गोरखपुर में बड़े कचरा उत्पादक संस्थानों का होगा सर्वे: तीन दिन में मांगी रिपोर्ट, बल्क वेस्ट जनरेटर की होगी पहचान

उत्तरप्रदेश|3 घंटे पहले
तीन दिन में मांगी रिपोर्ट, बल्क वेस्ट जनरेटर की होगी पहचान

ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस कचरा प्रबंधन को व्यवस्थित करने के लिए पंचायत विभाग ने नई पहल शुरू की है। मंडल के सभी 20 विकासखंडों में अधिक मात्रा में कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों की पहचान कर उन्हें बल्क वेस्ट जनरेटर (BWG) के रूप में चिन्हित किया जाएगा। उप निदेशक पंचायती राज ने सभी विकासखंडों से तीन दिन के भीतर ऐसे संस्थानों की विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। सर्वे के आधार पर यह भी आकलन किया जाएगा कि संबंधित संस्थानों में कचरा निस्तारण की पर्याप्त व्यवस्था है या नहीं। इसके बाद वैज्ञानिक तरीके से अपशिष्ट प्रबंधन की कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेजी जाएगी। अधिकारियों के अनुसार जिले में ऐसे करीब 250 संस्थान होने का अनुमान है।

पहली बार ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह का व्यापक सर्वे कराया जा रहा है। रिपोर्ट मिलने के बाद प्रत्येक संस्थान की कचरा प्रबंधन व्यवस्था का मूल्यांकन किया जाएगा। जहां व्यवस्था नहीं मिलेगी, वहां निर्धारित मानकों के अनुरूप अपशिष्ट निस्तारण की योजना लागू कराई जाएगी। इसके साथ ही सभी ग्राम पंचायतों से वर्षों पुराने कचरे के ढेर यानी लिगेसी डंपिंग साइट का भी विवरण मांगा गया है, ताकि इन स्थलों का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण कराया जा सके। शासन के निर्देश मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

किन संस्थानों को माना जाएगा BWG

ऐसे संस्थान जिनका भवन क्षेत्रफल 20 हजार वर्ग मीटर या उससे अधिक हो, जहां प्रतिदिन 40 हजार लीटर से ज्यादा पानी की खपत होती हो अथवा रोजाना 100 किलोग्राम या उससे अधिक ठोस कचरा निकलता हो, उन्हें बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी में रखा जाएगा। इस सूची में बोर्डिंग स्कूल, बड़े इंटर कॉलेज, इंजीनियरिंग एवं मेडिकल कॉलेज, विश्वविद्यालय, बड़े छात्रावास, प्रमुख मंदिर, बाजार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और बारात घर जैसे संस्थान शामिल होंगे।

चार श्रेणियों में होगा अपशिष्ट का निस्तारण

BWG संस्थानों में कचरे को चार श्रेणियों गीला, सूखा, सेनेटरी और विशेष देखभाल वाले अपशिष्ट में अलग किया जाएगा। गीले कचरे में रसोई से निकलने वाला जैविक अपशिष्ट, सूखे में प्लास्टिक, कागज, धातु और कांच, सेनेटरी श्रेणी में स्वच्छता संबंधी अपशिष्ट तथा विशेष श्रेणी में पुरानी दवाइयां, कीटनाशक, सिरिंज, बैटरी और पेंट के डिब्बे शामिल होंगे। इनका निस्तारण संस्थान परिसर में ही निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाएगा और इसकी जानकारी हर वर्ष केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट पर अपडेट की जाएगी।

कलेक्ट किया जा रहा डेटा

उप निदेशक पंचायती राज हिमांशु शेखर ठाकुर ने बताया कि पहली बार इस तरह का डेटा एकत्र किया जा रहा है। इससे यह स्पष्ट होगा कि किस विकासखंड में कितने बड़े कचरा उत्पादक संस्थान हैं और उसी आधार पर प्रभावी कचरा प्रबंधन की योजना तैयार की जाएगी।

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