अस्पताल के बाहर ताला, अंदर ऑपरेशन: छापे में बेड के नीचे मिला फर्जी डॉक्टर, दो महिला कर्मचारियों समेत आरोपी अरेस्ट

उत्तरप्रदेश|3 घंटे पहले
छापे में बेड के नीचे मिला फर्जी डॉक्टर, दो महिला कर्मचारियों समेत आरोपी अरेस्ट

इटवा स्थित जनता सेवा हॉस्पिटल में स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन और पुलिस की संयुक्त छापेमारी में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच पूरी होने तक अस्पताल बंद रखने के आदेश के बावजूद बाहर मुख्य गेट पर ताला लगाकर भीतर मरीजों का इलाज और ऑपरेशन किए जा रहे थे। कार्रवाई के दौरान खुद को डॉक्टर बताने वाला एक युवक बेड के नीचे छिपा मिला। इसे दो महिला कर्मचारियों के साथ हिरासत में लेकर पुलिस को सौंप दिया गया।

नैदानिक स्थापना के नोडल अधिकारी डॉ. मानवेन्द्र पाल, इटवा तहसीलदार, प्रभारी निरीक्षक संजय मिश्रा तथा सीएचसी इटवा के अधीक्षक की संयुक्त टीम जनता सेवा हॉस्पिटल पहुंची। अस्पताल के मुख्य गेट पर बाहर से ताला लगा हुआ था। ताला खुलवाकर जब अधिकारी भीतर पहुंचे तो अधिकांश लाइटें बंद थीं। लेकिन तलाशी के दौरान अस्पताल में मरीज, उनके परिजन और कर्मचारी मौजूद मिले। जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल में भर्ती दो मरीजों का कुछ घंटे पहले ही ऑपरेशन किया गया था। अधिकारियों ने मरीजों के परिजनों से पूछताछ की। जिन्होंने ऑपरेशन होने की पुष्टि की। मौके पर कोई पंजीकृत चिकित्सक मौजूद नहीं मिला। दोनों मरीजों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें तत्काल एम्बुलेंस से माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज एवं संबद्ध चिकित्सालय रेफर कर दिया गया।

अस्पताल किया गया सील

तलाशी अभियान के दौरान प्रवीण यादव अस्पताल के एक कमरे में बेड के नीचे छिपा मिला। आरोप है कि वह खुद को डॉक्टर बताकर प्रसूताओं का ऑपरेशन करता था। संयुक्त टीम ने उसे तथा दो महिला कर्मचारियों को हिरासत में लेकर पुलिस के हवाले कर दिया। इसके बाद अस्पताल को तत्काल सील कर दिया गया। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल से भर्ती रजिस्टर, ऑपरेशन रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।

सीएमओ ने बंद रखने का दिए थे निर्देश

जनता सेवा हॉस्पिटल पहले भी विवादों में रह चुका है। 23 मई की रात प्रसव के लिए भर्ती बंदना के ऑपरेशन के बाद नवजात की मौत हो गई थी, जबकि प्रसूता की हालत भी गंभीर हो गई थी। परिजनों ने आरोप लगाया था कि ऑपरेशन किसी विशेषज्ञ चिकित्सक ने नहीं, बल्कि प्रवीण यादव और उसके सहयोगी ने किया था। शिकायत के आधार पर पुलिस ने केस दर्ज किया था। इसके बाद सीएमओ ने जांच समिति गठित कर अस्पताल का संचालन जांच पूरी होने तक बंद रखने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद आरोप है कि अस्पताल के बाहर ताला लगाकर अंदर मरीज भर्ती किए जा रहे थे और ऑपरेशन भी जारी थे। अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि बिना पंजीकृत चिकित्सक के ऑपरेशन किसके निर्देश पर कराए जा रहे थे और पूर्व में हुई नवजात की मौत के मामले में वास्तविक जिम्मेदारी किसकी है।

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