गाड़ियों की नंबर प्लेट ढकना धोखाधड़ी नहीं- सुप्रीम कोर्ट: एमवी एक्ट के तहत होगी कार्रवाई, धोखाधड़ी के केस के लिए कानूनी तत्व जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वाहन की नंबर प्लेट छिपाना अपने आप में धोखाधड़ी का अपराध नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि यह मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन हो सकता है और इसके लिए जुर्माना लगाया जा सकता है, लेकिन केवल इस आधार पर बीएनएस की धारा 420 के तहत आपराधिक केस दर्ज नहीं किया जा सकता।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि यह मान लेना उचित नहीं है कि किसी व्यक्ति ने केवल चालान से बचने के उद्देश्य से नंबर प्लेट ढकी थी। अदालत के अनुसार, धोखाधड़ी साबित करने के लिए बेईमानी की मंशा, किसी को छलपूर्वक प्रेरित करना और उससे संपत्ति का नुकसान होना आवश्यक है। केवल नंबर प्लेट छिपाने से ये तत्व स्वतः सिद्ध नहीं होते।
2020 के मामले पर सुनाया फैसला
मामला मोहम्मद अब्दुल अहद शाकेर से जुड़ा है, जिन्हें जून 2020 में होंडा एक्टिवा चलाते समय पिछली नंबर प्लेट पर काला मास्क लगाने के आरोप में रोका गया था। पुलिस ने उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 420 और मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 80(ए) के तहत एफआईआर दर्ज की थी। बाद में चार्जशीट दाखिल हुई और मजिस्ट्रेट ने मामले का संज्ञान लिया। तेलंगाना हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सामने की नंबर प्लेट स्पष्ट थी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि वाहन की केवल पिछली नंबर प्लेट ढकी हुई थी, जबकि सामने की प्लेट स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थी। अदालत ने माना कि ऐसे तथ्यों में पहचान छिपाने की सुनियोजित मंशा साबित नहीं होती। इसलिए इस मामले में आपराधिक कार्रवाई जारी रखना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जाएगा।











