ईरान का दोटूक संदेश: परमाणु कार्यक्रम पर नहीं होगा समझौता, होर्मुज पर भी अड़ा तेहरान

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच तेहरान ने साफ कर दिया है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम और हाईली एनरिच्ड यूरेनियम पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर कोई दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। साथ ही ईरान ने संकेत दिए हैं कि अगर अमेरिका आर्थिक नाकेबंदी और प्रतिबंध हटाता है तो होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा पूरी तरह व्यापारिक जहाजों के लिए खोला जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान अब स्थायी युद्धविराम और भविष्य में दोबारा संघर्ष न होने की गारंटी चाहता है। तेहरान का कहना है कि अमेरिका को केवल अस्थायी समझौते नहीं बल्कि भरोसेमंद सुरक्षा ढांचा देना होगा। इसी बीच पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और तेल बाजार से लेकर वैश्विक सुरक्षा तक इसका असर दिखाई देने लगा है।
ईरान ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उसने फिर से होर्मुज स्ट्रेट में सैन्य दखल दिया तो क्षेत्र में दोबारा जंग भड़क सकती है। ईरानी अधिकारियों ने साफ कहा कि होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की संप्रभुता किसी भी बातचीत का हिस्सा नहीं बनेगी। यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में गिना जाता है। यहां तनाव बढ़ने से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है। दूसरी तरफ अमेरिका का दावा है कि उसने 70 से ज्यादा जहाजों को ईरानी बंदरगाहों तक पहुंचने या वहां से निकलने से रोका। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक इन जहाजों में करीब 13 अरब डॉलर कीमत का तेल ले जाने की क्षमता थी। इस कार्रवाई के बाद खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां और बढ़ गई हैं।
UAE पर मिसाइल और ड्रोन हमलों का दावा
तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने दावा किया है कि ईरान की तरफ से दो बैलिस्टिक मिसाइल और तीन ड्रोन दागे गए। हालांकि UAE के एयर डिफेंस सिस्टम ने इन्हें हवा में ही नष्ट कर दिया। इस हमले में तीन लोगों के घायल होने की खबर है। खाड़ी देशों में बढ़ते हमलों ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की चिंता बढ़ा दी है। क्षेत्र में एयर डिफेंस सिस्टम को हाई अलर्ट पर रखा गया है। वहीं ईरान की तरफ से इस मुद्दे पर आधिकारिक बयान सीमित रखा गया है। लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधियों के कारण पश्चिम एशिया में अस्थिरता का खतरा और गहरा हो गया है।
30 दिन के युद्धविराम पर बातचीत जारी
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच 30 दिन तक संघर्ष रोकने के प्रस्ताव पर चर्चा चल रही है। इस समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट को व्यापारिक जहाजों के लिए खोला जा सकता है। हालांकि सबसे बड़ा विवाद अब भी ईरान का परमाणु कार्यक्रम और एनरिच्ड यूरेनियम बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर सख्त नियंत्रण माने, जबकि ईरान इसे राष्ट्रीय अधिकार बता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों देशों के बीच कोई सीमित समझौता भी होता है तो इससे वैश्विक बाजार को बड़ी राहत मिल सकती है।
तेल और सोने की कीमतों में उछाल
होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर दिखा है। ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI भी तेजी के साथ ऊपर चढ़ा। निवेशकों में अनिश्चितता बनी हुई है। हालांकि अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीद से सोने की कीमतों में भी उछाल देखा गया। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अगर खाड़ी क्षेत्र में हालात और बिगड़ते हैं तो कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। इससे दुनियाभर में महंगाई का दबाव भी तेज होगा।
नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई पर बढ़ी नजर
ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई इस समय अमेरिका के साथ बातचीत और युद्ध रणनीति में अहम भूमिका निभा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध और कई बड़े सैन्य अधिकारियों की मौत के बाद ईरानी सत्ता तंत्र दबाव में दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि जिस हमले में पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई मारे गए थे, उसी हमले में मोजतबा भी घायल हुए थे। बताया जा रहा है कि वह फिलहाल सीधे इलेक्ट्रॉनिक संचार से बच रहे हैं और भरोसेमंद लोगों के जरिए संदेश भेज रहे हैं। उनकी सेहत और सरकार पर पकड़ को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं।
हिजबुल्लाह और इजराइल के बीच संघर्ष तेज
दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह ने दावा किया है कि उसने इजराइली सेना पर 26 हमले किए हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक इन हमलों में इजराइली सेना को नुकसान पहुंचा है, हालांकि हताहतों का आंकड़ा जारी नहीं किया गया। दूसरी तरफ इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। इन हमलों में 30 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर है। मार्च से जारी संघर्ष में अब तक लेबनान में 2700 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं जबकि हजारों घायल हुए हैं। इसी बीच अमेरिका ने घोषणा की है कि इजराइल और लेबनान के बीच अगली शांति वार्ता 14 और 15 मई को होगी। इसमें सीमा विवाद, पुनर्निर्माण और स्थायी शांति जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
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