होर्मुज खोलने को तैयार ईरान: अमेरिका से की नाकेबंदी हटाने की अपील, परमाणु मुद्दे पर अड़ा वॉशिंगटन

मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच ईरान ने बड़ा संकेत दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान पहली बार होर्मुज को खोलने के लिए तैयार हुआ है। इसके साथ ही उसने संयुक्त राष्ट्र से समुद्री नाकेबंदी हटाने की अपील की है। यह जानकारी अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आई है। ईरान ने बातचीत के लिए नया प्रस्ताव भी दिया है। लेकिन अमेरिकी पक्ष इस पर फिलहाल सहमत नहीं दिख रहा है। दोनों देशों के बीच मुख्य विवाद परमाणु कार्यक्रम को लेकर अटका हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने अमेरिका के सामने तीन अहम शर्तें रखी हैं। पहली शर्त है कि इजराइल और अमेरिका के साथ चल रहा संघर्ष खत्म हो। साथ ही आगे किसी तरह का हमला न करने की गारंटी दी जाए। दूसरी शर्त के तहत अमेरिका अपनी समुद्री नाकेबंदी हटाए। इसके बाद होर्मुज को खोला जाए, ताकि जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो सके। तीसरी और अंतिम शर्त में कहा गया है कि सबसे आखिर में परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन जैसे विवादित मुद्दों पर बातचीत हो। ईरान का कहना है कि पहले तनाव कम किया जाए। फिर जटिल मुद्दों पर बात हो। यह एक स्टेप-बाय-स्टेप अप्रोच है।
अमेरिका क्यों नहीं मान रहा प्रस्ताव
अमेरिकी प्रशासन इस प्रस्ताव को लेकर सतर्क है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीति के अनुसार पहले परमाणु मुद्दे का समाधान जरूरी माना जा रहा है। अमेरिकी पक्ष का तर्क है कि अगर बिना परमाणु कार्यक्रम सुलझाए होर्मुज खोला गया, तो ईरान को रणनीतिक बढ़त मिल सकती है। इसी वजह से अमेरिका ने ईरान के प्रस्ताव को दो बार खारिज कर दिया है। दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी साफ नजर आ रही है।
परमाणु कार्यक्रम बना सबसे बड़ा विवाद
इस पूरे विवाद की जड़ ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। अमेरिका चाहता है कि ईरान कम से कम 20 साल तक एनरिच्ड यूरेनियम पूरी तरह बंद करे। साथ ही अपने पास मौजूद बड़ी मात्रा में एनरिच्ड यूरेनियम सौंप दे। वहीं ईरान इसे अनुचित मांग मानता है। उसने पहले एक अलग प्रस्ताव दिया था। उसमें पांच साल तक एनरिच रोकने और उसके बाद सीमित स्तर पर नागरिक उपयोग के लिए अनुमति देने की बात कही गई थी। लेकिन यह प्रस्ताव भी अमेरिका को मंजूर नहीं हुआ। इसी कारण बातचीत आगे नहीं बढ़ पा रही है।
कूटनीतिक हल की कोशिशें जारी
इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची लगातार सक्रिय हैं। उन्होंने हाल के दिनों में कई देशों का दौरा किया है। पाकिस्तान के जरिए भी बातचीत की कोशिश की जा रही है। इसके अलावा उन्होंने पुतिन से भी मुलाकात की। रूस ने इस पूरे मामले में अमेरिका और इजराइल की आलोचना की है। वहीं फ्रांस ने कहा है कि समाधान के लिए ईरान को अपने रुख में नरमी लानी होगी।
ईरान की स्थिति हो रही कमजोर
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के पास विकल्प सीमित होते जा रहे हैं। क्षेत्रीय स्तर पर भी उसके रिश्ते तनावपूर्ण हैं। हाल के हमलों के कारण खाड़ी देशों के साथ भरोसा कमजोर हुआ है। कई पड़ोसी देश बातचीत से दूरी बनाए हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के अंदर भी इस बात को लेकर चिंता बढ़ रही है कि बातचीत में लगातार रुकावट आ रही है। इससे देश की रणनीतिक स्थिति प्रभावित हो सकती है।
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