साबुन, तेल और बिस्किट होंगे महंगे: FMCG कंपनियां बढ़ाएंगी दाम, डाबर ने दिए दाम बढ़ाने के संकेत

देश में रोजमर्रा के इस्तेमाल का सामान आने वाले दिनों में और महंगा हो सकता है। Dabur India समेत कई बड़ी FMCG कंपनियों ने संकेत दिए हैं कि बढ़ती लागत के कारण प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं। इसका असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। साबुन, बिस्किट, तेल, शैंपू, टूथपेस्ट और पैकेज्ड फूड जैसी चीजों के दाम बढ़ सकते हैं। कंपनियों का कहना है कि पैकेजिंग मटेरियल, ट्रांसपोर्टेशन और कच्चे माल की लागत लगातार ऊपर जा रही है। वहीं मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों ने भी चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में आने वाले महीनों में घर का मंथली बजट बिगड़ सकता है।
Dabur India के ग्लोबल CEO मोहित मल्होत्रा ने कहा है कि कंपनी वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कीमतें बढ़ा सकती है। कंपनी पहले ही मौजूदा तिमाही में करीब चार फीसदी तक कीमतें बढ़ा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद लागत कम नहीं हो रही। डाबर का कहना है कि पैकेजिंग मटेरियल और अन्य इनपुट कॉस्ट तेजी से बढ़ रही है। कंपनी का नेट प्रॉफिट चौथी तिमाही में बढ़ा जरूर है, लेकिन महंगाई का दबाव अब भी बना हुआ है। यही वजह है कि कंपनियां अपने मार्जिन बचाने के लिए कीमतें बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं।
कच्चे तेल और मिडिल-ईस्ट संकट का असर
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने FMCG इंडस्ट्री की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। ईरान और अमेरिका के बीच टकराव के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। इसका सीधा असर ट्रांसपोर्ट, प्लास्टिक पैकेजिंग और केमिकल बेस्ड प्रोडक्ट्स पर पड़ता है। अगर क्रूड ऑयल महंगा होता है तो माल ढुलाई की लागत भी बढ़ती है। इससे कंपनियों के लिए प्रोडक्ट तैयार करना और बाजार तक पहुंचाना महंगा हो जाता है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर हालात जल्दी नहीं सुधरे तो आने वाले महीनों में FMCG सेक्टर में कीमतों की नई लहर देखी जा सकती है।
HUL, नेस्ले और ब्रिटानिया भी दबाव में
सिर्फ डाबर ही नहीं, बल्कि Hindustan Unilever, Nestlé India, Marico, ITC Limited, Britannia Industries और Godrej Consumer Products जैसी कंपनियां भी बढ़ती लागत से परेशान हैं। कंपनियों की तिमाही रिपोर्ट और कमेंटरी से साफ है कि आने वाले समय में उपभोक्ताओं पर महंगाई का असर और बढ़ सकता है। खाने के तेल, दूध, चीनी और पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले मटेरियल की कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं। इससे कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बन रहा है।
गांवों में बढ़ी मांग, लेकिन बढ़ी परेशानी
FMCG कंपनियों के लिए एक राहत की खबर यह रही कि ग्रामीण इलाकों में डिमांड फिर बढ़ने लगी है। छोटे शहरों और गांवों में उपभोक्ताओं की खरीदारी में सुधार दिखा है। लंबे समय बाद कंपनियों को वॉल्यूम ग्रोथ देखने को मिली है। लेकिन जैसे ही बाजार में मांग बढ़ी, कंपनियों के सामने लागत का संकट खड़ा हो गया। कंपनियां ज्यादा बिक्री तो कर रही हैं, लेकिन मुनाफा बचाना मुश्किल हो रहा है। यही वजह है कि कंपनियां धीरे-धीरे कीमतें बढ़ाने का रास्ता चुन रही हैं।
हॉर्मुज रूट संकट से सप्लाई चेन पर असर
मिडिल-ईस्ट में तनाव के कारण हॉर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। यह दुनिया का सबसे अहम तेल सप्लाई रूट माना जाता है। अगर यहां संकट बढ़ता है तो वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है। FMCG सेक्टर के लिए यह दोहरी चुनौती बनती जा रही है। एक तरफ मांग बढ़ रही है, दूसरी तरफ लागत तेजी से ऊपर जा रही है। माल ढुलाई महंगी हो रही है और कंपनियों को कच्चा माल समय पर नहीं मिल पा रहा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर मानसून कमजोर रहता है और अंतरराष्ट्रीय हालात खराब बने रहते हैं तो आम लोगों के किचन बजट पर बड़ा असर देखने को मिल सकता है।
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