ईरान की चेतावनी; अमेरिका पर नहीं भरोसा: होर्मुज बंद किया तो किसी को गुजरने नहीं देंगे, सीजफायर पर विवाद जारी

ईरान ने अमेरिका पर सख्त बयान दिया है। उसने साफ कहा कि उसे अमेरिका पर भरोसा नहीं है। हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने शनिवार रात यह चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि सेना पूरी तरह तैयार है। अगर ईरान के जहाज होर्मुज स्ट्रेट से नहीं गुजर पाए, तो किसी और देश के जहाज भी वहां से नहीं गुजर सकेंगे। इस बयान के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ गया है।
गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका की तरफ से ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई नाकेबंदी गलत है। यह फैसला गैर-जिम्मेदाराना है। इससे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि होर्मुज में किसी भी तरह की माइन-क्लियरिंग कार्रवाई को सीजफायर का उल्लंघन माना जाएगा। ईरान इसका जवाब देगा। उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत के लिए ईरान तैयार है। लेकिन इसे कमजोरी समझना बड़ी भूल होगी। गालिबाफ के मुताबिक, अमेरिका के पास संसाधन ज्यादा हैं। फिर भी रणनीतिक स्तर पर वह ईरान के सामने कमजोर दिख रहा है।
24 घंटे के बड़े अपडेट
पिछले 24 घंटे में कई बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं। होर्मुज में दो भारतीय जहाजों पर फायरिंग की खबर आई। कुल 14 जहाजों को रोका गया। इनमें से 13 जहाज वापस लौट गए। भारत ने इस पर सख्त विरोध जताया। ईरान के राजदूत को तलब किया गया। इसके साथ ही ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद कर दिया। उसने अमेरिका पर सीजफायर तोड़ने का आरोप लगाया।
वहीं, अमेरिका ने सप्लाई संकट को देखते हुए बड़ा कदम उठाया। उसने अपने इमरजेंसी ऑयल रिजर्व से 2.6 करोड़ बैरल तेल जारी किया। इससे ग्लोबल मार्केट को राहत देने की कोशिश की गई। दूसरी तरफ, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का नया दौर शुरू हो सकता है। यह बैठक पाकिस्तान में होने की संभावना है। हालांकि अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसी बीच डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान पर नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी। उन्होंने दावा किया कि समझौता करीब है।
चीनी जहाज को लौटाया
ईरान ने सख्ती दिखाते हुए एक चीनी जहाज को भी रोक दिया। ‘सन प्रोफिट’ नाम का यह जहाज होर्मुज से गुजरना चाहता था। लेकिन उसे अनुमति नहीं मिली। ईरान ने उसे वापस लौटने पर मजबूर कर दिया। ईरान का कहना है कि बिना मंजूरी कोई भी जहाज इस रास्ते से नहीं गुजर सकता। हर जहाज को अलग से अनुमति लेनी होगी। किसी को भी ब्लैंकेट अप्रूवल नहीं दिया जाएगा।
हूती विद्रोहियों की चेतावनी
यमन के हूती विद्रोहियों ने भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि अगर उन पर हमला हुआ तो वे जवाब देंगे। हूती सरकार के रक्षा मंत्री ने कहा कि उनकी सेना हाई अलर्ट पर है। वे किसी भी स्थिति के लिए तैयार हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि रेड सी में समुद्री ट्रैफिक को निशाना बनाया जा सकता है। इससे इस अहम समुद्री मार्ग पर खतरा बढ़ सकता है।
मिडिल ईस्ट में दो सीजफायर लागू
मिडिल ईस्ट में फिलहाल दो सीजफायर लागू हैं। लेकिन दोनों को लेकर विवाद बना हुआ है। पहला सीजफायर अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल से लागू है। यह 22 अप्रैल तक चलेगा। पाकिस्तान ने इसमें मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। इस समझौते को लेकर मतभेद हैं। पाकिस्तान और ईरान का कहना है कि इसमें लेबनान भी शामिल है। लेकिन अमेरिका और इजराइल इससे सहमत नहीं हैं। दूसरा सीजफायर इजराइल और लेबनान के बीच 16 अप्रैल से लागू हुआ। यह 26 अप्रैल तक जारी रहेगा। इसे अमेरिका ने घोषित किया था। दोनों देशों ने इसका स्वागत किया। हिजबुल्लाह ने भी इसमें शामिल होने की बात कही। लेकिन उसने शर्त रखी कि पूरे लेबनान में हमले पूरी तरह बंद हों। वहीं, इजराइल ने साफ किया कि उसकी सेना दक्षिण लेबनान में तैनात रहेगी। करीब 10 किलोमीटर अंदर तक उसकी मौजूदगी बनी रहेगी।
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