ट्रंप की ईरान को खुली चेतावनी : बोले- नहीं माने तो ‘पहले से ज्यादा भयावह’ होगी बमबारी, ट्रंप के बयान से बढ़ा ग्लोबल टेंशन

07 मई 2026
बोले- नहीं माने तो ‘पहले से ज्यादा भयावह’ होगी बमबारी,  ट्रंप के बयान से बढ़ा ग्लोबल टेंशन

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ईरान को खुली धमकी देते हुए कहा कि अगर तेहरान ने अमेरिकी प्रस्ताव नहीं माना, तो इस बार पहले से भी ज्यादा भयावह बमबारी शुरू की जाएगी। ट्रंप के इस बयान ने मिडिल ईस्ट में युद्ध जैसे हालात को और गंभीर बना दिया है।

व्हाइट हाउस से लेकर पेंटागन तक हलचल तेज है। उधर ईरान ने भी जवाबी तेवर दिखाते हुए साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिकी धमकियां बंद नहीं होंगी, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता। दुनिया की सबसे अहम ऑयल सप्लाई रूट पर बढ़ते तनाव ने ग्लोबल मार्केट, तेल व्यापार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति को हिला दिया है।

ट्रंप का सख्त संदेश

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए ईरान को सीधी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर ईरान उन शर्तों को मान लेता है, जिन पर पहले सहमति बनी थी, तो “एपिक फ्यूरी” अभियान समाप्त हो सकता है और होर्मुज की नाकाबंदी भी हट जाएगी। लेकिन ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि अगर तेहरान पीछे नहीं हटता, तो अमेरिका पहले से ज्यादा विनाशकारी सैन्य कार्रवाई करेगा। उनके बयान के बाद अमेरिकी रक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर आ गई हैं। माना जा रहा है कि अमेरिका खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी और बढ़ा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप की यह भाषा केवल कूटनीतिक दबाव नहीं है। यह एक बड़ा सैन्य संकेत भी माना जा रहा है। खासकर उस समय जब अमेरिका पहले ही ईरान समर्थित ठिकानों पर कार्रवाई कर चुका है।

होर्मुज पर ईरान का पलटवार

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स यानी IRGC ने भी अमेरिका को तीखा जवाब दिया है। बुधवार को जारी बयान में कहा गया कि जब तक अमेरिकी धमकियां जारी रहेंगी, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की गारंटी नहीं दी जा सकती। IRGC का यह बयान उस समय आया, जब अमेरिका ने “प्रोजेक्ट फ्रीडम” को रोकने की घोषणा की। यह वही समुद्री अभियान था, जिसके जरिए अमेरिका वैश्विक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा था। ईरान लंबे समय से कहता रहा है कि अगर उस पर दबाव बढ़ाया गया, तो वह होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर सकता है। यह समुद्री रास्ता दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल सप्लाई का प्रमुख मार्ग माना जाता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव सीधे ग्लोबल इकोनॉमी को प्रभावित करता है।

चीन पर भी बोले ट्रंप

ईरान मुद्दे पर चीन की भूमिका को लेकर भी ट्रंप ने बड़ा बयान दिया। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि चीन ने अमेरिकी नाकेबंदी को कोई सीधी चुनौती नहीं दी है। ट्रंप ने दावा किया कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनके रिश्ते बेहतर हैं और बीजिंग फिलहाल सीधे टकराव से बच रहा है। हालांकि चीन लगातार अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई की आलोचना करता रहा है। चीन का कहना है कि पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात पूरी दुनिया के लिए खतरा बन सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चीन खुलकर ईरान के पक्ष में नहीं आ रहा, लेकिन वह अमेरिका के दबाव को संतुलित करने की रणनीति पर काम कर रहा है। रूस भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।

अमेरिकी विदेश मंत्री बोले- दुनिया पर अहसान कर रहा अमेरिका

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी ईरान पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देश होर्मुज को खुलवाना चाहते हैं, लेकिन उनके पास नौसेना और सैन्य संसाधनों की कमी है। ऐसे में वैश्विक समुद्री व्यापार को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी अमेरिका उठा रहा है। रूबियो ने दावा किया कि ईरान का यह कहना कि उसे परमाणु हथियार नहीं चाहिए, पूरी तरह झूठा है। उन्होंने कहा कि ईरान की गतिविधियां उसके दावों से मेल नहीं खातीं। अमेरिका का आरोप है कि ईरान लगातार परमाणु क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। हालांकि तेहरान इन आरोपों को खारिज करता रहा है।

ग्लोबल मार्केट में बढ़ी बेचैनी

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव जारी है। निवेशकों में डर बढ़ गया है कि अगर होर्मुज पूरी तरह बंद हुआ, तो दुनिया में बड़ा ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है। मिडिल ईस्ट में पहले से ही अस्थिर हालात हैं। ऐसे में ट्रंप की चेतावनी और ईरान की जवाबी प्रतिक्रिया ने हालात को और विस्फोटक बना दिया है। दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में यह टकराव बातचीत में बदलता है या बड़े सैन्य संघर्ष में।

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