गूगल की बड़ी कार्रवाई: भारत में 17 लाख एडवरटाइजर अकाउंट सस्पेंड, 48 करोड़ से ज्यादा भ्रामक विज्ञापन हटाए

18 अप्रैल 2026
भारत में 17 लाख एडवरटाइजर अकाउंट सस्पेंड, 48 करोड़ से ज्यादा भ्रामक विज्ञापन हटाए

टेक कंपनी गूगल ने साल 2025 में भारत में नियमों का उल्लंघन करने वाले 48.37 करोड़ से अधिक भ्रामक विज्ञापनों को हटाया या ब्लॉक किया है। इसी अवधि में कंपनी ने करीब 17 लाख एडवरटाइजर अकाउंट्स को भी सस्पेंड किया। यह जानकारी गुरुवार को जारी कंपनी की एड्स सेफ्टी रिपोर्ट में सामने आई।

रिपोर्ट के मुताबिक, कार्रवाई केवल भारत तक सीमित नहीं रही। वैश्विक स्तर पर भी गूगल ने बड़े पैमाने पर सख्ती दिखाई। साल 2025 में दुनियाभर में 830 करोड़ से ज्यादा आपत्तिजनक और भ्रामक विज्ञापनों को हटाया गया। साथ ही 2.49 करोड़ एडवरटाइजर अकाउंट्स को सस्पेंड किया गया। कंपनी का दावा है कि हटाए गए कुल विज्ञापनों में से 99% को यूजर्स के देखने से पहले ही ब्लॉक कर दिया गया।

जेमिनी एआई ने बढ़ाई गूगल की क्षमता

गूगल ने बताया कि उसके एआई प्लेटफॉर्म जेमिनी के इस्तेमाल से विज्ञापनों की निगरानी और भी प्रभावी हो गई है। आज के समय में स्कैमर्स भ्रामक विज्ञापन बनाने के लिए जेनेरेटिव एआई का सहारा ले रहे हैं जिससे फर्जी कंटेंट को पहचानना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

हालांकि, जेमिनी की मदद से गूगल अब ऐसे धोखाधड़ी वाले विज्ञापनों को रियल-टाइम में पहचानकर तुरंत कार्रवाई कर पा रहा है। कंपनी के अनुसार, 2024 की तुलना में 2025 में यूजर्स की शिकायतों पर चार गुना तेजी से एक्शन लिया गया।

अब केवल कीवर्ड नहीं, इंटेंट भी समझता है सिस्टम

गूगल के एड्स प्राइवेसी एंड सेफ्टी विभाग के वाइस प्रेसिडेंट और जनरल मैनेजर कीरत शर्मा ने बताया कि कंपनी की टीमें 24 घंटे निगरानी में लगी रहती हैं। उन्होंने कहा कि गूगल के नए एआई मॉडल्स अब सिर्फ कीवर्ड्स पर निर्भर नहीं हैं बल्कि विज्ञापनों के पीछे के इंटेंट को भी समझते हैं। ये सिस्टम अकाउंट की उम्र, गतिविधियों और व्यवहार से जुड़े अरबों संकेतों का विश्लेषण करते हैं जिससे धोखाधड़ी के लिए बनाए गए विज्ञापनों को पहले ही ब्लॉक कर दिया जाता है।

क्या है जेनेरेटिव एआई?

जेनेरेटिव एआई एक ऐसी तकनीक है जो खुद से टेक्स्ट, इमेज और वीडियो तैयार कर सकती है। इसका उपयोग जहां एक ओर क्रिएटिव कामों में किया जा रहा है। वहीं स्कैमर्स इसे असली जैसे दिखने वाले फर्जी विज्ञापन बनाने के लिए भी इस्तेमाल कर रहे हैं।

क्या होती है एड्स सेफ्टी रिपोर्ट?

एड्स सेफ्टी रिपोर्ट गूगल द्वारा हर साल जारी की जाती है। इसका उद्देश्य यह बताना होता है कि कंपनी ने अपने प्लेटफॉर्म को सुरक्षित बनाने और यूजर्स को भ्रामक या खतरनाक विज्ञापनों से बचाने के लिए क्या कदम उठाए हैं। गूगल का कहना है कि भविष्य में भी एआई की मदद से ऐसे विज्ञापनों पर और सख्ती की जाएगी ताकि डिजिटल प्लेटफॉर्म को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाया जा सके।

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