सीजफायर के बीच अमेरिका का ईरान पर हमला: मिसाइल साइट और बोट्स को बनाया निशाना, ईरान के साथ बराक ओबामा जैसी नहीं करेंगे परमाणु डील

1 घंटा पहले
मिसाइल साइट और बोट्स को बनाया निशाना, ईरान के साथ बराक ओबामा जैसी नहीं करेंगे परमाणु डील

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। दोनों देशों के बीच सीजफायर और परमाणु समझौते को लेकर बातचीत चल रही है, लेकिन इसी बीच अमेरिकी सेना ने मंगलवार को होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरानी गतिविधियों पर सैन्य कार्रवाई कर दी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकाम) के अनुसार अमेरिकी बलों ने बारूदी सुरंगें बिछा रही बोट्स और बंदर अब्बास पोर्ट के पास मौजूद सरफेस टू एयर मिसाइल साइट को निशाना बनाया। अमेरिका ने दावा किया कि यह कार्रवाई आत्मरक्षा के तहत की गई, क्योंकि इन गतिविधियों से इंटरनेशनल समुद्री यातायात और अमेरिकी युद्धपोतों की सुरक्षा को खतरा पैदा हो रहा था।

सेंटकाम के प्रवक्ता टिमोथी हॉकिन्स ने कहा कि अमेरिकी सैनिकों और नौसैनिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था। उन्होंने कहा कि अमेरिका फिलहाल संयम बरत रहा है और सीजफायर वार्ता को आगे बढ़ाने के पक्ष में है, लेकिन किसी भी प्रकार के खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है और वहां बारूदी सुरंगें बिछाने जैसी गतिविधियां वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकती हैं।

बातचीत के बीच बढ़ा तनाव

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी हमले से दोनों देशों के बीच जारी वार्ता की रफ्तार कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकती है। हालांकि फिलहाल बातचीत पूरी तरह टूटती नजर नहीं आ रही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि वे ईरान के साथ पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा जैसी परमाणु डील नहीं करेंगे। ट्रम्प ने साफ कहा कि या तो बेहतर और सख्त समझौता होगा या फिर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। दूसरी ओर ईरान और अमेरिका के बीच कतर की राजधानी दोहा में चल रही वार्ता में होर्मुज स्ट्रेट, हाईली एनरिच्ड यूरेनियम और ईरान की फ्रीज संपत्तियों को जारी करने जैसे मुद्दे सबसे अहम बने हुए हैं। हालांकि कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि दोनों देश जल्द ही सीजफायर बढ़ाने और होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने पर समझौते की घोषणा कर सकते हैं, लेकिन अब तक किसी औपचारिक दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं हो सके हैं। व्हाइट हाउस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बातचीत लगभग 95 प्रतिशत पूरी हो चुकी है, लेकिन कुछ संवेदनशील मुद्दों पर सहमति बनना अभी बाकी है।

ईरान ने सुप्रीम लीडर की मंजूरी को बताया जरूरी

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने स्पष्ट किया है कि देश में कोई भी बड़ा रणनीतिक फैसला सुप्रीम लीडर की मंजूरी के बिना नहीं लिया जाएगा। वहीं ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने लेबनान और हिजबुल्लाह के समर्थन में बयान जारी करते हुए कहा कि ईरान इजराइल के खिलाफ लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के साथ मजबूती से खड़ा है। इस बयान को क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका का सख्त रुख

इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भारत के जयपुर दौरे के दौरान कहा कि होर्मुज स्ट्रेट हर हाल में खुला रहेगा। उन्होंने कहा कि यह समुद्री मार्ग वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। रूबियो ने कहा कि इस क्षेत्र में जो गतिविधियां हो रही हैं, वे अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ हैं और लंबे समय तक स्वीकार नहीं की जा सकतीं। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच पूरी दुनिया की नजर अब अमेरिका और ईरान के बीच जारी वार्ता पर टिकी हुई है।

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