अनिल अंबानी ग्रुप की कंपनियों पर शिकंजा: 150 करोड़ लोन घोटाले में EOW ने दर्ज किया केस, एक्सिस बैंक की शिकायत पर कार्रवाई

मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (ADAG) से जुड़ी कंपनियों के तत्कालीन निदेशकों और अधिकारियों के खिलाफ बड़े वित्तीय घोटाले के आरोप में मामला दर्ज किया है। आरोप है कि कंपनियों ने फर्जी दस्तावेजों और गलत वित्तीय जानकारी के जरिए एक्सिस बैंक से 150 करोड़ रुपए का लोन हासिल किया और बाद में उस रकम को समूह की दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया। इस मामले में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी धाराओं के तहत कफ परेड पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है। मामले की जांच अब EOW द्वारा की जा रही है।
आर्थिक अपराध शाखा के सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई एक्सिस बैंक के वाइस प्रेसिडेंट प्रकाश प्रभाकर राव की शिकायत के आधार पर की गई है। बैंक का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों और कंपनियों ने सुनियोजित तरीके से बैंक को गुमराह किया और वित्तीय नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से साजिश रची। शिकायत में कहा गया है कि लोन मंजूरी के दौरान रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) की आर्थिक स्थिति को वास्तविकता से बेहतर दिखाया गया और कई महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाई गईं। बैंक के अनुसार, जब 150 करोड़ रुपए का लोन जारी हो गया, तब उस राशि का उपयोग निर्धारित कारोबारी उद्देश्यों में करने के बजाय समूह की दूसरी कंपनियों के खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। बाद में लोन की अदायगी नहीं की गई, जिससे बैंक को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।
2010 से 2019 तक चला कथित वित्तीय खेल
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह पूरा मामला जनवरी 2010 से नवंबर 2019 के बीच का है। आरोप है कि इस अवधि में RHFL के तत्कालीन होल-टाइम डायरेक्टर, ADAG समूह की लाभार्थी कंपनियों के निदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने मिलकर यह कथित साजिश रची। पुलिस का कहना है कि लोन स्वीकृत कराने के लिए बैंक में फर्जी दस्तावेज जमा किए गए और कंपनी की वित्तीय स्थिति को लेकर भ्रामक सूचनाएं दी गईं। EOW अब यह पता लगाने में जुटी है कि लोन की राशि किन-किन खातों में ट्रांसफर की गई और इस कथित लोन डाइवर्जन में किन अधिकारियों की भूमिका रही। जांच के दौरान कई वित्तीय दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड्स की भी पड़ताल की जा रही है।
मार्च में भी दर्ज हुई थी पहली एफआईआर
यह पहला मौका नहीं है जब अनिल अंबानी समूह की कंपनियां जांच एजेंसियों के रडार पर आई हों। इससे पहले इसी वर्ष 12 मार्च को भी एक्सिस बैंक की शिकायत पर EOW ने इसी तरह के आरोपों में पहली एफआईआर दर्ज की थी। उस मामले में भी आरोप लगाया गया था कि कंपनियों ने बैंक से लिए गए ऋण का उपयोग निर्धारित प्रोजेक्ट्स में करने के बजाय अन्य सहयोगी कंपनियों में किया। लगातार दूसरी एफआईआर दर्ज होने के बाद कॉरपोरेट और बैंकिंग सेक्टर में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आरोप साबित होते हैं, तो यह देश के बड़े कॉरपोरेट लोन मामलों में शामिल हो सकता है।
क्या होता है लोन डाइवर्जन?
लोन डाइवर्जन उस स्थिति को कहा जाता है, जब कोई कंपनी बैंक से किसी विशेष प्रोजेक्ट, बिजनेस या निवेश के लिए ऋण लेती है, लेकिन उस पैसे का उपयोग किसी अन्य उद्देश्य में करती है। कई मामलों में कंपनियां इस राशि को अपनी सहयोगी कंपनियों या निजी खातों में ट्रांसफर कर देती हैं। इसे बैंकिंग नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है। वहीं आर्थिक अपराध शाखा यानी EOW ऐसी ही बड़ी वित्तीय धोखाधड़ी, कॉरपोरेट फ्रॉड और टैक्स चोरी के मामलों की जांच करने वाली विशेष पुलिस इकाई होती है।
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