ट्रम्प ने मांगी 8.3 लाख करोड़ रुपये की युद्ध फंडिंग: 30 जून से होगी तकनीकी वार्ता, रक्षा संसाधनों पर बढ़ा अतिरिक्त दबाव

1 घंटा पहले
30 जून से होगी तकनीकी वार्ता, रक्षा संसाधनों पर बढ़ा अतिरिक्त दबाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने ईरान के साथ हालिया सैन्य संघर्ष और उससे जुड़े रक्षा खर्चों की भरपाई के लिए अमेरिकी संसद से 87.6 अरब डॉलर (करीब 8.3 लाख करोड़ रुपये) की अतिरिक्त फंडिंग मंजूर करने का अनुरोध किया है। व्हाइट हाउस का कहना है कि यह राशि पहले से स्वीकृत रक्षा बजट से अलग होगी। इसका उपयोग सैन्य अभियानों, हथियारों के भंडार को दोबारा मजबूत करने, सेना की तैयारियों को बढ़ाने तथा गोपनीय रक्षा परियोजनाओं के संचालन में किया जाएगा।

प्रशासन के मुताबिक यह अतिरिक्त राशि पिछले वर्ष स्वीकृत लगभग एक ट्रिलियन डॉलर के रक्षा बजट और आगामी वित्तीय वर्ष के लिए प्रस्तावित 1.5 ट्रिलियन डॉलर के बजट से अलग है। सरकार का तर्क है कि हाल के सैन्य अभियानों के कारण रक्षा संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है। इसकी भरपाई के लिए नए वित्तीय प्रावधान की आवश्यकता है। हालांकि इस मांग को लेकर अमेरिकी संसद में तीखी बहस छिड़ गई है। विपक्ष के साथ-साथ सत्तारूढ़ दल के कुछ सांसद भी इसके विरोध में उतर आए हैं।

संसद में बढ़ा विरोध

ईरान को लेकर ट्रम्प प्रशासन की नीति पर संसद के भीतर असहमति लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। अमेरिकी सीनेट ने एक प्रस्ताव पारित कर राष्ट्रपति से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की। इससे पहले प्रतिनिधि सभा (लोअर हाउस) भी इसी प्रकार का प्रस्ताव पारित कर चुकी है। विशेष बात यह रही कि इस मुद्दे पर कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने भी डेमोक्रेट सांसदों का समर्थन किया। इससे सरकार पर राजनीतिक दबाव और बढ़ गया है। हालांकि राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोशल मीडिया के माध्यम से दावा किया कि सीनेट का रुख बाद में बदल गया। मतदान के दौरान प्रस्ताव के समर्थन में मतों की संख्या बढ़ी। उन्होंने कुछ सांसदों का नाम लेकर उन्हें धन्यवाद भी दिया। उन्होंने कहा कि यह फैसला ईरान के लिए एक स्पष्ट संदेश है।

सैनिकों ने उठाए गंभीर सवाल

इस बीच ईरान संघर्ष में शामिल अमेरिकी सैनिकों और उनके परिवारों ने भी सेना और पेंटागन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। आरोप लगाया गया है कि युद्ध के दौरान सैनिकों को हुई चोटों और नुकसान को वास्तविकता से कम करके पेश किया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ सैनिकों को सिर में गंभीर चोट, सुनने और देखने की क्षमता प्रभावित होने और फेफड़ों को नुकसान जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। लेकिन उनकी स्थिति को आधिकारिक तौर पर कम गंभीर बताया गया। रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि इस सैन्य संघर्ष में कम से कम 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई है। हालांकि अमेरिकी सेना ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा है कि चोटों और हताहतों से जुड़ी जानकारी को पूरी पारदर्शिता के साथ दर्ज किया गया है।

खाड़ी देशों से समर्थन जुटाने में जुटा अमेरिका

उधर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो इन दिनों कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन के दौरे पर हैं। उनके दौरे का उद्देश्य ईरान के साथ हुए समझौते को लेकर खाड़ी देशों का समर्थन हासिल करना और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करना बताया जा रहा है। बहरीन में बातचीत के दौरान रुबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिका, ईरान के साथ किसी भी वार्ता में अपने खाड़ी सहयोगी देशों के हितों की अनदेखी नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के निरीक्षकों को जल्द से जल्द ईरान के परमाणु ठिकानों तक पहुंच मिलनी चाहिए। साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि अमेरिका और ईरान के अधिकारियों के बीच अगला तकनीकी वार्ता दौर 30 जून से शुरू होगा। इसमें विभिन्न मुद्दों पर विशेषज्ञ स्तर की चर्चाएं आगे बढ़ाई जाएंगी। ईरान को लेकर अमेरिका के भीतर राजनीतिक मतभेद, सैन्य खर्च पर बढ़ती बहस और क्षेत्रीय कूटनीति की गतिविधियां यह संकेत दे रही हैं कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा अमेरिकी राजनीति और विदेश नीति के केंद्र में बना रह सकता है।

नव्य जागरण

पूरी खबर पढ़ें ऐप पर

ऐप डाउनलोड करने के लिए QR कोड
ऐप डाउनलोड करने के लिए QR स्कैन करेंGET IT ON Google Play

अधूरा नहीं! पूरी खबर पढ़ें नव्य जागरण ऐप पर

ताजा खबरें, लोकल अपडेट और ब्रेकिंग अलर्ट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।