इजरायल-लेबनान के बीच 3 हफ्ते बढ़ा सीजफायर: ट्रम्प का बड़ा ऐलान, दो दशकों के बाद दोनों देशों के बीच बातचीत

24 अप्रैल 2026
ट्रम्प का बड़ा ऐलान, दो दशकों के बाद दोनों देशों के बीच बातचीत

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है। इजरायल और लेबनान के बीच चल रहे संघर्ष-विराम को तीन हफ्तों के लिए बढ़ा दिया गया है। इस फैसले की जानकारी अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दी। उन्होंने व्हाइट हाउस में बातचीत के दौरान कहा कि यह निर्णय इजरायल और लेबनान के राजदूतों के बीच हुई मीटिंग में लिया गया। पिछले कुछ दिनों में यह दूसरी अहम बैठक थी। हालांकि, शुरुआती सीजफायर के बाद भी कई बार दोनों पक्षों ने इसका उल्लंघन किया। इसके बावजूद बातचीत जारी रहना सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

डोनाल्ड ट्रम्प ने ओवल ऑफिस में कहा कि स्थिति अभी भी संवेदनशील है। उन्होंने माना कि केवल इजरायल ही नहीं बल्कि लेबनान को भी ध्यान में रखना होगा। इसी वजह से अमेरिका मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। ट्रम्प ने उम्मीद जताई कि आने वाले हफ्तों में बेंजामिन नेतन्याहू और जोसेफ आउन के साथ वॉशिंगटन में मुलाकात हो सकती है। इस मीटिंग से आगे का रोडमैप तय किया जाएगा।

दशकों बाद सीधी बातचीत

इजरायल और लेबनान के बीच यह बातचीत काफी अहम मानी जा रही है। करीब दो दशकों बाद दोनों देशों के बीच सीधी कूटनीतिक बातचीत हुई है। 1948 में इजरायल के गठन के बाद से दोनों देश औपचारिक रूप से युद्ध की स्थिति में रहे हैं। ऐसे में यह डायलॉग एक बड़ा बदलाव है। शुरुआती 10 दिन का सीजफायर खत्म होने वाला था। लेकिन इसे अब तीन हफ्ते और बढ़ा दिया गया है। लेबनान की राजदूत नाडा हमादेह मोवाड ने इस पहल के लिए ट्रंप का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ही स्थायी शांति संभव है।

लेबनान की मांगें और आगे की रणनीति

जोसेफ आउन ने साफ किया है कि आगे की बातचीत का मकसद स्पष्ट है। इसमें इजरायली हमलों को पूरी तरह रोकना शामिल है। साथ ही लेबनान से इजरायली सैनिकों की वापसी भी बड़ी मांग है। इसके अलावा कैदियों की रिहाई, सीमा पर लेबनानी सेना की तैनाती और युद्ध के बाद पुनर्निर्माण भी एजेंडा में है। लेबनान चाहता है कि इस बार बातचीत सिर्फ अस्थायी शांति तक सीमित न रहे बल्कि स्थायी समाधान निकले।

इजरायल का रुख क्या है

इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने साफ कहा है कि उनका विवाद लेबनान से नहीं बल्कि हिजबुल्लाह से है। उन्होंने लेबनान से अपील की कि वह हिजबुल्लाह को निहत्था करने में सहयोग करे। सार ने कहा कि दोनों देशों के बीच छोटे-मोटे सीमा विवाद हैं जिन्हें बातचीत से सुलझाया जा सकता है। लेकिन हिजबुल्लाह की मौजूदगी ही सबसे बड़ी बाधा है। इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में करीब 10 किलोमीटर तक बफर जोन बना रखा है। इसका मकसद रॉकेट और मिसाइल हमलों को रोकना है।

हिजबुल्लाह की अलग स्थिति

इस पूरे प्रोसेस में हिजबुल्लाह सीधे तौर पर शामिल नहीं है। संगठन के सीनियर सदस्य वफीक सफा ने साफ कहा है कि वे इस बातचीत में हुए किसी भी समझौते को मानने के लिए बाध्य नहीं हैं। यह बयान स्थिति को और जटिल बनाता है। यानी एक तरफ सरकारें बातचीत कर रही हैं। वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।

नव्य जागरण

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