ट्रम्प ने ईरान का प्रस्ताव ठुकराया: समय निकालने का खेल खेल रहा ईरान, अमेरिका की कड़ी शर्तें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान का नया प्रस्ताव खारिज कर दिया। ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, “यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया जा सकता।” ट्रम्प ने कहा, जवाब बिल्कुल पसंद नहीं आया। इससे पहले भी ट्रम्प ईरान पर आरोप लगा चुके हैं। उन्होंने कहा था, ईरान समय निकालने का खेल खेल रहा। दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ता दिख रहा। युद्ध रोकने की कोशिशों को बड़ा झटका लगा। वॉशिंगटन और तेहरान के बीच भरोसा कमजोर पड़ा। अमेरिकी प्रशासन अब सख्त रुख अपनाता दिख रहा। वहीं ईरान ने अपने प्रस्ताव को व्यावहारिक बताया। ईरानी अधिकारियों ने कहा, अब फैसला अमेरिका को करना। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संपर्क जारी हैं। लेकिन हालात अभी भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए। पश्चिम एशिया में सैन्य गतिविधियां लगातार तेज होती दिख रहीं।
अमेरिका ने इस सप्ताह 14 सूत्रीय प्रस्ताव भेजा। इसमें कई सख्त शर्तें शामिल थीं। अमेरिका चाहता है, ईरान यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह रोके। प्रस्ताव के मुताबिक, कम से कम 12 साल रोक जरूरी। अमेरिका ने 60% एनरिच्ड यूरेनियम सौंपने की मांग रखी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 440 किलो यूरेनियम मौजूद है। इसके बदले प्रतिबंधों में राहत देने की पेशकश हुई। अमेरिका ने फ्रीज संपत्तियां छोड़ने का भरोसा दिया। नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की बात भी शामिल रही। लेकिन ईरान पूरी तरह झुकने को तैयार नहीं। तेहरान परमाणु कार्यक्रम छोड़ने के पक्ष में नहीं। ईरानी नेताओं ने कहा, राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। ईरान ने बातचीत जारी रखने की इच्छा जताई। लेकिन हाईली एनरिच्ड यूरेनियम पर समझौता मुश्किल दिखा। दोनों देशों के बीच सीजफायर औपचारिक रूप से खत्म नहीं हुआ। इसके बावजूद हालात लगातार अस्थिर बने हुए हैं।
तेल संकट गहराया, होर्मुज में बढ़ी बेचैनी
अमेरिका द्वारा प्रस्ताव ठुकराने के बाद बाजार हिल गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं। ब्रेंट क्रूड 104 डॉलर प्रति बैरल पार पहुंचा। निवेशकों में सप्लाई बाधित होने की चिंता बढ़ी। दुनिया की नजर अब होर्मुज स्ट्रेट पर टिकी। यह दुनिया का सबसे अहम समुद्री मार्ग माना जाता। बड़ी मात्रा में तेल और गैस यहीं से गुजरती। अमेरिका ने दावा किया, कई जहाज रास्ता बदल रहे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 65 जहाजों ने दिशा बदली। कतर और दक्षिण कोरिया के जहाज प्रभावित हुए। कुछ जहाजों पर हमले और रुकावट की खबरें आईं। समुद्री व्यापार कंपनियों में चिंता बढ़ती दिख रही। बीमा कंपनियां भी जोखिम का आकलन कर रहीं। खाड़ी देशों में सुरक्षा अलर्ट लगातार बढ़ाए जा रहे। ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और गहराने लगी है।
ईरान की चेतावनी, विदेशी युद्धपोतों पर सख्त संदेश
ईरान ने फ्रांस और ब्रिटेन को खुली चेतावनी दी। तेहरान ने कहा, होर्मुज में दखल बर्दाश्त नहीं होगा। ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा, सुरक्षा सुनिश्चित करना सिर्फ ईरान का अधिकार। किसी विदेशी सैन्य हस्तक्षेप का जवाब तुरंत मिलेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फ्रांस सैन्य मौजूदगी बढ़ा सकता है। फ्रांसीसी एयरक्राफ्ट कैरियर चार्ल्स डी गॉल आगे बढ़ रहा। ब्रिटेन ने भी क्षेत्र में सक्रियता बढ़ाने के संकेत दिए। ईरान ने आरोप लगाया, पश्चिमी देश सैन्यीकरण बढ़ा रहे। तेहरान ने अमेरिका समर्थक देशों को भी चेताया। कहा गया, प्रतिबंधों का समर्थन करने वालों को नुकसान होगा। खाड़ी क्षेत्र में तनाव अब कई देशों तक पहुंचा। UAE और कुवैत में ड्रोन अलर्ट जारी हुए। कतर के पास मालवाहक जहाज पर हमला हुआ। UAE ने दो ईरानी ड्रोन गिराने का दावा किया।
नेतन्याहू का चीन पर बड़ा आरोप
इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने चीन पर गंभीर आरोप लगाए। नेतन्याहू ने कहा, चीन ने ईरान को मदद दी। उन्होंने दावा किया, मिसाइल निर्माण में सहयोग मिला। यह बयान CBS के कार्यक्रम ‘60 मिनट्स’ में दिया। हालांकि नेतन्याहू ने ज्यादा जानकारी साझा नहीं की। उन्होंने कहा, ईरान की सैन्य ताकत कमजोर करना जरूरी। इजराइल इसे अपनी प्राथमिकता मानता है। दूसरी तरफ चीन पहले ही आरोप खारिज कर चुका। बीजिंग का कहना है, निर्यात नियंत्रण बेहद सख्त हैं। चीन ने सैन्य तकनीक सप्लाई के आरोप नकारे। अमेरिका और इजराइल लंबे समय से चिंता जताते रहे। कई रिपोर्ट्स में चीनी कंपनियों का जिक्र हुआ। दावा किया गया, तकनीक और उपकरण सप्लाई हुए। हालांकि सार्वजनिक तौर पर ठोस प्रमाण सामने नहीं आए। इससे वैश्विक राजनीति में नया तनाव बढ़ता दिख रहा।
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