ट्रम्प की टैरिफ पॉलिसी पर अमेरिकी कोर्ट का बड़ा झटका: 10% ग्लोबल टैरिफ अवैध घोषित, अदालत बोली- राष्ट्रपति ने शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया

वॉशिंगटन|08 मई 2026
 10% ग्लोबल टैरिफ अवैध घोषित, अदालत बोली- राष्ट्रपति ने शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की टैरिफ पॉलिसी को लेकर बड़ा कानूनी झटका लगा है। अमेरिकी फेडरल ट्रेड कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन की ओर से लगाए गए 10% ग्लोबल टैरिफ को अवैध करार दे दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि राष्ट्रपति अपने अधिकारों का असीमित इस्तेमाल नहीं कर सकते। इतना बड़ा आर्थिक फैसला कांग्रेस की मंजूरी के बिना लागू नहीं किया जा सकता। इस फैसले के बाद अमेरिका की ट्रेड पॉलिसी, ग्लोबल सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई बहस शुरू हो गई है।

कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड ने 2-1 के बहुमत से यह फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि ट्रम्प प्रशासन ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 का गलत इस्तेमाल किया। कोर्ट के मुताबिक, यह कानून केवल सीमित और अस्थायी आर्थिक संकट की स्थिति में लागू किया जा सकता है। इसे पूरी दुनिया पर व्यापक टैरिफ लगाने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि राष्ट्रपति की आर्थिक शक्तियां भी संविधान और संसद की सीमाओं के भीतर ही काम करती हैं।

कोर्ट ने प्रशासन की दलील खारिज की

ट्रम्प प्रशासन ने अदालत में कहा था कि अमेरिका लगातार बढ़ते व्यापार घाटे का सामना कर रहा है। प्रशासन ने दावा किया कि 1.2 ट्रिलियन डॉलर के गुड्स ट्रेड डेफिसिट की वजह से अमेरिकी अर्थव्यवस्था और घरेलू उद्योग खतरे में हैं। इसी आधार पर टैरिफ लगाना जरूरी था। हालांकि अदालत ने इस तर्क को खारिज कर दिया। जजों ने कहा कि व्यापार घाटा अपने आप में राष्ट्रीय आर्थिक आपातकाल साबित नहीं करता। कोर्ट ने माना कि प्रशासन ने कानून की सीमाओं से बाहर जाकर फैसले लिए। अदालत ने कहा कि ट्रेड एक्ट की धारा 122 राष्ट्रपति को सीमित समय के लिए अस्थायी कदम उठाने की इजाजत देती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि राष्ट्रपति पूरी वैश्विक व्यापार व्यवस्था बदल दें।

सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का भी जिक्र

इस मामले की सुनवाई के दौरान अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का भी हवाला दिया गया। अदालत ने कहा कि पहले भी सुप्रीम कोर्ट यह स्पष्ट कर चुका है कि राष्ट्रपति की इमरजेंसी आर्थिक शक्तियां असीमित नहीं हैं। कोर्ट ने माना कि ट्रम्प प्रशासन ने नया टैरिफ आदेश लाकर पुराने फैसलों को दरकिनार करने की कोशिश की। छोटे व्यापारियों और आयातकों ने अदालत में याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि अचानक लगाए गए 10% टैरिफ से कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ। कई कंपनियों की लागत बढ़ गई। सप्लाई चेन टूटने लगी और बाजार में अस्थिरता बढ़ी। कोर्ट ने इन दलीलों को गंभीरता से लिया।

छोटे व्यापारियों ने फैसले का स्वागत किया

अदालत के फैसले के बाद अमेरिकी व्यापार जगत में राहत का माहौल देखा गया। खिलौना निर्माता कंपनी बेसिक फन के सीईओ जे मय फोरमैन ने इसे छोटे व्यापारियों की बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा कि ग्लोबल सप्लाई चेन पर निर्भर कंपनियां लगातार दबाव में थीं। टैरिफ की वजह से उत्पादन लागत बढ़ रही थी और कारोबार करना मुश्किल हो गया था। उन्होंने कहा कि अब कंपनियों को बाजार में स्थिरता मिलेगी। साथ ही निवेश और मैन्युफैक्चरिंग प्लानिंग करना आसान होगा। कई इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस फैसले से अमेरिका की आक्रामक ट्रेड पॉलिसी को बड़ा झटका लगा है।

भारत समेत कई देशों को राहत के संकेत

ट्रम्प प्रशासन हमेशा भारत, चीन और दूसरे देशों के खिलाफ टैरिफ पॉलिसी को लेकर आक्रामक रहा है। ऐसे में अमेरिकी कोर्ट का यह फैसला भारत के लिए राहत भरा माना जा रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर अमेरिका की ग्लोबल टैरिफ नीति कमजोर पड़ती है तो भारतीय निर्यातकों को फायदा मिल सकता है। भारतीय सामानों पर अतिरिक्त शुल्क का खतरा कम होगा। इससे टेक्सटाइल, फार्मा, इंजीनियरिंग और ऑटो सेक्टर को राहत मिल सकती है। व्यापार विशेषज्ञ मानते हैं कि यह फैसला अमेरिका की भविष्य की व्यापार नीति को भी प्रभावित करेगा।

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