अब्राहम समझौते की अपील पर भड़का लश्कर: पाक सरकार को दी खुली धमकी, ट्रम्प के इजराइल प्रस्ताव पर भारी बवाल

इस्लामाबाद|1 घंटा पहले
पाक सरकार को दी खुली धमकी, ट्रम्प के इजराइल प्रस्ताव पर भारी बवाल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से मुस्लिम देशों से इजराइल को मान्यता देने की अपील की थी। जिसके बाद से पाकिस्तान में राजनीतिक और कट्टरपंथी हलकों में हलचल तेज हो गई है। आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी ने पाकिस्तान सरकार और सेना के शीर्ष नेतृत्व को खुली धमकी दी है। कहा है कि यदि पाकिस्तान ने इजराइल को एक राष्ट्र के रूप में स्वीकार करने की दिशा में कोई कदम उठाया, तो उसका अंजाम बेहद विनाशकारी होगा। सैफुल्लाह की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिका ‘अब्राहम समझौते’ के तहत कई मुस्लिम देशों को इजराइल के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने के लिए प्रेरित कर रहा है।

एक सार्वजनिक रैली को संबोधित करते हुए सैफुल्लाह कसूरी ने बेहद भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल किया और पाकिस्तान सरकार पर अप्रत्यक्ष हमला बोला। उसने कहा कि यदि पाकिस्तान ने दशकों पुरानी विदेश नीति बदलने की कोशिश की तो “उसे खत्म कर दिया जाएगा, तबाह कर दिया जाएगा।” आतंकी संगठन के इस बयान को पाकिस्तान के भीतर बढ़ते वैचारिक टकराव और सत्ता प्रतिष्ठान पर कट्टरपंथी दबाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। भाषण के दौरान उसने जिहाद, शहादत और फिलिस्तीन संघर्ष से जुड़े उग्र नारों का इस्तेमाल कर समर्थकों को भावनात्मक रूप से भड़काने की कोशिश की है।

ट्रम्प की अपील के बाद बढ़ी हलचल

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में पाकिस्तान समेत कई मुस्लिम देशों से ‘अब्राहम समझौते’ के तहत इजराइल को मान्यता देने और उसके साथ औपचारिक कूटनीतिक संबंध स्थापित करने की अपील की थी। ट्रंप का कहना था कि मिडिल ईस्ट में स्थायी शांति और आर्थिक सहयोग के लिए मुस्लिम देशों और इजराइल के बीच संवाद बढ़ाना जरूरी है। माना जा रहा है कि अमेरिका इस पहल के जरिए पश्चिम एशिया में नए रणनीतिक समीकरण तैयार करना चाहता है। ट्रंप की इस अपील के बाद पाकिस्तान में कट्टरपंथी संगठनों ने विरोध तेज कर दिया है। सैफुल्लाह कसूरी ने दावा किया कि कोई भी वैश्विक शक्ति इस्लामी देशों को इजराइल को मान्यता देने के लिए मजबूर नहीं कर सकती है। उसने पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच मजबूत हो रहे रक्षा संबंधों का हवाला देते हुए यह भी कहा कि पाकिस्तान की सैन्य क्षमता इतनी मजबूत है कि वह इजराइल के प्रभाव का मुकाबला कर सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान वास्तविक रणनीतिक शक्ति प्रदर्शन से ज्यादा घरेलू राजनीतिक संदेश देने का प्रयास हैं।

पाकिस्तान की राजनीति और सेना पर उठे सवाल

सुरक्षा और विदेश नीति के जानकारों का कहना है कि लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष आतंकी की यह बयानबाजी केवल कट्टरपंथी विचारधारा का प्रदर्शन नहीं, बल्कि पाकिस्तान की आंतरिक सत्ता संरचना और सैन्य प्रतिष्ठान पर दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकती है। कुछ एक्सपर्ट्स इसे पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर पर अमेरिकी दबाव से बचने के लिए तैयार किया गया नियंत्रित नैरेटिव भी मान रहे हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तान इंटरनेशनल लेवल पर अमेरिका और अरब देशों के साथ संतुलन बनाए रखना चाहता है। वहीं डोमेस्टिक लेवलपर कट्टरपंथी संगठनों को भी नाराज नहीं करना चाहता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि भविष्य में पाकिस्तान इजरायल को लेकर किसी प्रकार की नरम नीति अपनाता है, तो उसे देश के भीतर कट्टरपंथी संगठनों और धार्मिक समूहों के भारी विरोध का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल पाकिस्तान सरकार ने इस पूरे विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन आतंकी संगठन की खुली धमकी ने क्षेत्रीय सुरक्षा और पाकिस्तान की आंतरिक स्थिरता को लेकर नई चिंताएं जरूर खड़ी कर दी हैं।

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