मोदी-ट्रम्प वार्ता, 40 मिनट तक की बातचीत: ईरान तनाव और होर्मुज स्ट्रेट पर फोकस, वैश्विक व्यापार के लिए समुद्री मार्ग खुला रखने पर दिया जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच लगभग 40 मिनट तक फोन पर महत्वपूर्ण बातचीत हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने ईरान से जुड़े मौजूदा तनाव, पश्चिम एशिया की स्थिति और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर चर्चा की। बातचीत का मुख्य केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला और सुरक्षित बनाए रखने पर रहा, जिसे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है।
दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का खुला रहना अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है। यह मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन रास्तों में से एक है और यहां किसी भी प्रकार का अवरोध वैश्विक बाजार पर बड़ा असर डाल सकता है।
द्विपक्षीय रिश्तों को और मजबूत करने पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के बाद सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में हो रही प्रगति पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका आने वाले समय में अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
सीजफायर के बाद पहली बातचीत
अमेरिका और ईरान के बीच हालिया तनाव कम होने और युद्धविराम (सीजफायर) के बाद यह दोनों नेताओं के बीच पहली बातचीत थी। इससे पहले 24 मार्च को भी मोदी और ट्रम्प के बीच फोन पर चर्चा हुई थी, जिसमें मध्य-पूर्व की स्थिति और शांति बहाली के प्रयासों पर बात हुई थी।
ऊर्जा क्षेत्र में बड़े समझौते की संभावना
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बताया कि बातचीत के दौरान ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति से जुड़े मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा क्षेत्र में बड़े समझौते हो सकते हैं।
दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग
राजदूत के अनुसार, भारत और अमेरिका के रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं। रक्षा, व्यापार, तकनीक और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं। वैश्विक चुनौतियों से निपटने में भी दोनों देशों का सहयोग अहम भूमिका निभा रहा है।
20 दिनों में दूसरी बातचीत
गौरतलब है कि पिछले 20 दिनों में मोदी और ट्रम्प के बीच यह दूसरी बातचीत है, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते संवाद और साझेदारी को दर्शाती है। इससे पहले की बातचीत में भी वैश्विक शांति, व्यापार और रणनीतिक मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया था।
यह बातचीत भारत और अमेरिका के बीच मजबूत होते संबंधों और वैश्विक मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता को प्राथमिकता दी जा रही है।
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