जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर नहीं होगी कोई कार्रवाई: गंभीर मामलों की FIR रहेंगी बरकरार, सरकार ने साफ किया अपना रुख

नीट पेपर लीक के विरोध में हुए जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वस्त किया है कि आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि प्रदर्शन के दौरान दर्ज गंभीर आपराधिक मामलों में 2700 से अधिक लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली जाएंगी। मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार अपने पूर्व आश्वासन पर कायम है और प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन मामलों में गंभीर अपराध दर्ज हैं, उनमें कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी और उन एफआईआर को वापस लेने का कोई निर्णय नहीं है। यह मामला जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के विरोध में हुए प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शनकारियों की तीन प्रमुख मांगें थीं, जिन्हें सरकार ने स्वीकार किया था। इनमें छात्रों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन भी शामिल था।
पुलिस कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट वृंदा ग्रोवर ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का मुद्दा उठाया। इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यदि किसी पुलिसकर्मी ने आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया है तो उसे संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि छात्र आंदोलन की आड़ में किसी गंभीर अपराध में शामिल व्यक्ति को भी संरक्षण नहीं दिया जा सकता।
दो बिंदुओं पर अदालत की नजर
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए कि वह प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं की निष्पक्ष जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एसआईटी गठित करने पर विचार कर सकता है। अदालत यह भी स्पष्ट करना चाहती है कि पुलिस पर हुए हमलों के पीछे वास्तव में छात्र थे या भीड़ में शामिल अन्य उपद्रवी तत्व।
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