6.11 लाख गबन उजागर करने वाले एडीओ पंचायत हटे: चार ग्राम पंचायतों की जांच में मिली वित्तीय अनियमितताएं, डीपीआरओ कार्यालय से संबद्ध

सिद्धार्थनगर|1 घंटा पहले
चार ग्राम पंचायतों की जांच में मिली वित्तीय अनियमितताएं, डीपीआरओ कार्यालय से संबद्ध

खुनियांव विकास खंड में वित्तीय अनियमितताओं की जांच एडीओ पंचायत आशुतोष मिश्रा ने की थी। जांच के दौरान उन्होंने लाखों रुपये के गबन का मामला उजागर किया था। इसके बाद उन्हें खुनियांव ब्लॉक से हटा दिया गया है। अब उन्हें जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। यह आदेश उस जांच रिपोर्ट के कुछ ही दिनों बाद जारी हुआ है। इसमें चार ग्राम पंचायतों में छह लाख 11 हजार 426 रुपये के गबन और नियमविरुद्ध भुगतान की पुष्टि की गई थी। उनके स्थान पर ग्राम पंचायत अधिकारी राकेश पाठक को एडीओ पंचायत का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

एडीओ पंचायत आशुतोष मिश्रा ने खुनियांव विकास खंड की ग्राम पंचायत खखरा-खखरी, बगहवा, सिरसिया और तेलियाडीह में कराए गए विकास कार्यों की जांच की थी। जांच के दौरान आंगनबाड़ी केंद्र मरम्मत, डस्टबिन स्थापना, पंचायत भवन चित्रकारी और ओपन जिम निर्माण जैसे कार्यों में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं सामने आई थीं। जांच रिपोर्ट में तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी मोईदुर्रहमान को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए कुल छह लाख 11 हजार 426 रुपये के गबन की पुष्टि की गई थी। जांच रिपोर्ट जनपद स्तर पर पहुंचने के बाद जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने मामले को गंभीरता से लिया था। उन्होंने संबंधित ग्राम विकास अधिकारी को तत्काल निलंबित करने के निर्देश भी दिए थे। हालांकि विभागीय सूत्रों के अनुसार जिलाधिकारी के निर्देश के बावजूद अब तक निलंबन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।

जांच रिपोर्ट के बाद जारी हुआ संबद्धीकरण आदेश

जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के कुछ ही दिनों बाद डीपीआरओ वाचस्पति झा की ओर से आदेश जारी कर एडीओ पंचायत आशुतोष मिश्रा को अग्रिम आदेश तक जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया। प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से ग्राम पंचायत अधिकारी राकेश पाठक को एडीओ पंचायत का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इस प्रशासनिक आदेश के बाद विभागीय गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। कई अधिकारी इसे नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया बता रहे हैं। वहीं, आदेश जारी होने के समय को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। चर्चा इस बात को लेकर भी है कि जिस अधिकारी की जांच रिपोर्ट के आधार पर बड़ी कार्रवाई की संस्तुति की गई, उसे अचानक ब्लॉक से हटाने की आवश्यकता क्यों पड़ी।

दोषियों पर कार्रवाई का इंतजार

फिलहाल विभाग की ओर से इस कार्रवाई को सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा बताया जा रहा है। हालांकि खुनियांव विकास खंड में सामने आए बहुचर्चित वित्तीय अनियमितता प्रकरण और उसके बाद हुए इस फैसले ने पूरे मामले को और अधिक चर्चा में ला दिया है। संबंधित ग्राम विकास अधिकारी के विरुद्ध प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर भी स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार किया जा रहा है। पूरे घटनाक्रम ने पंचायत विभाग में जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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