अमेरिका-ईरान युद्ध से हीलियम संकट: चिप उद्योग पर पड़ सकता है विपरीत असर, अगले पांच सालों में 20 अरब डॉलर के नुकसान का अनुमान

अमेरिका–इस्राइल और ईरान के बीच जारी युद्ध ने वैश्विक हीलियम सप्लाई को गहरा झटका दिया है। कतर में उत्पादन ठप होने और होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग बाधित होने से दुनिया की करीब एक-तिहाई हीलियम आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर एमआरआई स्कैन, सेमीकंडक्टर निर्माण और अन्य हाई-टेक उद्योगों पर पड़ने की आशंका है।
यूएस जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार 2025 में कतर ने लगभग 63 मिलियन क्यूबिक मीटर हीलियम का उत्पादन किया, जो वैश्विक उत्पादन करीब 190 मिलियन क्यूबिक मीटर का लगभग एक-तिहाई है। हालांकि अन्य खाड़ी देश बड़े उत्पादक नहीं हैं, लेकिन सप्लाई चेन के लिए यह क्षेत्र बेहद अहम है क्योंकि कतर से होने वाला निर्यात पूरी तरह समुद्री मार्गों पर निर्भर है।स्थिति तब और बिगड़ गई जब 2 मार्च को ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के वरिष्ठ सलाहकार इब्राहिम जबारी ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद घोषित करने की चेतावनी दी। इसके बाद इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही काफी घट गई। ईरान ने भले पूर्ण बंदी से इनकार किया, लेकिन यह स्पष्ट किया कि अब हर जहाज को उसकी अनुमति लेनी होगी। नतीजतन, केवल कुछ भारतीय, पाकिस्तानी और चीनी जहाज ही इस मार्ग से गुजर पा रहे हैं।हीलियम का उत्पादन एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) के साथ सह-उत्पाद के रूप में होता है। इसलिए एलएनजी उत्पादन में किसी भी बाधा का असर सीधे हीलियम सप्लाई पर पड़ता है।कतरएनर्जी ने 2 मार्च को घोषणा की कि ईरानी हमलों के बाद रास लफान और मेसाईद स्थित संयंत्रों में एलएनजी उत्पादन रोक दिया गया है, हालांकि ईरान ने इन हमलों से इनकार किया। बाद में साउथ पार्स गैस फील्ड से जुड़ी सुविधाओं पर हमले की खबरें आईं और रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी में मिसाइल हमले हुए, जहां दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत एलएनजी प्रोसेसिंग होती है।
एनर्जी निर्यात क्षमता 17 प्रतिशत नष्ट
कतरएनर्जी के सीईओ साद शेरिदा अल-काबी ने रॉयटर्स को बताया कि इन हमलों से तीन बड़े आगजनी की घटनाएं हुईं और कतर की एलएनजी निर्यात क्षमता का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा नष्ट हो गया। इससे अगले पांच वर्षों में करीब 20 अरब डॉलर का नुकसान होने का अनुमान है। मरम्मत के चलते हर साल 12.8 मिलियन टन एलएनजी उत्पादन तीन से पांच साल तक प्रभावित रहेगा। इसी वजह से कतरएनर्जी ने तरल हीलियम निर्यात में 14 प्रतिशत कटौती की घोषणा की है।
परिवहन में बाधा और तकनीकी चुनौती
हीलियम को गैस रूप में ले जाना मुश्किल होता है, इसलिए इसे बेहद कम तापमान पर तरल रूप में क्रायोजेनिक कंटेनरों में रखा जाता है। लेकिन इसे 45 दिनों के भीतर उपयोग या परिवहन करना जरूरी होता है, क्योंकि धीरे-धीरे तापमान बढ़ने पर यह फिर गैस बनकर उड़ जाता है।कतर से लगभग पूरा हीलियम निर्यात होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए समुद्र के रास्ते होता है और इसके लिए कोई वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध नहीं है। मौजूदा तनाव के कारण यह पूरी सप्लाई चेन बाधित हो गई है।
एशियाई देश सबसे ज्यादा प्रभावित
दक्षिण कोरिया, जापान, ताइवान और चीन कतर से हीलियम के सबसे बड़े उपभोक्ता हैं। हालांकि अधिकतर सप्लाई लंबी अवधि के अनुबंधों के तहत होती है, जिससे कीमतों का असर तुरंत नहीं दिखता, लेकिन आपूर्ति में कमी तय मानी जा रही है।मार्केट रिसर्च फर्म इंडेक्सबॉक्स के सीईओ अलेक्सांद्र रोमानेंको ने रॉयटर्स को बताया कि 30 दिन की बाधा से हीलियम की कीमतें 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं, जबकि 60 से 90 दिन की बाधा कीमतों को 25 से 50 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है। दक्षिण कोरिया के सांसद किम यंग-बे ने भी चेतावनी दी है कि यह संकट सेमीकंडक्टर निर्माण सामग्री की सप्लाई को प्रभावित कर सकता है।
क्यों इतना महत्वपूर्ण है हीलियम
हीलियम एकमात्र ऐसा तत्व है जिसे लगभग शून्य तापमान (0 केल्विन के करीब) तक ठंडा किया जा सकता है। यह रासायनिक रूप से निष्क्रिय होता है, इसलिए यह किसी अन्य पदार्थ के साथ प्रतिक्रिया नहीं करता। यही कारण है कि यह सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट्स को ठंडा रखने और हाई-टेक उपकरणों में उपयोग के लिए आदर्श है।
एमआरआई और चिप उद्योग पर गहराएगा संकट
एमआरआई मशीनों में सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट्स का इस्तेमाल होता है, जिन्हें अत्यधिक ठंडा रखने के लिए हीलियम जरूरी है। इससे शरीर के अंदर की स्पष्ट इमेजिंग संभव होती है। जर्मन कंपनी सीमेंस के अनुसार, दुनिया में इस्तेमाल होने वाले हीलियम का लगभग एक-चौथाई हिस्सा ऐसे मैग्नेट्स को ठंडा रखने में उपयोग होता है।इसके अलावा, हीलियम सेमीकंडक्टर चिप निर्माण में भी अहम भूमिका निभाता है, जो स्मार्टफोन, कार, डेटा सेंटर और सैन्य सिस्टम तक के लिए जरूरी हैं।हीलियम का कोई कृत्रिम विकल्प नहीं है, इसलिए इसकी कमी तकनीकी प्रगति को प्रभावित कर सकती है। हालांकि यह पहली बार नहीं है, 2006 के बाद से यह पांचवां बड़ा वैश्विक हीलियम संकट है।
कुछ वैकल्पिक तकनीकों पर काम हुआ है, जैसे हीलियम-फ्री एमआरआई मशीनें और हीलियम रीसाइक्लिंग सिस्टम लेकिन अभी दुनिया की अधिकांश मशीनें हीलियम पर निर्भर हैं।
अन्य उत्पादक और वैश्विक प्रतिक्रिया
अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा हीलियम उत्पादक है, जो 81 मिलियन क्यूबिक मीटर (40 प्रतिशत से अधिक) उत्पादन करता है। एक्सॉन मोबिल कतर के बाहर सबसे बड़ा उत्पादक है, जबकि कनाडा की नॉर्थ अमेरिकन हीलियम और अन्य कंपनियों की मांग बढ़ सकती है।इसके बावजूद, उत्तरी अमेरिका भी खाड़ी क्षेत्र की सप्लाई पर निर्भर है। अमेरिका में हीलियम वितरक एयरगैस ने फोर्स मेज्योर घोषित करते हुए अपनी सप्लाई आधी कर दी है। इसकी मूल कंपनी एयर लिक्विड ने भी सप्लाई चेन को अन्य क्षेत्रों की ओर मोड़ने की योजना बनाई है।
समय बीतने के साथ नए-नए संकट खड़े करेगा खाड़ी युद्ध
समय बीतने के साथ खड़ी युद्ध ने ऊर्जा और समुद्री आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित करते हुए एक ऐसे संसाधन को संकट में डाल दिया है, जो आधुनिक चिकित्सा और तकनीक की रीढ़ है। यदि स्थिति लंबी खिंचती है, तो इसका असर अस्पतालों से लेकर वैश्विक चिप उद्योग तक व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है।
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