अमेरिका ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ रोका: तनाव के बीच कूटनीति तेज, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अचानक होर्मुज स्ट्रेट में चल रहे ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को रोकने का ऐलान कर दिया। यह ऑपरेशन अमेरिका ने जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए शुरू किया था, लेकिन महज दो दिन में इसे सस्पेंड करना पड़ा। रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान की अपील और ईरान के साथ संभावित समझौते की दिशा में बढ़ती बातचीत इस फैसले की मुख्य वजह बनी। ट्रम्प ने संकेत दिया कि फिलहाल सैन्य एस्कॉर्ट की बजाय डिप्लोमैटिक रास्ता अपनाया जाएगा। इस बीच, ईरान ने इसे अपनी रणनीतिक जीत बताया और कहा कि अमेरिका होर्मुज में अपनी मंशा पूरी करने में नाकाम रहा। पूरे घटनाक्रम ने ग्लोबल ट्रेड और एनर्जी सप्लाई को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है।
अमेरिका ने सोमवार को ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ लॉन्च किया था। इसका मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को सुरक्षा देना था। लेकिन ऑपरेशन की रफ्तार बेहद धीमी रही। पहले दिन सिर्फ दो जहाज और दूसरे दिन एक जहाज ही सुरक्षित निकल पाया। जबकि सामान्य हालात में हर दिन करीब 130 जहाज इस रूट से गुजरते हैं। इस कमजोर प्रदर्शन ने ऑपरेशन की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए। इसी बीच बढ़ते हमलों और कूटनीतिक दबाव के चलते अमेरिका ने इसे रोकने का फैसला लिया।
ईरान की सख्ती और जवाबी कार्रवाई
ऑपरेशन शुरू होते ही ईरान ने कड़ा रुख अपनाया। उसने साफ कहा कि उसकी अनुमति के बिना कोई जहाज इस रास्ते से नहीं गुजर सकता। इसके बाद ईरान ने एक साउथ कोरियाई जहाज पर हमला किया और संयुक्त अरब अमीरात में मिसाइल और ड्रोन अटैक किए। हालांकि यूएई ने दावा किया कि उसके डिफेंस सिस्टम ने इन हमलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। ईरान की इस आक्रामक रणनीति ने क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ा दी है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने जहाजों को चेतावनी दी कि वे सिर्फ तय रूट का ही इस्तेमाल करें, वरना सख्त कार्रवाई होगी।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और कूटनीतिक हलचल
अमेरिका ने इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उठाया है। उसने ईरान से हमले रोकने, समुद्र में माइंस न बिछाने और जहाजों से टोल वसूली बंद करने की मांग की है। वहीं भारत ने फुजैराह हमले में अपने नागरिकों के घायल होने पर कड़ी नाराजगी जताई और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की। चीन ने भी अपने कंपनियों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए नया कानून बनाया है, जिससे वह विदेशी प्रतिबंधों का जवाब दे सके। इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक राजनीति को और जटिल बना दिया है।
ईरान का रणनीतिक संदेश
ईरान के रणनीतिक हलकों से भी मजबूत बयान सामने आए हैं। संसद से जुड़े सलाहकार महदी मोहम्मदी ने कहा कि इस संघर्ष में ‘समय’ सबसे बड़ा हथियार है। उनका कहना है कि अमेरिका की तय रणनीति और टाइमलाइन बिगड़ चुकी है। ईरान अब लंबी रणनीति के तहत दबाव बना रहा है। उनके मुताबिक, आने वाले समय में शक्ति संतुलन ईरान के पक्ष में जा सकता है।
तेल बाजार पर असर और आगे की राह
तनाव के बीच अब शांति समझौते की उम्मीद भी दिख रही है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई दोनों में लगभग 1.5% की कमी दर्ज की गई। निवेशकों को उम्मीद है कि अगर सप्लाई सामान्य होती है, तो बाजार स्थिर हो सकता है। हालांकि ट्रम्प ने यह भी स्पष्ट किया है कि अमेरिकी नौसेना ईरानी बंदरगाहों की निगरानी और नाकेबंदी जारी रखेगी। कुल मिलाकर, हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं, जहां हर कदम का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर पड़ सकता है।
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