देशभर में पब्लिक वाई-फाई के लिए एक पासवर्ड की तैयारी: बार-बार ओटीपी से मिलेगी राहत, नई डिजिटल पहल

06 मई 2026
बार-बार ओटीपी से मिलेगी राहत, नई डिजिटल पहल

देश में पब्लिक इंटरनेट को आसान और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार बड़ा बदलाव करने जा रही है। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण ने एक नए पब्लिक वाई-फाई सिस्टम का प्रस्ताव तैयार किया है। इस सिस्टम के तहत अब पूरे देश में एक ही पासवर्ड या ओटीपी से अलग-अलग हॉटस्पॉट पर लॉगिन किया जा सकेगा। इसका मतलब है कि यूजर्स को हर बार नए नेटवर्क पर कनेक्ट होने के लिए अलग-अलग ओटीपी डालने की जरूरत नहीं होगी। यह सुविधा देशभर में मौजूद करीब 4 लाख पब्लिक वाई-फाई हॉटस्पॉट पर लागू करने की योजना है। ट्राई ने इस प्रस्ताव पर आम लोगों और स्टेकहोल्डर्स से सुझाव भी मांगे हैं।

सरकार ने पहले पीएम-वाणी योजना के जरिए पब्लिक वाई-फाई को बढ़ावा देने की कोशिश की थी। लेकिन यह योजना उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं हो पाई। एक्सपर्टस के अनुसार, इसका मुख्य कारण यूजर फ्रेंडली अनुभव का अभाव और ऑपरेटर के लिए कमाई का स्पष्ट मॉडल न होना था। इसी वजह से अब नया सिस्टम ज्यादा स्मार्ट और व्यावहारिक बनाया जा रहा है, ताकि यूजर्स के साथ-साथ सर्विस प्रोवाइडर्स को भी फायदा हो सके।

डिजिटल पेमेंट होंगे सुरक्षित

नए सिस्टम में सुरक्षा को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी गई है। इसमें वाई-फाई प्रोटेक्टेड एक्सेस थ्री जैसे एडवांस सिक्योरिटी स्टैंडर्ड लागू किए जाएंगे। इससे भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी यूजर्स सुरक्षित तरीके से इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकेंगे। खासकर यूपीआई और अन्य डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म पर ट्रांजैक्शन ज्यादा सुरक्षित होंगे। आज के समय में जब डिजिटल पेमेंट तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसे में सुरक्षित इंटरनेट कनेक्शन बेहद जरूरी हो गया है। यह नई व्यवस्था उसी जरूरत को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है।

कमाई का मॉडल भी होगा मजबूत

सरकार इस बार पब्लिक वाई-फाई को एक सस्टेनेबल बिजनेस मॉडल के रूप में विकसित करना चाहती है। प्रस्ताव के अनुसार, ऑपरेटर को कमाई के कई विकल्प दिए जाएंगे। इसमें विज्ञापन आधारित मॉडल, पेड इंटरनेट प्लान और सरकारी सब्सिडी यानी वायबिलिटी गैप फंडिंग शामिल हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ऑपरेटर इस सेवा को लंबे समय तक बनाए रख सकें और इसे विस्तार दे सकें।

शहर और गांव के लिए अलग रणनीति

इस नई योजना में शहर और गांव के लिए अलग-अलग मॉडल तैयार किए गए हैं। शहरों में हाई-स्पीड इंटरनेट उपलब्ध कराया जाएगा, जबकि गांवों में कम लागत वाला ‘कम्युनिटी वाई-फाई’ मॉडल लागू होगा। यह कदम डिजिटल डिवाइड को कम करने में मदद करेगा। देश की बड़ी आबादी अभी भी सस्ते और भरोसेमंद इंटरनेट से वंचित है। यह पहल उन लोगों तक इंटरनेट पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

भारत में पब्लिक वाई-फाई का कम इस्तेमाल

भारत में पब्लिक वाई-फाई का उपयोग अभी बहुत कम है। करीब 140 करोड़ की आबादी में केवल 2% लोग ही इसका इस्तेमाल करते हैं। वहीं, दूसरे देशों की तुलना करें तो यह आंकड़ा काफी कम है। दक्षिण कोरिया में 80%, अमेरिका में 70%, यूरोप और चीन में 60% और इंग्लैंड में 50% लोग पब्लिक वाई-फाई का उपयोग करते हैं। इस अंतर को कम करने के लिए यह नई पहल बेहद अहम मानी जा रही है।

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगा बढ़ावा

एक्सपर्टस का मानना है कि सस्ता और आसान इंटरनेट देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगा। यह न केवल आम लोगों को फायदा देगा, बल्कि ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन एजुकेशन और डिजिटल सर्विसेज को भी बढ़ावा देगा। पब्लिक वाई-फाई खासतौर पर हाई डेटा उपयोग जैसे वीडियो स्ट्रीमिंग, क्लाउड सर्विस और एआई आधारित सेवाओं के लिए बेहतर विकल्प बन सकता है।

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