खाड़ी तनाव का प्याज किसानों पर असर: निर्यात में करीब 30% तक गिरावट, शिपिंग लागत में बढ़ोतरी

20 अप्रैल 2026
निर्यात में करीब 30% तक गिरावट,  शिपिंग लागत में बढ़ोतरी

खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव का असर अब भारत के कृषि बाजार पर साफ दिखने लगा है। सबसे ज्यादा मार प्याज किसानों पर पड़ी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग कमजोर हुई है। शिपिंग लागत तेजी से बढ़ी है। घरेलू बाजार में भी खपत धीमी है। इन सभी कारणों से प्याज की कीमतों पर भारी दबाव बना है। हालात ऐसे हो गए हैं कि किसानों को लागत से भी आधी कीमत पर प्याज बेचना पड़ रहा है। यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो खेती का पैटर्न बदल सकता है। किसान प्याज की खेती से दूरी बना सकते हैं।

भारत दुनिया के बड़े प्याज निर्यातकों में शामिल है। खासतौर पर खाड़ी देश भारतीय प्याज के प्रमुख खरीदार रहे हैं। इसमें यूएई, सऊदी अरब, कुवैत, इराक और ओमान जैसे देश शामिल हैं। लेकिन पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण इन देशों की व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। इसका सीधा असर निर्यात पर पड़ा है। कुल प्याज निर्यात में करीब 30% तक गिरावट आई है। खाड़ी देशों को होने वाले निर्यात में तो 55-60% तक की कमी दर्ज की गई है। यह गिरावट किसानों और व्यापारियों दोनों के लिए चिंता का कारण बन गई है।

घरेलू बाजार में बढ़ी सप्लाई

निर्यात घटने का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ा है। जो प्याज पहले विदेश जाता था, वह अब देश के अंदर ही बिक रहा है। इससे सप्लाई अचानक बढ़ गई है। लेकिन मांग उतनी तेजी से नहीं बढ़ी। नतीजा यह हुआ कि कीमतें गिर गईं। कई थोक बाजारों में प्याज 800 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा है। जबकि इसकी उत्पादन लागत 1800 से 2200 रुपये प्रति क्विंटल के बीच है। यानी किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

शिपिंग महंगा, निर्यात घाटे का सौदा

प्याज निर्यात में गिरावट की एक बड़ी वजह शिपिंग लागत में तेज बढ़ोतरी है। कुछ महीने पहले तक एक कंटेनर का भाड़ा 500 से 800 डॉलर के बीच था। अब यह बढ़कर 6000 से 7500 डॉलर तक पहुंच गया है। इतनी अधिक लागत के कारण निर्यात करना व्यापारियों के लिए घाटे का सौदा बन गया है। कई निर्यातकों ने ऑर्डर लेने से ही मना कर दिया है। इससे किसानों की उपज बाजार में अटक गई है।

बफर स्टॉक पर जोर

स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने कदम उठाए हैं। नेफेड और एनसीसीएफ जैसी एजेंसियों को बाजार से प्याज खरीदने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का फोकस बफर स्टॉक बनाने पर है। ताकि कीमतों को स्थिर किया जा सके। यह कदम किसानों को कुछ राहत दे सकता है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि यह समाधान सीमित समय के लिए ही प्रभावी होगा।

मांग भी कमजोर

घरेलू मांग भी कमजोर बनी हुई है। होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर की रफ्तार धीमी है। इसका असर प्याज की खपत पर पड़ा है। इसके अलावा LPG सप्लाई में अनियमितता के कारण भी खपत प्रभावित हुई है। कई छोटे कारोबार अब वैकल्पिक ईंधन का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे कुल मांग में कमी आई है।

पारंपरिक खरीदार भी पीछे हटे

बांग्लादेश जैसे पारंपरिक खरीदारों ने भी पिछले दो सालों में अपनी खरीद घटा दी है। इससे निर्यात और कमजोर हुआ है। हालांकि इस साल उत्पादन में 10-11% की गिरावट का अनुमान है। लेकिन निर्यात कम होने के कारण देश में प्याज की उपलब्धता पर्याप्त बनी हुई है। यही वजह है कि उत्पादन घटने के बावजूद कीमतों में उछाल नहीं आ रहा है।

नव्य जागरण

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