मिडिल ईस्ट तनाव से तेल बाजार में उबाल: कच्चा तेल 126 डॉलर के पार, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बढ़ा दबाव

30 अप्रैल 2026
कच्चा तेल 126 डॉलर के पार, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बढ़ा दबाव

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का सीधा असर अब ग्लोबल ऑयल मार्केट पर साफ दिख रहा है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 126 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। यह मार्च 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। फिलहाल कीमत 125 डॉलर के आसपास बनी हुई है। यह उछाल अचानक नहीं आया है, बल्कि क्षेत्र में जारी जियोपॉलिटिकल टेंशन का नतीजा है। इससे दुनियाभर के बाजारों में चिंता बढ़ गई है। निवेशक सतर्क हो गए हैं और ऊर्जा सेक्टर में अस्थिरता बढ़ती जा रही है।

इस उछाल के पीछे एक बड़ी वजह डोनाल्ड ट्रम्प का बयान माना जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका ईरान के बंदरगाहों पर अपनी सैन्य नाकेबंदी जारी रखेगा। यह तब तक जारी रहेगी, जब तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौता नहीं करता। इस बयान के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। इससे तेल सप्लाई को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। बाजार में डर है कि सप्लाई चेन बाधित हो सकती है, जिससे कीमतें और बढ़ सकती हैं।

होर्मुज बना चिंता का केंद्र

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे ज्यादा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पड़ रहा है। यह दुनिया के सबसे अहम तेल सप्लाई रूट्स में से एक है। यहां से बड़ी मात्रा में तेल का ट्रांसपोर्ट होता है। अगर यहां कोई बाधा आती है, तो वैश्विक सप्लाई पर सीधा असर पड़ता है। मौजूदा हालात में यहां तनाव बढ़ने से बाजार में घबराहट है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अगर स्थिति और बिगड़ी, तो कीमतें 140 डॉलर तक भी जा सकती हैं।

ईरान का पलटवार, 140 डॉलर का इशारा

ईरान की तरफ से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने तंज कसते हुए कहा कि तेल की कीमतों का अगला पड़ाव 140 डॉलर हो सकता है। उन्होंने अमेरिकी नीतियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। साथ ही उन्होंने अमेरिकी अधिकारियों पर भी कटाक्ष किया और कहा कि गलत सलाह के कारण यह स्थिति बनी है। इससे साफ है कि दोनों देशों के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई है।

अमेरिका का युद्ध खर्च बढ़ा, 25 अरब डॉलर पार

मिडिल ईस्ट में चल रहे इस संघर्ष का आर्थिक असर भी बड़ा है। यूनाइटेड स्टेटस ने पिछले दो महीनों में इस युद्ध पर करीब 25 अरब डॉलर खर्च कर दिए हैं। यह जानकारी अमेरिकी रक्षा विभाग के अधिकारी जूल्स डब्ल्यू. हर्स्ट ने दी। इस खर्च का बड़ा हिस्सा हथियार, मिसाइल और गोला-बारूद पर हुआ है। यह आंकड़ा दिखाता है कि युद्ध कितना महंगा साबित हो रहा है और इसका असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

अन्य बड़े घटनाक्रम भी बढ़ा रहे तनाव

इस बीच कई और घटनाएं भी सामने आई हैं, जो हालात को और जटिल बना रही हैं। यूनाइटेड नेशन में ईरान ने अमेरिका के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। उसने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने उसके जहाज जब्त किए और लाखों बैरल तेल पर कब्जा किया। वहीं लेबनान में हालात गंभीर होते जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक वहां 12 लाख से ज्यादा लोग खाद्य संकट का सामना कर सकते हैं। यह स्थिति मानवीय संकट की ओर इशारा करती है।

भारत की सक्रिय कूटनीति, बातचीत जारी

भारत भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की। इस दौरान युद्धविराम, क्षेत्रीय हालात और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा हुई। भारत का फोकस शांति बनाए रखने और अपने हितों की सुरक्षा पर है। खासकर ऊर्जा सप्लाई को लेकर भारत सतर्क है।

नव्य जागरण

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