सिद्धार्थनगर में ट्रांसफर की लिस्ट में 433 शिक्षक: शासन को भेजी गई लिस्ट, पति-पत्नी श्रेणी के सबसे अधिक दावेदार

जिले के 433 परिषदीय शिक्षकों के अंतरजनपदीय स्थानांतरण से जुड़े आवेदन आवश्यक जांच और सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद शासन को भेज दिए गए हैं। अंतिम स्वीकृति मिलने पर ये शिक्षक अपने इच्छित जनपदों में स्थानांतरित हो सकेंगे। हालांकि बड़ी संख्या में संभावित तबादलों को लेकर जिले के शिक्षा विभाग में चिंता भी बढ़ गई है। क्योंकि सिद्धार्थनगर पहले से ही शिक्षकों की कमी से जूझ रहा आकांक्षी जनपद है।
बेसिक शिक्षा विभाग को अंतरजनपदीय स्थानांतरण के लिए कुल 462 ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए थे। शासन की निर्धारित नीति के तहत सभी आवेदनों का विस्तृत परीक्षण कराया गया। चिकित्सीय आधार पर किए गए दावों की जांच मेडिकल बोर्ड ने की। वहीं, अन्य श्रेणियों के आवेदनों का अभिलेखीय सत्यापन विभागीय स्तर पर कराया गया। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद 433 शिक्षकों को पात्र पाया गया। उनके आवेदन शासन को अग्रसारित कर दिए गए।
पति-पत्नी श्रेणी के तहत आए 227 आवेदन
विभागीय आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक 227 आवेदन पति-पत्नी श्रेणी के तहत प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा 173 दिव्यांग शिक्षकों, 13 कैंसर पीड़ित शिक्षकों तथा 20 डायलिसिस से जुड़े शिक्षकों ने भी स्थानांतरण के लिए आवेदन किया है। अब शासन स्तर पर अंतिम परीक्षण और अनुमोदन के बाद स्थानांतरण सूची जारी की जाएगी।
वर्षों से कर रहे थे ट्रांसफर का इंतजार
स्थानांतरण प्रक्रिया को लेकर शिक्षकों में उत्साह का माहौल है। बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक हैं जो वर्षों से अपने गृह जनपद और परिवार से दूर सेवाएं दे रहे हैं। विशेष रूप से पति-पत्नी दोनों के अलग-अलग जिलों में तैनात होने से पारिवारिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे शिक्षकों के लिए यह प्रक्रिया बड़ी राहत के रूप में देखी जा रही है।
शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है असर
दूसरी ओर, संभावित तबादलों को लेकर शिक्षा विभाग की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। सिद्धार्थनगर में पहले से ही कई विद्यालय शिक्षकों की कमी का सामना कर रहे हैं। छात्र-शिक्षक अनुपात बनाए रखने के लिए विभाग को समय-समय पर विद्यालयों के बीच समायोजन करना पड़ता है। यदि बड़ी संख्या में स्थानांतरण स्वीकृत हो जाते हैं तो ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में विभाग को वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर भी विचार करना पड़ सकता है।











