आर्थिक दबाव में पाकिस्तान: 50 साल बाद शराब एक्सपोर्ट की वापसी, लगातार बढ़ता जा रहा विदेशी कर्ज

06 मई 2026
 50 साल बाद शराब एक्सपोर्ट की वापसी, लगातार बढ़ता जा रहा विदेशी कर्ज

भारी कर्ज और आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने एक बड़ा और प्रतीकात्मक फैसला लिया है। करीब 50 साल बाद देश ने फिर से शराब का निर्यात शुरू कर दिया है। इस कदम को सरकार की नई रेवेन्यू स्ट्रेटेजी के रूप में देखा जा रहा है। अप्रैल 2026 में पाकिस्तान की प्रमुख कंपनी मरी ब्रूअरी ने ब्रिटेन, जापान, पुर्तगाल और थाईलैंड जैसे देशों को बीयर और अन्य अल्कोहलिक ड्रिंक्स की सप्लाई शुरू की। कंपनी का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है और आने वाले समय में एक्सपोर्ट नेटवर्क को तेजी से बढ़ाया जाएगा। खास बात यह है कि यह सप्लाई उन देशों को की जा रही है जो ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन का हिस्सा नहीं हैं।

पाकिस्तान इस समय गंभीर आर्थिक दबाव में है। विदेशी कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है और सरकार की आय-व्यय के बीच बड़ा गैप बना हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक देश पर करीब 138 अरब डॉलर का बाहरी कर्ज है। हर साल बड़ी रकम सिर्फ ब्याज चुकाने में खर्च हो रही है। ऐसे में सरकार नए रेवेन्यू सोर्स तलाश रही है। शराब एक्सपोर्ट का फैसला भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह कदम विदेशी मुद्रा जुटाने में मदद कर सकता है, लेकिन इससे सामाजिक और राजनीतिक बहस भी तेज हो सकती है।

50 साल पुराना बैन और उसकी पृष्ठभूमि

पाकिस्तान में शराब पर प्रतिबंध 1977 में लगाया गया था। उस समय देश के प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो थे। उनके खिलाफ बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन चल रहे थे। विपक्ष ने उन पर पश्चिमी लाइफस्टाइल अपनाने का आरोप लगाया था। इसी दबाव में भुट्टो सरकार ने शराब की बिक्री, नाइट क्लब और बार पर बैन लगा दिया। यह फैसला राजनीतिक मजबूरी और धार्मिक भावनाओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश था। हालांकि उस समय इसे अस्थायी बताया गया था, लेकिन यह लंबे समय तक लागू रहा।

जिया और मुशर्रफ के दौर में बदलाव

भुट्टो के बाद सत्ता में आए जिया उल हक ने इस कानून को और सख्त बना दिया। उन्होंने इसे इस्लामी कानून से जोड़ दिया और मुसलमानों के लिए शराब पूरी तरह गैरकानूनी घोषित कर दी। हालांकि गैर-मुस्लिमों और विदेशी नागरिकों के लिए लाइसेंस सिस्टम रखा गया। बाद में परवेज मुशर्रफ के शासनकाल में इस कानून के लागू करने में कुछ ढील दी गई। इससे शराब की उपलब्धता में थोड़ी आसानी आई, लेकिन बैन औपचारिक रूप से जारी रहा।

मरी ब्रूअरी की वापसी और नई रणनीति

मरी ब्रूअरी पाकिस्तान की इकलौती प्रमुख अल्कोहलिक ड्रिंक निर्माता कंपनी है। पिछले कई सालों से यह कंपनी केवल नॉन-अल्कोहलिक प्रोडक्ट्स जैसे जूस, मिनरल वाटर और फ्लेवर ड्रिंक्स का एक्सपोर्ट कर रही थी। अब इसे 2025 में सरकार से एक्सपोर्ट की अनुमति मिली। कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि पहले चरण में इंटरनेशनल मार्केट में अपनी पहचान बनाना लक्ष्य है। इसके बाद प्रोडक्शन बढ़ाया जाएगा। कंपनी पहले भी भारत, अमेरिका और अफगानिस्तान जैसे देशों को शराब निर्यात कर चुकी है।

बैन के साइड इफेक्ट्स और बहस

पाकिस्तान में शराबबंदी को लेकर लंबे समय से बहस चलती रही है। कुछ लोगों का मानना है कि इस पाबंदी ने अवैध शराब माफिया को बढ़ावा दिया। कई मामलों में जहरीली शराब से मौतें भी हुईं। वहीं कुछ एक्सपर्ट्स का दावा है कि शराब पर रोक के कारण लोग ज्यादा खतरनाक ड्रग्स जैसे हेरोइन की ओर बढ़े। आंकड़े बताते हैं कि 1980 के दशक में पाकिस्तान हेरोइन के बड़े उपभोक्ताओं में शामिल हो गया था। इससे यह सवाल उठता है कि क्या केवल प्रतिबंध से सामाजिक समस्याएं खत्म की जा सकती हैं।

इतिहास और सामाजिक परिप्रेक्ष्य

इतिहासकारों के मुताबिक दक्षिण एशिया में शराब का सेवन हजारों साल पुराना है। सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर मुगल काल तक शराब और अन्य नशीले पदार्थों का इस्तेमाल होता रहा है। यह धारणा कि शराब केवल औपनिवेशिक दौर की देन है, पूरी तरह सही नहीं मानी जाती। पाकिस्तान का यह नया फैसला एक तरह से परंपरा, धर्म और आर्थिक जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नीति देश की अर्थव्यवस्था और समाज पर कितना असर डालती है।

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