स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में चरम पर तनाव: ईरान ने तीन व्यापारिक जहाजों को बनाया निशाना, भारत आने वाले जहाज पर भी की गोलीबारी

दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में एक बार फिर तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। बुधवार को ईरान की सेना ने अंतरराष्ट्रीय जलसीमा से गुजर रहे तीन व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया। इनमें एक जहाज भारत की ओर आ रहा था। गोलीबारी और जहाजों को कब्जे में लेने की इस कार्रवाई ने पूरी दुनिया को चिंतित कर दिया है। यह इलाका वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा केंद्र है। ऐसे में यहां अस्थिरता का असर सीधे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
इस ऑपरेशन को ईरान की अर्धसैनिक इकाई रिवोल्यूशनरी गार्ड ने अंजाम दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सबसे पहले एक कंटेनर जहाज पर फायरिंग की गई। इसके बाद दूसरे जहाज को निशाना बनाया गया। ईरानी मीडिया का दावा है कि इन जहाजों ने चेतावनी का पालन नहीं किया था। इसलिए यह कार्रवाई “कानूनी” बताई जा रही है। जिन जहाजों को कब्जे में लिया गया है, उनकी पहचान एमएससी फ्रांसिस्का और एपामिनोड्स के रूप में हुई है। इसके अलावा तीसरे जहाज यूफोरिया पर भी हमला किया गया जो ईरानी तट के पास फंसा बताया जा रहा है। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सीजफायर के बावजूद नहीं थमा तनाव
यह घटना ऐसे समय हुई है जब डोनाल्ड ट्रम्प ने संघर्षविराम को आगे बढ़ाने की घोषणा की थी। उनका मानना था कि इससे बातचीत का रास्ता खुलेगा। लेकिन जमीनी हालात कुछ और ही संकेत दे रहे हैं। अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी जारी रखी है। इसी वजह से ईरान नाराज है। ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक यह घेराबंदी खत्म नहीं होती, तब तक वह किसी भी शांति वार्ता में शामिल नहीं होगा। ऐसे में समुद्र में टकराव और बढ़ने की आशंका है। कूटनीतिक प्रयास फिलहाल कमजोर पड़ते दिख रहे हैं।
वैश्विक बाजार पर असर
होर्मुज में बढ़ते तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर दिख रहा है। कच्चे तेल की कीमत तेजी से बढ़ रही है। ब्रेंट क्रूड 98 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है। यह हाल के महीनों में बड़ी छलांग मानी जा रही है। तेल महंगा होने का असर आम लोगों तक पहुंच रहा है। पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने का खतरा है। ट्रांसपोर्ट महंगा हो रहा है। इससे खाने-पीने की चीजें भी महंगी हो सकती हैं। अगर हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे, तो वैश्विक मंदी का खतरा बढ़ सकता है।
अन्य देशों की चिंता और कूटनीतिक गतिरोध
इस पूरे घटनाक्रम पर कई देशों की नजर है। पाकिस्तान शांति वार्ता की कोशिश कर रहा है। इस्लामाबाद अगली बातचीत की मेजबानी करना चाहता है। लेकिन ईरान की ओर से अब तक कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि वे फिलहाल किसी वार्ता में शामिल नहीं होंगे। इससे साफ है कि कूटनीति लगभग ठप पड़ चुकी है। क्षेत्र में तनाव कम होने के बजाय बढ़ता जा रहा है।
युद्ध का बढ़ता दायरा और भारी नुकसान
यह संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था जब अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर हवाई हमले किए थे। तब से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। अब तक हजारों लोग मारे जा चुके हैं। ईरान, लेबनान और अन्य क्षेत्रों में भारी नुकसान हुआ है। ईरान के तेवर फिलहाल नरम नहीं दिख रहे हैं। वहां रैलियां हो रही हैं। मिसाइल ताकत का प्रदर्शन किया जा रहा है। दूसरी ओर लेबनान में भी संघर्ष जारी है। भले ही सीजफायर लागू हो, लेकिन जमीनी स्तर पर झड़पें जारी हैं।
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