रभावित हैं और उनका नियमित डायलिसिस चल रहा है। चिकित्सकीय कारणों से उन्हें अधिक भीड़ और लगातार संवाद से दूर रहने की सलाह दी गई है। इसी वजह से उनकी रात्रि पदयात्रा 17 मई से बंद है। आश्रम के सूत्रों के अनुसार वर्तमान में केवल वे ही शिष्य उनसे एकांतिक वार्तालाप कर पा रहे हैं, जिन्होंने वर्षों से आश्रम में रहकर सेवा, साधना और भक्ति के मार्ग को अपनाया है। इन्हें “शरणागत बृजवासी शिष्य” कहा जाता है।
टोकन व्यवस्था बंद, मायूस लौट रहे भक्त
राधा केली कुंज आश्रम में आमतौर पर एकांतिक वार्तालाप के लिए भक्तों को पहले से टोकन लेना पड़ता है, लेकिन इन दिनों बाहरी श्रद्धालुओं के लिए यह व्यवस्था अस्थायी रूप से बंद कर दी गई है। आश्रम के सेवादार श्रद्धालुओं को मौजूदा स्थिति समझाते नजर आए। दर्शन न मिलने से कई भक्त मायूस दिखे, लेकिन अधिकांश श्रद्धालुओं ने कहा कि वे महाराज जी के स्वस्थ होने तक वृंदावन में रुकने को तैयार हैं।
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