20% तक महंगी हो सकती है शराब और बीयर: ईरान-अमेरिका तनाव का असर, बोतल और कैन की लागत बढ़ी

08 मई 2026
ईरान-अमेरिका तनाव का असर, बोतल और कैन की लागत बढ़ी

भारत में जल्द ही शराब, बीयर और वाइन के दाम बढ़ सकते हैं। शराब बनाने वाली बड़ी कंपनियों ने अलग-अलग राज्य सरकारों से कीमतें बढ़ाने की अनुमति मांगी है। कंपनियों का कहना है कि Iran और United States के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात का सीधा असर सप्लाई चेन पर पड़ा है। इसके कारण कांच की बोतलें, एल्युमीनियम कैन और पैकेजिंग मटेरियल काफी महंगे हो गए हैं।

शराब उद्योग की बड़ी संस्थाएं कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज (CIABC) और ब्रूअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) ने राज्यों को पत्र लिखकर दामों में संशोधन की मांग की है। कंपनियों का कहना है कि मौजूदा लागत पर पुराने रेट में कारोबार चलाना मुश्किल होता जा रहा है।

15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं दाम

ब्रूअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने सुझाव दिया है कि बढ़ती लागत को देखते हुए शराब और बीयर की कीमतों में 15% से 20% तक की बढ़ोतरी जरूरी है। उद्योग से जुड़ी कंपनियों का कहना है कि कच्चे माल, पैकेजिंग और ट्रांसपोर्टेशन की लागत लगातार बढ़ रही है। एसोसिएशन में शामिल बड़ी कंपनियों में यूनाइटेड ब्रूअर्स, एबी इनबेव और कारल्सबर्ग जैसी कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों की देश के बीयर मार्केट में करीब 85% हिस्सेदारी बताई जाती है। कंपनियों का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत की वजह से मुनाफा कम होता जा रहा है। अगर कीमतों में बदलाव नहीं हुआ तो कई कंपनियों के लिए उत्पादन जारी रखना मुश्किल हो सकता है।

फिरोजाबाद के ग्लास हब में संकट गहराया

फिरोजाबाद का ग्लास इंडस्ट्री हब इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित बताया जा रहा है। शराब की बोतलों का बड़ा हिस्सा यहीं तैयार होता है। लेकिन गैस सप्लाई में कमी के कारण फैक्ट्रियों का उत्पादन प्रभावित हो गया है। उद्योग संगठनों के मुताबिक, फैक्ट्रियों को जरूरत की तुलना में सिर्फ 60% गैस मिल रही है। इसकी वजह से निर्माताओं को महंगी LNG और LPG खरीदनी पड़ रही है। इससे बोतलों की लागत तेजी से बढ़ी है। कई यूनिट्स आर्थिक दबाव में बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं।

बीयर कैन की सप्लाई पर भी संकट

बीयर इंडस्ट्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती एल्युमीनियम की कमी बन गई है। मिडिल ईस्ट से एल्युमीनियम सप्लाई प्रभावित होने से कैन तैयार करने वाली कंपनियों पर दबाव बढ़ गया है। सप्लायर्स ने चेतावनी दी है कि अगर अंतरराष्ट्रीय तनाव लंबे समय तक जारी रहा तो बीयर कैन का उत्पादन गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है। इससे कई मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स को अस्थायी रूप से बंद भी करना पड़ सकता है।

कंपनियों ने टैक्स में राहत की मांग की

शराब कंपनियों ने राज्य सरकारों से टैक्स में अस्थायी राहत देने की भी मांग की है। ब्रूअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने सुझाव दिया है कि मैन्युफैक्चरिंग लेवी में 3 रुपये से 5 रुपये प्रति लीटर तक की कटौती की जाए। कंपनियों का कहना है कि अगर सरकार टैक्स में थोड़ी राहत देती है तो ग्राहकों पर कीमत बढ़ोतरी का असर कुछ कम किया जा सकता है। वहीं CIABC ने वाइन और IMFL यानी इंडियन मेड फॉरेन लिकर की एक्स-डिस्टिलरी कीमतों में संशोधन की मांग उठाई है।

ग्राहकों की जेब पर बढ़ेगा असर

अगर राज्यों ने कंपनियों की मांग मान ली तो आने वाले समय में शराब, बीयर और वाइन के दाम बढ़ सकते हैं। इसका सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा। उद्योग से जुड़े जानकारों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय संकट लंबा खिंचने पर कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।

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