एअर इंडिया पर बढ़ा आर्थिक दबाव: VP लेवल अफसरों की कटेगी सैलरी, 20% उड़ानें कम करने की तैयारी

09 मई 2026
VP लेवल अफसरों की कटेगी सैलरी, 20% उड़ानें कम करने की तैयारी

टाटा ग्रुप की एयरलाइन कंपनी एअर इंडिया एक बड़े वित्तीय संकट से गुजर रही है। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और लगातार बढ़ती ऑपरेटिंग कॉस्ट के बीच कंपनी अब सख्त फैसले लेने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, एयर इंडिया जल्द ही वाइस प्रेसिडेंट (VP) लेवल के अधिकारियों की सैलरी में कटौती कर सकती है। इसके साथ ही कई कर्मचारियों के बोनस में भी कमी की संभावना जताई जा रही है। कंपनी नॉन-टेक्निकल स्टाफ को छुट्टी पर भेजने पर भी विचार कर रही है। एयरलाइन फिलहाल हर दिन करीब 900 उड़ानों का संचालन करती है, लेकिन अगले तीन महीनों में करीब 20 प्रतिशत उड़ानें घटाई जा सकती हैं।

एयर इंडिया की मुश्किलों की सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव माना जा रहा है। ईरान और इजराइल के बीच जारी संघर्ष का असर पूरी दुनिया की एविएशन इंडस्ट्री पर पड़ा है। एयर इंडिया को अब यूरोप और अमेरिका जाने वाली उड़ानों के लिए लंबे रूट लेने पड़ रहे हैं। इससे फ्लाइट का समय डेढ़ से दो घंटे तक बढ़ गया है। ज्यादा समय का मतलब ज्यादा फ्यूल खर्च। यही वजह है कि कंपनी की लागत तेजी से बढ़ रही है। पहले जहां कुल ऑपरेशनल खर्च में फ्यूल का हिस्सा करीब 40 प्रतिशत था, अब यह बढ़कर 60 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

उड़ानों में कटौती का प्लान

सूत्रों के अनुसार एयर इंडिया के बोर्ड ने हालात को देखते हुए अगले 90 दिनों के लिए उड़ानों में कटौती का प्रस्ताव तैयार किया है। माना जा रहा है कि कंपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों सेक्टर में अपनी क्षमता कम करेगी। खासकर वे रूट जहां यात्रियों की संख्या कम है या फ्यूल लागत ज्यादा पड़ रही है। एयरलाइन को उम्मीद है कि इससे घाटे को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा। हालांकि यात्रियों पर इसका असर पड़ना तय माना जा रहा है। कई शहरों की फ्लाइट फ्रीक्वेंसी कम हो सकती है।

अफसरों की सैलरी और बोनस पर कैंची

गुरुवार को हुई बोर्ड मीटिंग में कर्मचारियों की लागत कम करने पर भी चर्चा हुई। रिपोर्ट्स के अनुसार VP लेवल और उससे ऊपर के अधिकारियों की सैलरी में कटौती की जा सकती है। इसके अलावा कंपनी सभी कर्मचारियों के बोनस में भी कमी कर सकती है। एयर इंडिया फिलहाल अपने खर्च कम करने के लिए हर स्तर पर समीक्षा कर रही है। नॉन-टेक्निकल स्टाफ को अस्थायी छुट्टी पर भेजने का प्लान भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

CEO की तलाश में कंपनी

एयर इंडिया इस समय नेतृत्व संकट से भी गुजर रही है। अप्रैल में कंपनी के CEO कैंपबेल विल्सन के इस्तीफे के बाद से नया चेहरा अभी तक तय नहीं हो पाया है। ऐसे में बड़े फैसलों को लेकर अंदरूनी दबाव और बढ़ गया है। टाटा ग्रुप फिलहाल ऐसे अनुभवी अधिकारी की तलाश में है जो एयर इंडिया को घाटे से निकाल सके। कंपनी पहले से ही पुराने विमानों के भारी मेंटेनेंस खर्च और नए विमानों की खरीद के कारण वित्तीय दबाव झेल रही है।

नए विमान और मर्जर भी बने बोझ

एयर इंडिया अपने बेड़े को आधुनिक बनाने के लिए बड़े स्तर पर निवेश कर रही है। कंपनी ने नए विमानों का ऑर्डर दिया है और पुराने विमानों के केबिन अपग्रेड का काम भी जारी है। इसके अलावा सिंगापुर एयरलाइंस के साथ मर्जर प्रक्रिया में भी काफी पैसा खर्च हो रहा है। कानूनी प्रक्रियाओं और टेक्निकल इंटीग्रेशन का खर्च कंपनी की बैलेंस शीट पर असर डाल रहा है। यही वजह है कि फिलहाल एयर इंडिया की वित्तीय स्थिति लगातार दबाव में बनी हुई है।

यात्रियों पर भी पड़ेगा असर

उड़ानों में कटौती और लागत नियंत्रण का असर यात्रियों पर भी दिखाई दे सकता है। टिकट की कीमतों में बढ़ोतरी होने की संभावना है। खासकर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में किराया और महंगा हो सकता है। एविएशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट का तनाव जल्द खत्म नहीं हुआ तो कई भारतीय एयरलाइंस को इसी तरह के सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं। फिलहाल एयर इंडिया हालात पर नजर बनाए हुए है और जल्द आधिकारिक घोषणा कर सकती है।

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