चीन में भ्रष्टाचार पर सबसे बड़ी कार्रवाई: दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को मौत की सजा, अरबों की संपत्ति जब्त

चीन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के तहत अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई सामने आई है। चीन की सैन्य अदालत ने देश के दो पूर्व रक्षा मंत्रियों ली शांगफू और वेई फेंगहे को भ्रष्टाचार के मामले में मौत की सजा सुनाई है। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, दोनों नेताओं को पहले दो साल तक जेल में रखा जाएगा। अगर इस दौरान उनका व्यवहार ठीक रहा और उन्होंने कोई नया अपराध नहीं किया, तो उनकी सजा को आजीवन कारावास में बदला जा सकता है। अदालत ने दोनों की पूरी संपत्ति जब्त करने का भी आदेश दिया है।
यह फैसला चीन की राजनीति और सेना में बड़ा संदेश माना जा रहा है। बीजिंग ने साफ कर दिया है कि सेना और रक्षा तंत्र में भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पिछले कुछ वर्षों में चीन की सेना के कई बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को मौत की सजा दिया जाना बेहद असाधारण कदम माना जा रहा है।
ली शांगफू पर रिश्वत और पद के दुरुपयोग के आरोप
पूर्व रक्षा मंत्री ली शांगफू को पिछले साल अचानक उनके पद से हटा दिया गया था। वह कई हफ्तों तक सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए थे। इसके बाद चीन और दुनिया भर में तरह-तरह की अटकलें लगने लगी थीं। अब चीनी अधिकारियों ने पहली बार आधिकारिक रूप से स्वीकार किया है कि उनके खिलाफ गंभीर भ्रष्टाचार की जांच चल रही थी। चीन के सरकारी चैनल सीसीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, ली शांगफू ने पार्टी अनुशासन और कानून का गंभीर उल्लंघन किया। उन पर बड़े स्तर पर रिश्वत लेने, दूसरों को फायदा पहुंचाने और अपने पद का गलत इस्तेमाल करने के आरोप लगाए गए। जांच एजेंसियों का कहना है कि उनकी गतिविधियों से चीन की सैन्य छवि और हथियार विकास प्रणाली को भारी नुकसान पहुंचा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ली शांगफू रक्षा उपकरणों की खरीद और सैन्य तकनीक से जुड़े कई बड़े फैसलों में शामिल थे। जांच में यह भी सामने आया कि रक्षा सौदों में करोड़ों डॉलर की रिश्वत ली गई थी। इसके बाद उन्हें कम्युनिस्ट पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।
वेई फेंगहे पर भी गिरे भ्रष्टाचार के आरोप
पूर्व रक्षा मंत्री वेई फेंगहे पर भी रिश्वत लेने और सैन्य फैसलों में निजी फायदा पहुंचाने के गंभीर आरोप लगे। चीन की सैन्य अदालत ने उन्हें भ्रष्टाचार का दोषी माना है। जांच एजेंसियों का कहना है कि वेई फेंगहे ने कई रक्षा सौदों और सैन्य नियुक्तियों में पैसे लेकर फैसले किए। वेई फेंगहे चीन की सेना के बेहद ताकतवर अधिकारियों में गिने जाते थे। वह चीन की रॉकेट फोर्स के कमांडर भी रह चुके हैं। यह यूनिट चीन की मिसाइल और परमाणु हथियार प्रणाली को संभालती है। ऐसे में उनके खिलाफ कार्रवाई को बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। चीन की सरकार का कहना है कि सेना के भीतर भ्रष्टाचार राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा था। इसी वजह से बड़े स्तर पर सफाई अभियान चलाया गया।
रॉकेट फोर्स बनी जांच का सबसे बड़ा केंद्र
रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन में चल रही भ्रष्टाचार जांच का सबसे बड़ा फोकस पीएलए रॉकेट फोर्स और सेना के हथियार खरीद विभाग पर है। पीएलए रॉकेट फोर्स चीन की वह विशेष यूनिट है जो परमाणु मिसाइलों और लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को संभालती है। इसे चीन की सैन्य ताकत का सबसे अहम हिस्सा माना जाता है। जांच एजेंसियों को शक है कि हथियार खरीद, सैन्य उपकरणों की सप्लाई और रक्षा ठेकों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ। कई अधिकारियों ने कथित तौर पर रिश्वत लेकर ठेके दिए। इससे चीन की सैन्य तैयारियों और रक्षा क्षमता पर भी असर पड़ा।
शी जिनपिंग का भ्रष्टाचार विरोधी अभियान तेज
इस पूरे मामले की जांच सेंट्रल मिलेट्री कमीशन ने की। यह चीन की सर्वोच्च सैन्य संस्था है और सेना पर पूरा नियंत्रण रखती है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग खुद इसके चेयरमैन हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह कार्रवाई सिर्फ भ्रष्टाचार के खिलाफ नहीं बल्कि सेना पर राजनीतिक नियंत्रण मजबूत करने की रणनीति भी है। पिछले कुछ वर्षों में शी जिनपिंग ने सेना, सरकार और कम्युनिस्ट पार्टी के भीतर बड़े स्तर पर सफाई अभियान चलाया है। अब दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को मौत की सजा देकर चीन ने दुनिया को सख्त संदेश दिया है कि सत्ता और सेना में भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं छोड़ी जाएगी।
अधूरा नहीं! पूरी खबर पढ़ें नव्य जागरण ऐप पर
ताजा खबरें, लोकल अपडेट और ब्रेकिंग अलर्ट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।










