होर्मुज खुलते ही कच्चे तेल के दाम में गिरावट: 13% गिरकर 86 डॉलर प्रति बैरल, वैश्विक बाजार में तेजी

18 अप्रैल 2026
 13% गिरकर 86 डॉलर प्रति बैरल, वैश्विक बाजार में तेजी

होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। क्रूड ऑयल करीब 13% सस्ता होकर 86 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। एक दिन पहले इसकी कीमत 99.39 डॉलर प्रति बैरल थी। विशेषज्ञों के अनुसार, मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने की उम्मीद से सप्लाई को लेकर चिंता घटी है, जिससे कीमतों में यह बड़ी गिरावट देखने को मिली।

28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने से पहले कच्चा तेल 73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था। युद्ध के दौरान नौ मार्च को इसकी कीमत बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। इस उछाल के कारण दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की आशंका जताई जा रही थी लेकिन अब कीमतों में गिरावट से राहत की उम्मीद बढ़ गई है।

वैश्विक बाजार में तेजी

कच्चे तेल की कीमत घटने का असर शेयर बाजारों पर भी देखने को मिला। अमेरिका का प्रमुख इंडेक्स डाउ जोन्स करीब 1,000 अंकों की तेजी के साथ 49,500 के स्तर पर पहुंच गया। इसके अलावा एस एंड पी 500 में 1.12% और नैस्डैक इंडेक्स में 1.04% की बढ़त दर्ज की गई। निवेशकों का भरोसा बढ़ने से बाजार में सकारात्मक रुख देखने को मिला।

ईरान ने होर्मुज खोलने का ऐलान किया

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने जानकारी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी व्यापारिक जहाजों के लिए खोल दिया गया है। इजराइल और लेबनान के बीच युद्धविराम के बाद यह कदम उठाया गया है, जिससे वैश्विक सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद है।

ट्रम्प का दावा- होर्मुज अब बंद नहीं होगा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि ईरान ने होर्मुज को भविष्य में कभी बंद न करने का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि अब इस मार्ग का उपयोग दुनिया के खिलाफ हथियार के रूप में नहीं किया जाएगा।

भारत को क्या होगा फायदा?

कच्चा तेल सस्ता होने से भारत को कई स्तर पर राहत मिल सकती है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का लगभग 85% तेल आयात करता है।

  1. पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर असर: आईओसी, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी कंपनियों के लिए कीमतें बढ़ाने का दबाव कम होगा।
  2. महंगाई में राहत: ट्रांसपोर्ट लागत कम रहने से रोजमर्रा के सामानों की कीमतें नियंत्रित रहेंगी।
  3. करंट अकाउंट डेफिसिट में सुधार: आयात बिल घटने से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और कैड कम होगा।
  4. रुपया मजबूत: डॉलर की मांग घटने से भारतीय रुपये को मजबूती मिल सकती है।
  5. सब्सिडी बोझ कम: सरकार का खर्च घटेगा, जिससे अन्य क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया जा सकेगा।
  6. कॉर्पोरेट मुनाफा: लागत घटने से कंपनियों का मुनाफा बढ़ेगा और शेयर बाजार को समर्थन मिलेगा।

विशेषज्ञों के मुताबिक, कच्चा तेल 10 डॉलर सस्ता होने पर भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट में 9-10 बिलियन डॉलर की कमी और महंगाई में करीब 0.5% तक राहत मिल सकती है।

सप्लाई संकट से जूझ रही थी दुनिया

रिपोर्ट्स के अनुसार, युद्ध के चलते रोजाना करीब 1.3 करोड़ बैरल तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही थी। हालांकि वैकल्पिक पाइपलाइन का इस्तेमाल किया गया, लेकिन दबाव बना रहा। अब होर्मुज खुलने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लौटने की उम्मीद है।

पहले क्यों बढ़े थे दाम?

संघर्ष के दौरान ईरान ने होर्मुज मार्ग को लगभग बंद कर दिया था। यह मार्ग दुनिया के करीब 20% तेल और गैस सप्लाई के लिए बेहद अहम है। इसके बाधित होने से कच्चा तेल, एलपीजी, उर्वरक और प्लास्टिक जैसी चीजें महंगी हो गई थीं। इसके अलावा यूरोप और ब्रिटेन में जरूरी वस्तुओं की कमी का खतरा बढ़ गया था जबकि अमेरिका में गैस की कीमतें भी काफी बढ़ गई थीं।

शांति की उम्मीद से बाजार को सहारा

ट्रम्प ने हाल ही में संकेत दिए थे कि मिडिल ईस्ट में हालात जल्द सुधर सकते हैं और ईरान समझौते के लिए तैयार है। इसी उम्मीद ने बाजार में सकारात्मक माहौल बनाया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि क्षेत्र में स्थायी शांति बनी रहती है, तो आने वाले समय में तेल की कीमतों में और स्थिरता देखने को मिल सकती है।

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