सीनियर सिटीजन के लिए एफडी बनी सुपरहिट इन्वेस्टमेंट: स्मॉल फाइनेंस बैंक दे रहे हाई रिटर्न, सुरक्षित कमाई का मजबूत ऑप्शन

शेयर बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव के बीच अब सीनियर सिटीजन फिर से सुरक्षित निवेश की ओर लौट रहे हैं। साल 2026 में फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) एक बार फिर भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरा है। रिटायरमेंट के बाद नियमित इनकम और पूंजी की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है। ऐसे में एफडी बुजुर्ग निवेशकों के लिए आसान, स्थिर और कम जोखिम वाला ऑप्शन बन गया है। खास बात यह है कि सीनियर सिटीजन को सामान्य ग्राहकों के मुकाबले ज्यादा ब्याज मिलता है जिससे उनकी कमाई और बेहतर हो जाती है।
अगर सरकारी बैंकों की बात करें तो यहां ब्याज दरें स्थिर और भरोसेमंद मानी जाती हैं। पीएनबी, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और कैनरा बैंक जैसे बैंक खास अवधि वाली एफडी पर करीब 7.10% तक ब्याज दे रहे हैं। वहीं एसबीआई और बैंक ऑफ बड़ौदा लंबी अवधि की एफडी पर 7.00% से 7.05% तक का रिटर्न ऑफर कर रहे हैं। प्राइवेट सेक्टर में रिटर्न थोड़ा ज्यादा है। इंडसाइंड बैंक करीब 7.50% तक ब्याज दे रहा है। कोटक महिंद्रा बैंक 7.30% और एक्सिस बैंक करीब 7.20% तक का रिटर्न ऑफर कर रहे हैं। इसके अलावा आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक भी 7% के आसपास स्थिर ब्याज दे रहे हैं।
स्मॉल फाइनेंस बैंक दे रहा सबसे ज्यादा रिटर्न
अगर आप ज्यादा रिटर्न चाहते हैं तो स्मॉल फाइनेंस बैंक सबसे आगे हैं। ईएसएएफ स्मॉल फाइनेंस बैंक 501 दिनों की एफडी पर करीब 8.50% तक ब्याज दे रहा है। इसके अलावा सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक, शिवलिक स्मॉल फाइनेंस बैंक और जना स्मॉल फाइनेंस बैंक भी 8% से ज्यादा रिटर्न दे रहे हैं। हालांकि, यहां एक बात ध्यान रखने वाली है। इन बैंकों में रिटर्न ज्यादा है, लेकिन जोखिम भी बड़े बैंकों से थोड़ा अधिक माना जाता है। इसलिए निवेश से पहले बैलेंस जरूरी है।
स्मार्ट इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी
एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि पूरा पैसा एक ही एफडी में न लगाएं। इसे अलग-अलग अवधि में बांटना ज्यादा बेहतर होता है। इसे एफडी लैडरिंग कहा जाता है। इस स्ट्रैटेजी में आप एक साल, दो साल और तीन साल जैसी अलग-अलग अवधि की एफडी बनाते हैं। इससे आपको बदलती ब्याज दरों का फायदा मिलता है। साथ ही जरूरत पड़ने पर पैसा निकालना भी आसान रहता है। इसके अलावा एफडी के साथ सीनियर सिटीजन सेविंगस स्कीम (एससीएसएस) और पब्लिक प्रोवाइडेंट फंड (पीपीएफ) जैसे ऑप्शन भी शामिल किए जा सकते हैं।
टैक्स और टीडीएस के नियम समझें
एफडी से मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्सेबल होता है। यह आपकी इनकम स्लैब के हिसाब से टैक्स में जुड़ता है। बैंक इस पर टीडीएस काटते हैं। लेकिन अगर आपकी कुल सालाना आय टैक्स सीमा से कम है तो आप फॉर्म 15एच भर सकते हैं। इससे टीडीएस कटने से बचा जा सकता है। फॉर्म 15एच एक सेल्फ-डिक्लेरेशन होता है। इसे 60 साल से ज्यादा उम्र के लोग जमा करते हैं। शर्त यह है कि आपकी कुल टैक्स देनदारी शून्य होनी चाहिए।
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