कालानमक चावल को मिलेगा वैश्विक बाजार: सिंगापुर की कंपनी से हुआ समझौता, किसानों को होगा बड़ा लाभ

जिले की पहचान बन चुके कालानमक चावल को इंटरनेशनल बाजार में नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। कालानमक चावल के उत्पादन, प्रसंस्करण और निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सिंगापुर की कंपनी ‘बुद्धा राइस’ के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस पहल से न केवल किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा। साथ ही जिले के प्रसिद्ध कालानमक चावल को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलने की संभावना भी मजबूत हुई है।
कैंप कार्यालय में जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन. की अध्यक्षता में कालानमक चावल एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) कॉमन फैसिलिटी सेंटर की जनपद स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह सहित कृषि, उद्योग और विपणन विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने कालानमक धान के उत्पादन में वृद्धि को प्राथमिकता बताया। अधिकारियों को किसानों के बीच व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक किसानों को इस विशेष धान की खेती से जोड़ने के लिए गोष्ठियों का आयोजन किया जाए। अनुबंधित खेती को बढ़ावा दिया जाए।
उत्पादन बढ़ाने और किसानों को जोड़ने पर जोर
बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि देश और विदेश में कालानमक चावल की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में उत्पादन क्षमता का विस्तार समय की आवश्यकता है। उन्होंने स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) से जुड़े किसानों की संख्या बढ़ाने तथा नए किसानों को इस अभियान से जोड़ने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि यदि किसानों को बेहतर विपणन और उचित मूल्य की गारंटी मिलेगी तो वे बड़ी संख्या में कालानमक धान की खेती की ओर आकर्षित होंगे। कॉमन फैसिलिटी सेंटर के निदेशक ने बताया कि आगामी सत्र में 1500 मीट्रिक टन कालानमक धान की खरीद और प्रसंस्करण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए सिंगापुर की प्रतिष्ठित कंपनी बुद्धा राइस के साथ एमओयू किया गया है। इस समझौते से इंटरनेशनल बाजारों तक पहुंच आसान होगी। किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकेगा।
किसानों को मिलेगी मुफ्त प्रसंस्करण और परिवहन सुविधा
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि एसपीवी से जुड़े किसानों के अलावा ऐसे गैर-एसपीवी किसान, जिनके पास चार टन या उससे अधिक कालानमक धान उपलब्ध होगा। उनके धान का प्रसंस्करण और परिवहन पूरी तरह निःशुल्क किया जाएगा। इस सुविधा से किसानों की लागत में कमी आएगी। उत्पादन बढ़ाने के लिए उन्हें प्रोत्साहन मिलेगा। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, गुणवत्तापूर्ण बीजों और सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि कालानमक चावल केवल एक कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि सिद्धार्थनगर की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान है। यदि उत्पादन और विपणन की प्रक्रिया को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाया गया तो आने वाले वर्षों में कालानमक चावल वैश्विक बाजार में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा। जिले के किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। बैठक में जिला कृषि अधिकारी रविशंकर पांडेय, सहायक उपायुक्त उद्योग शिवशंकर कुमार, जिला खाद्य विपणन अधिकारी, एसपीवी के सदस्य तथा अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
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