डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी : यूरोपीय संघ की कारों-ट्रकों पर 25% टैरिफ, अमेरिका में उत्पादन पर ही मिलेगी राहत

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा आर्थिक कदम उठाया है। उन्होंने यूरोपीय संघ से आयात होने वाली कारों और ट्रकों पर 25% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। यह फैसला अगले सप्ताह से लागू हो सकता है। ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ व्यापार समझौते का पालन नहीं कर रहा है। इसी वजह से यह सख्त कदम उठाया जा रहा है। इस फैसले से ग्लोबल ट्रेड में हलचल मचने की संभावना है। खासकर ऑटो सेक्टर पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
ट्रंप का यह कदम उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का हिस्सा है। इसका मकसद विदेशी कंपनियों को अमेरिका में निवेश करने के लिए मजबूर करना है। उन्होंने साफ कहा कि अगर यूरोपीय कंपनियां अमेरिका में ही कार और ट्रक बनाती हैं, तो उन पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा। इससे साफ है कि अमेरिका अपनी इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए सख्त रुख अपना रहा है।
अमेरिका में उत्पादन पर मिलेगी पूरी छूट
ट्रंप ने यूरोपीय वाहन कंपनियों को एक विकल्प भी दिया है। उन्होंने कहा कि अगर कंपनियां अमेरिका में फैक्ट्री लगाती हैं, तो उन्हें टैरिफ से पूरी छूट मिलेगी।
इसका मतलब है कि कंपनियों को या तो टैरिफ देना होगा या अमेरिका में निवेश करना होगा। यह रणनीति सीधे तौर पर विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए बनाई गई है।
100 बिलियन डॉलर के नए प्लांट्स का दावा
ट्रंप ने अपने बयान में अमेरिकी ऑटो सेक्टर की ग्रोथ का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस समय कई नए प्लांट निर्माणाधीन हैं। इन प्लांट्स में करीब 100 बिलियन डॉलर यानी लगभग 10 लाख करोड़ रुपये का निवेश हो रहा है। ट्रंप के मुताबिक, यह ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के इतिहास का सबसे बड़ा निवेश है। इन प्लांट्स के शुरू होने से अमेरिकी रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।
यूरोप के लिए बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से यूरोपीय देशों को बड़ा झटका लग सकता है। जर्मनी जैसे देशों की अर्थव्यवस्था काफी हद तक कार निर्यात पर निर्भर है। अगर अमेरिका में टैरिफ बढ़ता है, तो यूरोपीय कारें महंगी हो जाएंगी। इससे उनकी बिक्री पर असर पड़ेगा।
वैश्विक बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा और तनाव
इस कदम से वैश्विक ऑटोमोबाइल बाजार में प्रतिस्पर्धा और बढ़ेगी। अमेरिका इस टैरिफ को एक दबाव के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। इसका उद्देश्य यूरोपीय बाजार को अमेरिकी उत्पादों के लिए खोलना भी है। अगर यूरोपीय संघ ने जवाबी कार्रवाई की, तो व्यापार युद्ध की स्थिति भी बन सकती है।
अमेरिका में बढ़ेंगी कारों की कीमतें
टैरिफ बढ़ने का सीधा असर अमेरिकी बाजार पर भी पड़ेगा। यूरोप से आने वाली कारें महंगी हो जाएंगी। इसका बोझ अंततः ग्राहकों पर ही पड़ेगा। हालांकि, इससे स्थानीय कंपनियों को फायदा मिल सकता है।
आने वाले समय में बढ़ सकती है व्यापारिक टकराव
ट्रंप के इस फैसले से अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच तनाव बढ़ सकता है। दोनों पक्षों के बीच पहले से ही व्यापार को लेकर मतभेद रहे हैं। अब यह फैसला उस तनाव को और बढ़ा सकता है।
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