तेल कंपनियों का बड़ा खेल: 2025-26 में रोज 116 करोड़ रुपये मुनाफा, अब महंगे क्रूड का हवाला देकर बढ़ा रहीं दबाव

01 मई 2026
2025-26 में रोज 116 करोड़ रुपये मुनाफा, अब महंगे क्रूड का हवाला देकर बढ़ा रहीं दबाव

देश की तेल कंपनियों ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में जबरदस्त मुनाफा कमाया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, चार प्रमुख कंपनियों ने साल के शुरुआती नौ महीनों में करीब 1.37 लाख करोड़ रुपए का लाभ दर्ज किया। यानी हर दिन औसतन 116 करोड़ रुपए की कमाई हुई। खास बात यह है कि इस दौरान कच्चे तेल यानी क्रूड की औसत कीमत करीब 71 डॉलर प्रति बैरल रही। यह कीमत कोरोना काल 2020-21 के बाद सबसे कम मानी जा रही है। साफ है कि सस्ते कच्चे तेल का फायदा कंपनियों को भरपूर मिला।

अब स्थिति पूरी तरह बदल गई है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें अचानक उछल गईं। गुरुवार को यह 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो पिछले चार साल का उच्चतम स्तर है। हालांकि बाद में कीमतें घटकर करीब 116 डॉलर तक आ गईं। इस बढ़ोतरी के बाद तेल कंपनियां अब घाटे का दावा कर रही हैं। एजेंसियों के मुताबिक, महंगे कच्चे तेल के कारण कंपनियों को रोजाना करीब 2,400 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है।

पेट्रोल-डीजल पर बढ़ा दबाव

तेल कंपनियों का कहना है कि मौजूदा समय में उन्हें पेट्रोल पर प्रति लीटर 14 रुपए और डीजल पर 18 रुपए तक का नुकसान झेलना पड़ रहा है। इसी वजह से कंपनियां कीमतें बढ़ाने का दबाव बना रही हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि पहले हुए भारी मुनाफे को देखते हुए कंपनियों के पास कीमतों को स्थिर रखने की गुंजाइश अभी भी है। यह बहस अब तेज हो गई है कि क्या कंपनियां वास्तव में घाटे में हैं या यह सिर्फ कीमत बढ़ाने की रणनीति है।

सरकार ने घटाई एक्साइज ड्यूटी

तेल की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने राहत देने की कोशिश की है। 27 मार्च को पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपए की कटौती की गई। इससे आम लोगों को कुछ राहत मिली। हालांकि, इस फैसले से सरकार को हर महीने करीब 12,000 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है। यह सरकार के लिए एक बड़ा आर्थिक दबाव है।

विंडफॉल टैक्स से हो रही भरपाई

सरकार ने इस नुकसान की भरपाई के लिए विंडफॉल टैक्स का सहारा लिया है। 11 अप्रैल को डीजल निर्यात पर लगने वाले टैक्स को 21.50 रुपए से बढ़ाकर 55.5 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया। भारत हर महीने करीब 191 करोड़ लीटर डीजल निर्यात करता है। ऐसे में इस टैक्स से सरकार को लगभग 10,500 करोड़ रुपए की मासिक आय हो रही है। इससे एक्साइज ड्यूटी में कटौती से हुए नुकसान की काफी हद तक भरपाई हो रही है।

कंपनियों की नई रणनीति: राशनिंग लागू

घाटे को कम करने के लिए तेल कंपनियां अब नई रणनीति अपना रही हैं। पेट्रोल पंप संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पिछले साल की बिक्री के हिसाब से ही ईंधन बेचें। एक बार में किसी ग्राहक को 200 लीटर से ज्यादा डीजल न देने की सीमा तय की गई है। इसका मकसद बड़े खरीदारों को नियंत्रित करना है। खासतौर पर उद्योगों को मिलने वाली बल्क सप्लाई पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है।

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