नेपाल के गृहमंत्री सूदन गुरुंग का इस्तीफा: शेयर और मनी लॉन्ड्रिंग विवाद के बीच लिया फैसला, सोशल मीडिया के माध्यम से दी जानकारी

नेपाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। देश के गृहमंत्री सूदन गुरुंग ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने यह फैसला बढ़ते विवाद और जांच के बीच लिया है। सूदन गुरुंग ने खुद सोशल मीडिया के जरिए इस्तीफे की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ उठ रहे सवालों और जांच को उन्होंने गंभीरता से लिया है। ऐसे में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और हितों के टकराव से बचने के लिए उन्होंने पद छोड़ना उचित समझा। उनके इस कदम को नेपाल की राजनीति में बड़ा संकेत माना जा रहा है।
सूदन गुरुंग ने अपने बयान में साफ कहा कि उनके लिए पद से बड़ा नैतिकता का मुद्दा है। उन्होंने लिखा कि जनविश्वास से बड़ी कोई ताकत नहीं होती। अगर सरकार पर सवाल उठते हैं, तो उसका जवाब नैतिकता से ही दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि देश में सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग बढ़ रही है। उन्होंने खासतौर पर जेन जी आंदोलन का जिक्र किया। कहा कि युवाओं का यह आंदोलन साफ संदेश देता है कि सार्वजनिक जीवन साफ और जवाबदेह होना चाहिए। उनके अनुसार, यही समय है जब नेताओं को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और उदाहरण पेश करना चाहिए।
क्या हैं मुख्य आरोप
सूदन गुरुंग पर कई गंभीर आरोप लगे थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने शेयर निवेश की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की। साथ ही उन पर एक ऐसे कारोबारी से आर्थिक संबंध रखने का आरोप है, जिस पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस चल रहा है। यह कारोबारी दीपक भट्टा बताया जा रहा है। दीपक भट्टा को एक अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था। उसके खिलाफ जांच जारी है। आरोप है कि गुरुंग और भट्टा के बीच कारोबारी रिश्ते थे। इसी वजह से मामला और संवेदनशील हो गया।
कंपनियों में निवेश को लेकर सवाल
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गुरुंग ने दो कंपनियों में निवेश किया था। इनमें लिबर्टी माइक्रो लाइफ इंश्योरेंस और स्टार माइक्रो इंश्योरेंस शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इन दोनों कंपनियों का संबंध दीपक भट्टा और जगदंबा ग्रुप से है। आरोप है कि गुरुंग ने इन कंपनियों में 25-25 हजार शेयर खरीदे थे। यह जानकारी पूरी तरह सार्वजनिक नहीं की गई थी। इसी को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठे। विपक्ष और जनता दोनों ने इस पर प्रतिक्रिया दी।
गुरुंग का बचाव और सफाई
आरोपों पर सूदन गुरुंग ने अपनी सफाई भी दी। उन्होंने माना कि उनके पास इन कंपनियों में करीब 50 लाख रुपये के शेयर हैं। लेकिन उन्होंने कहा कि इसमें कुछ भी छिपाया नहीं गया है। उनका कहना है कि अगर कोई व्यक्ति संपत्ति छिपाना चाहता है, तो वह खुलेआम इतनी बड़ी राशि घोषित नहीं करता। उन्होंने यह भी कहा कि यह सिर्फ क्लासिफिकेशन की गलती हो सकती है। यानी निवेश को सही तरीके से दर्ज नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया कि उनका पूरा निवेश पारदर्शी है और इसमें किसी तरह की अनियमितता नहीं है।
युवा नेता का अचानक इस्तीफा
सिर्फ 38 साल के सूदन गुरुंग को नेपाल की राजनीति में एक युवा और उभरते नेता के रूप में देखा जाता था। उनका अचानक इस्तीफा राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। कई लोग इसे नैतिक जिम्मेदारी का उदाहरण बता रहे हैं। वहीं कुछ लोग इसे बढ़ते दबाव का नतीजा मान रहे हैं।
अधूरा नहीं! पूरी खबर पढ़ें नव्य जागरण ऐप पर
ताजा खबरें, लोकल अपडेट और ब्रेकिंग अलर्ट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।










