पति की लंबी उम्र के लिए करें वट सावित्री व्रत: बरगद पूजा क्यों मानी जाती है शुभ?, इन बातों का रखें खास ध्यान, मिलेगा शुभ फल

हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इस दिन महिलाएं पूरे विधि-विधान से पूजा करती हैं। बरगद के वृक्ष की पूजा को बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि सच्चे मन से व्रत करने पर सुख-समृद्धि मिलती है। दांपत्य जीवन में प्रेम और विश्वास बढ़ता है। इस दिन देवी सावित्री और सत्यवान की कथा सुनी जाती है। कहा जाता है कि सावित्री ने अपने तप और संकल्प से पति के प्राण वापस पाए थे। इसलिए यह व्रत नारी शक्ति और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक जानकारों के अनुसार पूजा के दौरान कुछ नियमों का पालन बेहद जरूरी होता है। छोटी गलती भी व्रत के प्रभाव को कम कर सकती है।
वट सावित्री व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठना शुभ माना जाता है। स्नान के बाद साफ और पारंपरिक कपड़े पहनने चाहिए। महिलाएं इस दिन सोलह श्रृंगार करती हैं। लाल और हरे रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। पूजा से पहले घर और पूजा स्थल साफ करना चाहिए। इसके बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। महिलाएं पूरे दिन निर्जला या फलाहार व्रत रखती हैं। पूजा के दौरान मन शांत रखना जरूरी माना जाता है। किसी से विवाद या कटु शब्द नहीं बोलने चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत के दिन नकारात्मक सोच से बचना चाहिए।
बरगद के वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व
वट सावित्री व्रत में बरगद के पेड़ की पूजा सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। महिलाएं वट वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करती हैं। इसके बाद हल्दी, कुमकुम और सिंदूर चढ़ाया जाता है। फूल और मिठाई का भोग भी लगाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बरगद का वृक्ष लंबी आयु का प्रतीक माना जाता है। महिलाएं पेड़ के चारों तरफ सात बार परिक्रमा करती हैं। परिक्रमा के दौरान कच्चा सूत लपेटा जाता है। यह पति-पत्नी के अटूट रिश्ते का प्रतीक माना जाता है। पूजा के समय सावित्री-सत्यवान कथा जरूर सुननी चाहिए। कथा सुनने के बाद महिलाएं पति और बुजुर्गों का आशीर्वाद लेती हैं। कई जगह पति के साथ दीपक जलाकर पूजा करने की परंपरा भी है। पूजा के बाद बरगद का पत्ता शुभ मानकर अपने पास रखा जाता है।
जानिए वट सावित्री व्रत की शुभ तिथि
पंचांग के अनुसार वट सावित्री व्रत इस साल 16 मई 2026 को रखा जाएगा। वैशाख अमावस्या तिथि 16 मई सुबह पांच बजकर 11 मिनट पर शुरू होगी। यह तिथि 17 मई रात एक बजकर 30 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर 16 मई को व्रत रखा जाएगा। शनिवार का दिन इस बार विशेष शुभ माना जा रहा है। पूजा के लिए सुबह 7:12 बजे से 8:24 बजे तक शुभ समय रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुभ मुहूर्त में पूजा करने से विशेष फल मिलता है। इस दौरान किया गया जप और व्रत अधिक प्रभावशाली माना जाता है। महिलाएं इस समय पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त कर सकती हैं।
पूजा सामग्री में रखें ये जरूरी चीजें
वट सावित्री व्रत की पूजा सामग्री का भी विशेष महत्व होता है। पूजा में कलावा और कच्चा सूत जरूर शामिल करें। सिंदूर, रोली और अक्षत रखना भी आवश्यक माना जाता है। चंदन, फूल और सुपारी भी पूजा में उपयोग किए जाते हैं। धूप और दीपक जलाना शुभ माना जाता है। नारियल और पान के पत्ते भी पूजा सामग्री में रखे जाते हैं। सात प्रकार के अनाज चढ़ाने की परंपरा भी कई जगह है। महिलाएं श्रृंगार का सामान भी पूजा में अर्पित करती हैं। मिठाई और जल से भरा कलश रखना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विधि-विधान से पूजा करने पर सुख-समृद्धि मिलती है। साथ ही परिवार में खुशहाली और वैवाहिक जीवन में स्थिरता बनी रहती है।
अधूरा नहीं! पूरी खबर पढ़ें नव्य जागरण ऐप पर
ताजा खबरें, लोकल अपडेट और ब्रेकिंग अलर्ट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।










