ट्रंप की सख्त इमिग्रेशन पॉलिसी पर बंटा अमेरिका: सर्वे में खुली नाराजगी और समर्थन की तस्वीर, प्रवासियों पर कार्रवाई को लोगों ने बताया ‘पर्सनल एजेंडा’

07 मई 2026
सर्वे में खुली नाराजगी और समर्थन की तस्वीर, प्रवासियों पर कार्रवाई को लोगों ने बताया ‘पर्सनल एजेंडा’

अमेरिका में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इमिग्रेशन पॉलिसी एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का बड़ा मुद्दा बन गई है। प्रवासियों के खिलाफ लगातार हो रही कार्रवाई, कार्यस्थलों पर छापेमारी और डिपोर्टेशन अभियान को लेकर अमेरिकी समाज दो हिस्सों में बंटता दिखाई दे रहा है। एक हालिया मीडिया सर्वे में सामने आया है कि बड़ी संख्या में अमेरिकी नागरिक ट्रंप की इन नीतियों को सरकारी रणनीति नहीं, बल्कि उनका निजी एजेंडा मानते हैं।

करीब 2500 लोगों पर किए गए इस सर्वे में लोगों ने साफ कहा कि ट्रंप आव्रजन नीति को अपनी राजनीतिक सोच और “अमेरिका फर्स्ट” एजेंडे के हिसाब से चला रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ उनके समर्थकों का मानना है कि देश की सुरक्षा और रोजगार बचाने के लिए सख्त कदम जरूरी हैं। रिपोर्ट के सामने आने के बाद अमेरिका में इमिग्रेशन को लेकर नई राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

सर्वे में क्या सामने आया, लोगों ने क्यों जताई चिंता

मीडिया सर्वे के अनुसार बड़ी संख्या में अमेरिकियों को लगता है कि ट्रंप प्रशासन की सख्ती अब केवल अवैध प्रवासियों तक सीमित नहीं रह गई है। इसका असर सामान्य कामगारों, कंपनियों और छोटे कारोबारों पर भी दिखाई देने लगा है। सर्वे में शामिल लोगों ने कहा कि कार्यस्थलों पर हो रही लगातार रेड और गिरफ्तारी की कार्रवाई से भय का माहौल बन गया है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि लगभग एक-तिहाई अमेरिकियों ने माना कि ट्रंप की नीतियों का असर उनके किसी परिचित, दोस्त, सहकर्मी या परिवार से जुड़े व्यक्ति पर पड़ा है। कई लोगों ने कहा कि छापेमारी के डर से लोग नौकरी छोड़ रहे हैं। कुछ इलाकों में कामगारों की कमी भी देखने को मिल रही है। आलोचकों का कहना है कि यह नीति केवल राजनीतिक संदेश देने के लिए इस्तेमाल की जा रही है। इससे देश की अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ रहा है। खासकर कृषि, निर्माण और होटल इंडस्ट्री जैसे सेक्टर प्रभावित हो रहे हैं, जहां बड़ी संख्या में प्रवासी काम करते हैं।

उद्योगों पर असर

अमेरिका के कई कारोबारी संगठनों ने भी ट्रंप प्रशासन की सख्त कार्रवाई पर चिंता जताई है। उद्योग जगत का कहना है कि अचानक की जाने वाली छापेमारी से कंपनियों का काम प्रभावित हो रहा है। कई फैक्ट्रियों और निर्माण परियोजनाओं में श्रमिकों की कमी देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था लंबे समय से प्रवासी श्रमिकों पर निर्भर रही है। ऐसे में यदि बड़े स्तर पर कार्रवाई जारी रहती है, तो उत्पादन और सेवाओं पर असर पड़ सकता है। कुछ कंपनियों ने यह भी कहा कि डर के माहौल में कर्मचारी खुलकर काम नहीं कर पा रहे हैं। आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक, इमिग्रेशन नीति का असर केवल राजनीति तक सीमित नहीं है। इसका सीधा असर बाजार, रोजगार और सप्लाई चेन पर भी पड़ रहा है। यही वजह है कि अब कारोबारी संगठन भी इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखने लगे हैं।

समर्थकों का तर्क- “अमेरिका फर्स्ट” पर काम कर रहे ट्रंप

हालांकि ट्रंप समर्थकों की राय इससे बिल्कुल अलग है। रिपब्लिकन रणनीतिकारों और दक्षिणपंथी संगठनों का कहना है कि ट्रंप वही कर रहे हैं, जिसका वादा उन्होंने चुनाव के दौरान किया था। उनका मानना है कि अमेरिका में अवैध प्रवास पर रोक लगाना जरूरी है। समर्थकों के मुताबिक, ट्रंप की नीति से अमेरिकी नागरिकों के लिए नौकरियां सुरक्षित होंगी और सीमा सुरक्षा मजबूत होगी। कई लोगों ने कहा कि देश में कानून का पालन सबसे पहले होना चाहिए। उनका तर्क है कि अवैध तरीके से रहने वालों के खिलाफ कार्रवाई को गलत नहीं कहा जा सकता। रिपब्लिकन खेमे का मानना है कि ट्रंप की सख्ती उनके वोट बैंक को और मजबूत कर रही है। खासकर वे मतदाता जो लंबे समय से सीमा सुरक्षा और इमिग्रेशन कंट्रोल की मांग कर रहे थे, वे ट्रंप के फैसलों से संतुष्ट दिखाई दे रहे हैं।

चुनावी माहौल में इमिग्रेशन बना बड़ा मुद्दा

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनावी माहौल के बीच इमिग्रेशन का मुद्दा फिर केंद्र में आ गया है। ट्रंप लगातार सीमा सुरक्षा और अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई को अपने चुनावी एजेंडे का अहम हिस्सा बना रहे हैं। दूसरी ओर डेमोक्रेटिक खेमे ने इन नीतियों को अमानवीय और विभाजनकारी बताया है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि आने वाले महीनों में इमिग्रेशन मुद्दा अमेरिकी राजनीति में सबसे बड़ा चुनावी हथियार बन सकता है। एक तरफ सुरक्षा और राष्ट्रवाद की राजनीति होगी, तो दूसरी तरफ मानवाधिकार और आर्थिक संतुलन की बहस।

नव्य जागरण

पूरी खबर पढ़ें ऐप पर

ऐप डाउनलोड करने के लिए QR कोड
ऐप डाउनलोड करने के लिए QR स्कैन करेंGET IT ON Google Play

अधूरा नहीं! पूरी खबर पढ़ें नव्य जागरण ऐप पर

ताजा खबरें, लोकल अपडेट और ब्रेकिंग अलर्ट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।