ट्रंप की धमकियों से डरा कनाडा बदलेगा विदेश नीति: चीन के बाद अब भारत के साथ व्यापार बढ़ाने पर जोर, कार्नी जल्द आ सकते हैं भारत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों से परेशान कनाडा अब अपनी विदेश नीति में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। कनाडा अब भारत को अपने मुख्य रणनीतिक और आर्थिक साझेदार के रूप में देख रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी जल्द ही भारत के दौरे पर आ सकते हैं। दो साल से अधिक समय तक रिश्तों में रही खटास के बाद, कनाडा के पीएम के प्रस्तावित दौरे का मकसद दोनों देशों के बीच व्यापार को तेजी से बढ़ाना है। यह बदलाव 'जस्टिन ट्रूडो युग' की राजनयिक कड़वाहट के खत्म होने और ट्रंप की 'संरक्षणवादी' नीतियों से कनाडा की संप्रभुता को बचाने की कोशिश का हिस्सा है।
भारत के लिए बोनस साबित हो सकता है बोनस
भारतीय उच्चायुक्त दिनेश पटनायक के अनुसार, यह यात्रा एक फरवरी को भारतीय बजट पेश होने के बाद, संभवतः मार्च के पहले हफ्ते में हो सकती है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाला कनाडाई प्रतिनिधिमंडल यूरेनियम, ऊर्जा, खनिज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे अहम समझौतों पर हस्ताक्षर करेगा। भारत के लिए भी यह स्थिति फायदेमंद है क्योंकि वह भी ट्रंप द्वारा लगाए गए हैवी टैरिफ की मार झेल रहा है। ऐसे में कनाडा का यह झुकाव भारत के लिए एक बोनस जैसा है, खासकर तब जब भारत ने हाल ही में यूरोपीय संघ के साथ भी एक बड़ा व्यापार समझौता किया है।

दोगुना करेंगे गैर-अमेरिकी निर्यात
कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद और भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बीच भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर सार्थक बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आर्थिक साझेदारी को गहरा करने पर चर्चा की। कनाडा की विदेश मंत्री आनंद ने साफ किया कि कनाडा ट्रंप की धमकियों से नहीं डरेगा और उसे अगले 10 वर्षों में अपने गैर-अमेरिकी निर्यात को दोगुना करना होगा। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि कनाडा के पीएम चीन गए और अब भारत जा रहे हैं, ताकि वे किसी एक देश पर पूरी तरह निर्भर न रहें।
दोनों देश झेल रहे अमेरिकी टैरिफ की मार
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे उत्तरी अमेरिका में बढ़ता व्यापारिक तनाव है। राष्ट्रपति ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर कनाडा चीनी निर्यात के लिए प्रवेश द्वार बनता है, तो कनाडाई सामानों पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा। यह धमकी तब आई जब कनाडा ने खाद्य व्यापार में छूट के बदले सालाना 49,000 चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों को अनुमति देने का सौदा किया। भारत और कनाडा दोनों ही ट्रंप प्रशासन के दबाव का सामना कर रहे हैं। भारत 50% टैरिफ और कनाडा 35% टैरिफ का सामना कर रहा है। इस दबाव ने दोनों देशों को व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) की ओर धकेल दिया है, जिसका लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।
राष्ट्रीय अस्तित्व की चिंता
कनाडा में यह बदलाव सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि वहां राष्ट्रीय अस्तित्व को लेकर भी चिंता है। ट्रंप ने कई बार कनाडा को अमेरिका का संभावित '51वां राज्य' कहा है, जिससे वहां डर का माहौल है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कनाडाई सेना ने अमेरिकी आक्रमण की स्थिति को लेकर मॉडल भी तैयार किए हैं। हालांकि, असली खतरा सैन्य नहीं बल्कि आर्थिक जबरदस्ती का है, जिसमें अमेरिका द्वारा कनाडा के पानी, ऊर्जा और खनिजों तक पहुंच की मांग शामिल है।

भारत को लोकतांत्रिक साझेदार मानता है कनाडा
कनाडा की नई रणनीति भारत के बढ़ते आर्थिक कद के साथ मेल खाती है। कनाडा चीन की तुलना में भारत को लंबी अवधि के लिए एक अधिक स्थिर और लोकतांत्रिक साझेदार मानता है। साथ ही, भारत के साथ रक्षा संबंध बढ़ाना अमेरिका के प्रभुत्व को संतुलित करने में भी मदद करेगा। अगस्त 2025 में राजदूतों की वापसी और राजनयिक कर्मचारियों को बढ़ाने के समझौते से संकेत मिलता है कि दोनों देश खालिस्तानी अलगाववादी नेता की हत्या से जुड़े विवाद को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने को तैयार हैं।
कनाडा के लिए बड़ा जोखिम क्या है?
आने वाले दिनों में कनाडा के ऊर्जा मंत्री टिम हॉजसन भी गोवा जा रहे हैं, जहां वे महत्वपूर्ण खनिजों, यूरेनियम और एलएनजी पर संभावित सौदों पर चर्चा करेंगे। हालांकि, मंत्री अनीता आनंद ने जोर देकर कहा कि अमेरिका के साथ उनके रिश्ते मजबूत बने रहेंगे, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तरी अमेरिकी संबंधों में दरार कनाडा जैसी छोटी अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा जोखिम पैदा कर सकती है।
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