अमेरिका-ईरान समझौते की ओर बढ़े: होर्मुज खोलने पर बनी सहमति, ट्रम्प और खामेनेई की अंतिम मंजूरी बाकी

59 मिनट पहले
होर्मुज खोलने पर बनी सहमति, ट्रम्प और खामेनेई की अंतिम मंजूरी बाकी

पश्चिम एशिया में कई दिनों से जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच अमेरिका और ईरान युद्ध को धीरे-धीरे समाप्त करने तथा होर्मुज स्ट्रेट से ईरान की नाकाबंदी हटाने को लेकर सैद्धांतिक सहमति के करीब पहुंच गए हैं। एक सीनियर अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक दोनों देशों के बीच प्रारंभिक स्तर पर समझौते की रूपरेखा तैयार हो चुकी है, हालांकि अब भी कई संवेदनशील मुद्दों पर अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है। इस संभावित समझौते को वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में शामिल है।

अमेरिकी अधिकारी के अनुसार प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने पर सहमत हो सकता है, जबकि बदले में वह अपने एनरिच्ड यूरेनियम भंडार को खत्म करने की प्रक्रिया पर आगे बढ़ेगा। हालांकि इस प्रक्रिया का स्वरूप क्या होगा और इसकी निगरानी किस तरह की जाएगी, इस पर अभी बातचीत जारी है। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि समझौते पर अब तक हस्ताक्षर नहीं हुए हैं और इसे अंतिम मंजूरी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प तथा ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई से मिलना बाकी है। माना जा रहा है कि इस प्रक्रिया में कुछ दिन और लग सकते हैं।

ट्रम्प बोले- जल्दबाजी में नहीं करेंगे फैसला

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर संकेत दिया कि वह किसी जल्दबाजी में समझौता नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी डील को अंतिम रूप देने से पहले सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाए। ट्रम्प की यह रणनीति इस बात का संकेत मानी जा रही है कि अमेरिका किसी कमजोर या अस्थायी समझौते से बचना चाहता है। दूसरी ओर ईरान की तरफ से अभी तक सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार नहीं किया गया है कि कोई अंतिम सहमति बन चुकी है।

सुप्रीम लीडर की मंजूरी के बिना नहीं लिया जाएगा बड़ा फैसला

पिछले 24 घंटों के घटनाक्रम में कई महत्वपूर्ण संकेत सामने आए हैं। ईरान ने ओमान के जरिए अमेरिका तक एक मौखिक संदेश पहुंचाया है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने बताया कि विदेश मंत्री अब्बास अराघची का संदेश ओमान के विदेश मंत्री को सौंपा गया है। वहीं ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने स्पष्ट किया कि देश में कोई भी बड़ा फैसला सुप्रीम लीडर की मंजूरी के बिना नहीं लिया जाएगा। इससे संकेत मिलता है कि तेहरान अभी भी अपने अंतिम राजनीतिक निर्णय को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए है।

इजराइल की चिंता और रूस-ईरान रिश्तों पर सवाल

अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर इजराइल में चिंता बढ़ गई है। इजराइली अधिकारियों का मानना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान को किसी प्रकार की रणनीतिक राहत मिलती है, तो भविष्य में वह इस मार्ग का इस्तेमाल दबाव बनाने के हथियार के रूप में कर सकता है। इसी बीच रूस और ईरान के संबंधों को लेकर भी नई बहस शुरू हो गई है। पश्चिम एशिया मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों देशों का रिश्ता भरोसे से ज्यादा रणनीतिक जरूरतों पर आधारित रहा है।

रूस और ईरान में विश्वास की कमी

विशेषज्ञ निकिता स्मागिन ने कहा कि रूस और ईरान केवल पश्चिमी दबाव और इंटरनेशनल अलगाव की वजह से करीब आए थे, लेकिन दोनों देशों के बीच वास्तविक विश्वास की कमी हमेशा बनी रही। वहीं कुवैत यूनिवर्सिटी के राजनीतिक विशेषज्ञ अब्दुल्ला अलशायजी ने इस पूरे संकट को ट्रम्प प्रशासन की रणनीतिक भूल बताया। उनके मुताबिक अमेरिका ने ईरान को कमजोर आंकने की गलती की, जिसका परिणाम अब वैश्विक ऊर्जा संकट और बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के रूप में सामने आ रहा है।

कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दे रहा अमेरिका

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि अमेरिका अब भी कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दे रहा है और खाड़ी देशों का भी इस प्रस्तावित समझौते को समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यदि यह समझौता सफल होता है तो इससे न केवल पश्चिम एशिया में तनाव कम होगा, बल्कि दुनिया को बढ़ते ऊर्जा संकट से भी राहत मिल सकती है।

नव्य जागरण

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