अमेरिका-ईरान मीटिंग का दूसरा राउंड आज: इस्लामाबाद में दोनों देशों के बड़े प्रतिनिधि शामिल, एनरिच्ड यूरेनियम बना मुख्य मुद्दा

25 अप्रैल 2026
 इस्लामाबाद में दोनों देशों के बड़े प्रतिनिधि शामिल, एनरिच्ड यूरेनियम बना मुख्य मुद्दा

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और सीजफायर के बीच आज एक अहम कूटनीतिक पहल होने जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता इस्लामाबाद में आयोजित हो रही है। यह बातचीत ऐसे समय पर हो रही है जब क्षेत्र में हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी तनाव को देखते हुए इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है।

अमेरिका की ओर से डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने विशेष दूत भेजे हैं। इनमें स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर शामिल हैं। वहीं ईरान की तरफ से विदेश मंत्री अब्बास अराघची प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच बातचीत को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। अमेरिका सीधे संवाद की बात कर रहा है जबकि ईरान का कहना है कि बातचीत अप्रत्यक्ष भी हो सकती है।

सीजफायर के बीच बढ़ी उम्मीदें

हाल ही में ईरान और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष-विराम को तीन हफ्ते के लिए बढ़ाया गया है। इससे क्षेत्र में थोड़ी राहत जरूर मिली है। लेकिन 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों के बाद शुरू हुआ संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में इस वार्ता से शांति की दिशा में ठोस कदम उठने की उम्मीद की जा रही है।

व्हाइट हाउस का बयान

व्हाइट हाउस ने कहा है कि यह वार्ता आमने-सामने हो सकती है। प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि अमेरिका को उम्मीद है कि बातचीत सार्थक होगी। उन्होंने कहा कि यह वार्ता किसी बड़े समझौते की दिशा में पहला कदम बन सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस दौरे में शामिल नहीं होंगे लेकिन पूरी प्रक्रिया पर नजर रखेंगे।

पहले दौर में नहीं बनी थी बात

इससे पहले 11-12 अप्रैल को वार्ता का पहला दौर हुआ था। लेकिन वह बेनतीजा रहा। कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई थी। इनमें ईरान का परमाणु कार्यक्रम सबसे बड़ा मुद्दा था। इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और लेबनान में चल रहे संघर्ष को लेकर भी मतभेद रहे। यही कारण है कि इस बार की वार्ता को निर्णायक माना जा रहा है।

एनरिच्ड यूरेनियम बना मुख्य मुद्दा

ईरान ने साफ किया है कि उसे यूरेनियम एनरिच्ड का अधिकार है। हालांकि उसने यह भी संकेत दिए हैं कि एनरिच्ड के स्तर पर बातचीत हो सकती है। अमेरिका इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाए हुए है। यही वजह है कि यह मुद्दा वार्ता की सफलता या असफलता तय कर सकता है। दोनों पक्ष अपने-अपने स्टैंड पर कायम हैं लेकिन कूटनीतिक समाधान की संभावना भी बनी हुई है।

आगे की कूटनीतिक रणनीति

ईरानी प्रवक्ता के अनुसार, इस्लामाबाद वार्ता के बाद अराघची अन्य देशों का दौरा करेंगे। इसमें ओमान और रूस शामिल हैं। इन दौरों का मकसद अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाना और शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। इससे साफ है कि ईरान इस मुद्दे को वैश्विक स्तर पर उठाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

नव्य जागरण

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