गोल्ड 10 हजार और सिल्वर 18 हजार महंगा: सोना-चांदी पर बड़ा टैक्स झटका, बाजार में रिकॉर्ड उछाल

13 मई 2026
सोना-चांदी पर बड़ा टैक्स झटका, बाजार में रिकॉर्ड उछाल

केंद्र सरकार ने सोना और चांदी के आयात पर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने इंपोर्ट ड्यूटी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी है। बुधवार को आदेश जारी होते ही बाजार में हलचल बढ़ गई। गुरुवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त उछाल दिखा।

10 ग्राम सोना करीब 10 हजार रुपए महंगा हो गया। इसके बाद सोने का भाव 1.63 लाख रुपए पहुंच गया। वहीं चांदी में भी रिकॉर्ड तेजी दिखी। एक किलो चांदी करीब 18 हजार रुपए चढ़ गई। इसके बाद कीमत 2.97 लाख रुपए तक पहुंच गई। सरकार का कहना है कि यह फैसला विदेशी मुद्रा बचाने के लिए लिया गया है। लगातार बढ़ते आयात से डॉलर पर दबाव बढ़ रहा था। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने भी चिंता बढ़ाई है। ऐसे में सरकार ने गोल्ड इंपोर्ट को महंगा करने का रास्ता चुना।

अब सोने पर कुल 15 प्रतिशत टैक्स

सरकार ने सोने पर 10 प्रतिशत बेसिक कस्टम ड्यूटी लगाई है। इसके अलावा 5 प्रतिशत एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) जोड़ा गया है। इस तरह कुल प्रभावी टैक्स 15 प्रतिशत पहुंच गया है। इससे पहले 2024 के बजट में ड्यूटी घटाई गई थी। तब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टैक्स 15 प्रतिशत से कम करके 6 प्रतिशत किया था। उस फैसले के बाद गोल्ड इंपोर्ट बढ़ गया था। अब सरकार ने फिर से टैक्स बढ़ा दिया है।

IGST नियमों ने बढ़ाई बैंकों की परेशानी

हाल में सरकार ने IGST नियमों में भी बदलाव किया था। नए नियम के मुताबिक अब बैंकों को सोना इंपोर्ट करते ही 3 प्रतिशत IGST जमा करना पड़ रहा है। पहले बैंक यह टैक्स बाद में देते थे। पुराने सिस्टम में बैंक बॉन्डेड वेयरहाउस सुविधा का इस्तेमाल करते थे। सोना बिकने के बाद टैक्स जमा होता था। लेकिन अब तुरंत भुगतान की शर्त लागू हो गई है। इससे बैंकों की वर्किंग कैपिटल पर दबाव बढ़ गया है। इसी कारण कई बैंकों ने फिलहाल सोना मंगाना रोक दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अप्रैल में सिर्फ 15 टन सोना आयात हुआ। कोविड काल छोड़ दें, तो यह पिछले 30 साल का सबसे कम मासिक आयात माना जा रहा है।

सरकार का फोकस विदेशी मुद्रा बचाने पर

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड उपभोक्ता है। देश में हर साल भारी मात्रा में सोना खरीदा जाता है। मांग पूरी करने के लिए सोना विदेशों से मंगाना पड़ता है। इसके बदले डॉलर में भुगतान करना पड़ता है। जब ज्यादा डॉलर बाहर जाते हैं, तब विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है। इससे रुपए की स्थिति कमजोर होती है। मंगलवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 95.50 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के नेशनल सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता ने कहा कि सरकार चालू खाता घाटा नियंत्रित करना चाहती है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि ऊंची कीमतों के बीच मांग कमजोर पड़ सकती है।

बाजार में तस्करी बढ़ने की आशंका

ज्वेलरी इंडस्ट्री से जुड़े कारोबारियों ने चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि टैक्स बढ़ने से स्मगलिंग बढ़ सकती है। पहले जब ड्यूटी घटाई गई थी, तब अवैध तस्करी कम हुई थी। अब कीमतें बढ़ने के बाद फिर से गैरकानूनी कारोबार सक्रिय हो सकता है। व्यापारियों का मानना है कि ऊंचे टैक्स से बाजार का संतुलन बिगड़ सकता है।

पीएम मोदी ने भी की थी अपील

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल में सोना खरीदने को लेकर अपील की थी। उन्होंने लगातार दो दिन देशवासियों से संयम बरतने को कहा था। पीएम ने कहा था कि देशहित में एक साल तक सोना नहीं खरीदना चाहिए। उनका कहना था कि विदेशी मुद्रा बचाना भी देशभक्ति का हिस्सा है। उन्होंने लोगों से शादी और कार्यक्रमों में भी गोल्ड खरीद कम करने की अपील की थी। सरकार के ताजा फैसले को पीएम की उसी अपील से जोड़कर देखा जा रहा है।

नव्य जागरण

पूरी खबर पढ़ें ऐप पर

ऐप डाउनलोड करने के लिए QR कोड
ऐप डाउनलोड करने के लिए QR स्कैन करेंGET IT ON Google Play

अधूरा नहीं! पूरी खबर पढ़ें नव्य जागरण ऐप पर

ताजा खबरें, लोकल अपडेट और ब्रेकिंग अलर्ट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।