यूएई ऑयल पोर्ट हमले पर भारत सख्त: तीन भारतीय हुए घायल, पीएम नरेंद्र मोदी ने दी कड़ी चेतावनी

भारत ने यूएई के फुजैराह ऑयल पोर्ट पर हुए हमले को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है। इस हमले में तीन भारतीय नागरिक घायल हुए हैं। भारत सरकार ने साफ कहा है कि आम नागरिकों को निशाना बनाना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकार ने सभी पक्षों से संयम बरतने और हिंसा को तुरंत रोकने की अपील की है। विदेश नीति के स्तर पर यह बयान बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है।
नरेंद्र मोदी ने भी इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नागरिकों और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाना अस्वीकार्य है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा। प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं।
फुजैराह पोर्ट पर हुआ बड़ा हमला
फुजैराह में स्थित ऑयल पोर्ट पर यह हमला सोमवार को हुआ। यूएई के अनुसार हमले में बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। सुरक्षा एजेंसियों ने 12 बैलिस्टिक मिसाइल, तीन क्रूज मिसाइल और चार ड्रोन को इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया। इसके बावजूद कुछ नुकसान हुआ और तीन भारतीय नागरिक घायल हो गए। इस हमले ने वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
ईरान पर लगे आरोप
ईरान पर इस हमले का आरोप लगाया गया है। यूएई ने दावा किया है कि हमला ईरान की तरफ से किया गया। हालांकि ईरान की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। इससे क्षेत्र में अनिश्चितता और बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।
कूटनीति और बातचीत पर जोर
भारत ने साफ किया है कि हालात को संभालने का सबसे बेहतर तरीका संवाद और कूटनीति है। सरकार ने कहा कि पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता बनाए रखना बेहद जरूरी है। भारत ने सभी पक्षों से अपील की है कि वे तनाव को कम करें और बातचीत के जरिए समाधान निकालें। यह रुख भारत की पारंपरिक विदेश नीति को दर्शाता है, जिसमें संतुलन और शांति पर जोर दिया जाता है।
होर्मुज स्ट्रेट पर चिंता
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी भारत ने चिंता जताई है। यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से बड़ी मात्रा में तेल की सप्लाई होती है। भारत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत यहां जहाजों की आवाजाही बिना किसी बाधा के जारी रहनी चाहिए। अगर इस रास्ते पर खतरा बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
वैश्विक स्तर पर बढ़ती चिंता
इस हमले के बाद पूरी दुनिया में चिंता बढ़ गई है। तेल बाजार, शिपिंग और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं संभले, तो इसका असर तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए यह स्थिति और भी संवेदनशील है।
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